पूर्व IAS दिव्या मित्तल की राजनीति में 'एंट्री': 13 साल की नौकरी छोड़ बोलीं, "80 साल का हिसाब मांगने आई हूं", यूपी की सियासत में बढ़ी हलचल
Former IAS officer Divya Mittal enters politics: She quit her job after 13 years and declared, "I have come to seek accountability for 80 years," causing a stir in Uttar Pradesh politics.
IPN Live
Lucknow, 29 Sep, 2026 08:49 PMजितेन्द्र त्रिपाठी
लखनऊ, 29 सितम्बर 2026 (आईपीएन)। उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मंगलवार को एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी राजनीतिक पारी का औपचारिक ऐलान कर दिया। करीब 13 वर्षों तक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद हाल ही में इस्तीफा देने वाली दिव्या मित्तल ने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी स्थापित राजनीतिक दल का दामन नहीं थामेंगी, बल्कि आम जनता के साथ मिलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच खड़ा करेंगी।
उनके इस ऐलान के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। प्रशासनिक सेवा से राजनीतिक मैदान में उतरने जा रहीं दिव्या मित्तल का यह कदम ऐसे समय आया है जब प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे आकार लेने लगी हैं।
करीब नौ मिनट से अधिक लंबे वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने खुद को व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की आवाज बनना है जिनकी समस्याएं सरकारी दफ्तरों में फाइलों के बीच दब जाती हैं।
उन्होंने कहा, "मैं देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब मांगने आई हूं। मैं उन लोगों की आवाज बनने आई हूं जिनकी सुनवाई नहीं होती।"
किसी दल में नहीं जाएंगी, जनता के साथ बनाएंगी मंच
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में साफ कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा किसी राजनीतिक दल के सहारे नहीं चलेगी। उन्होंने भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस या किसी अन्य स्थापित दल में शामिल होने की अटकलों को विराम देते हुए कहा कि वह जनता के सहयोग से एक नया राजनीतिक विकल्प खड़ा करना चाहती हैं।
उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में वह अपने संगठनात्मक ढांचे की घोषणा कर सकती हैं।
उत्तर प्रदेश से शुरू होगी राजनीतिक पारी
दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत यहीं से होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल की किसी सीट से चुनावी मैदान में उतर सकती हैं। हालांकि उन्होंने अभी किसी सीट या क्षेत्र का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
व्यवस्था पर तीखे सवाल
अपने वीडियो में पूर्व आईएएस अधिकारी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अक्सर योजनाओं को मंजूरी मिलने और बजट उपलब्ध होने के बावजूद बुनियादी कार्य वर्षों तक अधूरे पड़े रहते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि स्कूल, सड़क और अन्य जनहित की परियोजनाओं में अनावश्यक देरी आम लोगों का विश्वास तोड़ती है। इसके साथ ही उन्होंने पेपर लीक, युवाओं के भविष्य, खराब सड़कों और जवाबदेही की कमी जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।
दिव्या मित्तल ने कहा कि जब तक व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक आम लोगों की समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
जनता से सीधे संवाद की तैयारी
अपने राजनीतिक अभियान की शुरुआत के साथ ही उन्होंने एक व्हाट्सएप नंबर जारी किया और लोगों से सीधे जुड़ने की अपील की। उन्होंने युवाओं, महिलाओं, किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों से अपने सुझाव साझा करने का आह्वान किया।
राजनीतिक जानकार इसे पारंपरिक राजनीति से अलग जनसंवाद आधारित मॉडल की शुरुआती कोशिश मान रहे हैं।
राजभर का तंज, राजनीति आसान नहीं
दिव्या मित्तल के ऐलान के कुछ ही समय बाद उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने उन पर निशाना साधा। राजभर ने कहा कि आजकल जिसके पास पैसा हो जाता है, वह राजनीति में आने का सपना देखने लगता है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "आईएएस बनना आसान हो सकता है, लेकिन विधायक बनना बहुत मुश्किल काम है। जनता का विश्वास जीतना पड़ता है।"
राजभर के इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या बनेगा नया राजनीतिक विकल्प?
दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में पारंपरिक दलों के बीच मुकाबला पहले से ही तेज है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने प्रशासनिक अनुभव को राजनीतिक समर्थन में बदल पाती हैं या नहीं।
फिलहाल इतना तय है कि एक पूर्व आईएएस अधिकारी का व्यवस्था परिवर्तन के एजेंडे के साथ राजनीति में उतरना प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर चुका है। आने वाले दिनों में उनकी रणनीति, संगठन और राजनीतिक रोडमैप पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।
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