‘गीता रसामृतम-2’ में उमड़ा भक्ति का सागर, हरे कृष्ण महामंत्र पर झूमे हजारों भक्त
Thousands of devotees swayed to the Hare Krishna mantra as the ocean of devotion surged at 'Geeta Rasamritam-2'.
IPN Live
Lucknow, 26 Oct, 2026 03:02 AMइस्कॉन के दो दिवसीय गीता महोत्सव में अपरिमेय श्याम प्रभु ने समझाए जीवन के गूढ़ सवाल, ज्ञान और भक्ति से सराबोर हुआ परिसर
लखनऊ, 26 अक्टूबर 2026 (आईपीएन)। श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान, भक्ति और आध्यात्मिक संदेशों के बीच इस्कॉन, लखनऊ के दो दिवसीय महोत्सव ‘गीता रसामृतम-2’ का समापन भक्तिमय वातावरण में हुआ। शहीद पथ स्थित श्री श्री राधा रमण बिहारी जी मंदिर में आयोजित महोत्सव के अंतिम दिन हजारों भक्त हरे कृष्ण महामंत्र की धुन पर झूम उठे। आध्यात्मिक प्रवचनों, हरिनाम संकीर्तन और मुकुंदा रॉक बैंड की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
महोत्सव के दूसरे और अंतिम दिन का शुभारंभ मंदिर अध्यक्ष अपरिमेय श्याम प्रभु, इस्कॉन गर्ल्स फोरम की निदेशक अचिन्त्य रूपिणी माताजी, साइबर क्राइम के डीजीपी वीके सिंह, उनकी पत्नी पुनीता सिंह माताजी, राहुल चन्दानी प्रभु सहित वरिष्ठ भक्तों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
जीवन के दुख और अन्याय पर दिया आध्यात्मिक दृष्टिकोण
इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष एवं वक्ता अपरिमेय श्याम प्रभु ने प्रवचन में जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर श्रीमद्भगवद्गीता के दृष्टिकोण को सरलता से समझाया। उन्होंने मुख्य रूप से तीन प्रश्नों पर चर्चा की—न चाहते हुए भी मनुष्य दुखी क्यों होता है, बुरे लोगों को दंड क्यों नहीं मिलता और अच्छी लोगों के साथ बुरी घटनाएं क्यों घटती हैं।
उन्होंने कहा कि जीवन की परिस्थितियों को समझने के लिए आध्यात्मिक दृष्टिकोण आवश्यक है। व्यक्ति के कर्म, उनके परिणाम और पुण्य-पाप की अवधारणा को समझकर जीवन की चुनौतियों को बेहतर ढंग से देखा जा सकता है।
भगवान श्रीकृष्ण के छह ऐश्वर्यों का वर्णन
अपरिमेय श्याम प्रभु ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण छह ऐश्वर्यों से परिपूर्ण हैं—पूर्ण ज्ञान, पूर्ण सौंदर्य, पूर्ण बल, पूर्ण धन, पूर्ण यश और पूर्ण वैराग्य। यही दिव्य गुण उन्हें सर्वाकर्षक बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न धर्मों में ईश्वर को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है, लेकिन आध्यात्मिक परंपराओं में परम सत्ता की अवधारणा महत्वपूर्ण स्थान रखती है। उन्होंने सूर्य का उदाहरण देते हुए समझाया कि सूर्य एक ही है, लेकिन विभिन्न भाषाओं में उसके नाम अलग-अलग हैं। इसी प्रकार श्रीमद्भगवद्गीता भगवान श्रीकृष्ण को परम पुरुषोत्तम के रूप में प्रस्तुत करती है।
हरिनाम संकीर्तन पर झूमे श्रद्धालु
महोत्सव के दौरान गृहस्थ भक्तों के आनंदमयी हरिनाम संकीर्तन और मुकुंदा रॉक बैंड की भक्तिमय प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। हरे कृष्ण महामंत्र की धुन पर हजारों भक्त उत्साह के साथ नृत्य करते रहे। पूरा पंडाल भक्ति और उल्लास के वातावरण से गूंज उठा।
दो दिवसीय ‘गीता रसामृतम-2’ में लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के समापन पर भक्तों ने स्वादिष्ट भोजन प्रसाद और भंडारे का आनंद लिया।
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