ध्रुव राठी का बड़ा दावा: “हिरासत नहीं, मेरा अपहरण हुआ”; मोदी से बोले—इतना मत डराओ कि डर ही खत्म हो जाए

Dhruv Rathee makes a bold claim: "I was kidnapped, not detained"; tells Modi, "Don't scare me so much that the fear disappears."

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Lucknow, 11 Oct, 2026 06:18 PM

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026 (आईपीएन)। यूट्यूबर ध्रुव राठी ने दिल्ली पुलिस की हिरासत से रिहा होने के बाद एक वीडियो जारी कर पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया था, बल्कि उनका अपहरण किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “इतना भी मत डराओ कि किसी का सारा डर खत्म हो जाए। कितना डराओगे लोगों को? जितना डराओगे, उतनी तेजी से लोगों की आवाज निकलेगी।”

ध्रुव राठी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई चर्चा के केंद्र में हैं। राठी ने अपने वीडियो में न सिर्फ अपनी हिरासत को लेकर सवाल उठाए, बल्कि इसे लोकतंत्र में असहमति की आवाज से जोड़ते हुए तानाशाही के अंजाम पर भी टिप्पणी की।

“अरेस्ट नहीं, किडनैप शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं”

इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में ध्रुव राठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह गिरफ्तारी या हिरासत की बात नहीं कर रहे, बल्कि उनके साथ जो हुआ, उसके लिए ‘किडनैप’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने अपने समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि वीडियो में पूरी सच्चाई है।

राठी ने कहा कि तानाशाही का अंत भी अच्छा नहीं होता। उन्होंने उन लोगों को भी संदेश दिया, जो उन्हें पसंद नहीं करते। उनका कहना था कि आज उनके साथ जो हुआ, वह कल किसी दूसरे व्यक्ति के साथ भी हो सकता है। इसलिए इस घटनाक्रम को केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए।

भारतीय पासपोर्ट दिखाकर नागरिकता पर उठे सवालों का जवाब

ध्रुव राठी ने वीडियो में अपना भारतीय पासपोर्ट भी दिखाया। इसके जरिए उन्होंने अपनी नागरिकता को लेकर सोशल मीडिया पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देने की कोशिश की। उन्होंने अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक मतभेद या किसी व्यक्ति को पसंद अथवा नापसंद करना अलग बात है, लेकिन उसके साथ होने वाली कार्रवाई को लेकर सवाल उठाना भी जरूरी है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने आए थे ध्रुव राठी

ध्रुव राठी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) की ओर से जंतर-मंतर पर बुलाए गए विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए भारत आए थे। प्रदर्शन का मुद्दा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा था। आयोजकों की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जा रही थी।

उपलब्ध घटनाक्रम के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 7:30 से 8 बजे के बीच गुरुग्राम और दिल्ली पुलिस की टीम ध्रुव राठी के गुरुग्राम स्थित आवास पर पहुंची। इसके बाद उन्हें अपने साथ ले जाया गया। राठी को देर रात करीब तीन बजे रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई।

पुलिस का पक्ष: निषेधाज्ञा और अनुमति नहीं मिलने का हवाला

पुलिस के अनुसार, दिल्ली में निषेधाज्ञा लागू थी और जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिली थी। पुलिस का कहना था कि राठी को प्रदर्शन में शामिल न होने की चेतावनी दी गई थी। इस संबंध में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों का हवाला दिया गया।

पुलिस के बताए घटनाक्रम के मुताबिक, सादे कपड़ों में करीब 30 पुलिसकर्मी सुबह उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें अपने साथ सेक्टर-39 स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय ले गए। पुलिस की ओर से इसे कानून-व्यवस्था और निषेधाज्ञा के संदर्भ में की गई कार्रवाई बताया गया है।

हालांकि, पुलिस की कार्रवाई को लेकर ध्रुव राठी का नजरिया इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने इसे सामान्य हिरासत या गिरफ्तारी मानने के बजाय अपहरण बताया है। उनके दावे और पुलिस के पक्ष के बीच यही अंतर इस पूरे मामले को चर्चा में ला रहा है।

पत्नी जूली ने भी सोशल मीडिया पर लगाई थी गुहार

ध्रुव राठी को पुलिस के साथ ले जाए जाने के बाद उनकी पत्नी जूली ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए चिंता जताई थी। जर्मनी में मौजूद जूली ने लिखा था कि उनके पति लापता हैं और उनका फोन बंद है। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके पति के दोस्तों के फोन भी बंद आ रहे हैं।

जूली ने दिल्ली पुलिस से अपील की थी कि उनके पति को हिरासत से रिहा किया जाए। अपनी पोस्ट में उन्होंने हाथ जोड़ने और आंसू वाले इमोजी के साथ विनम्र निवेदन किया था। उनके इस संदेश के बाद राठी की स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर चिंता और सवाल उठने लगे थे।

“आज मेरे साथ, कल तुम्हारे साथ भी हो सकता है”

रिहाई के बाद ध्रुव राठी का सबसे अहम संदेश यही रहा कि किसी व्यक्ति के प्रति पसंद या नापसंद के आधार पर उसके साथ हुई कार्रवाई को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर किसी को डराने की कोशिश की जाएगी, तो इससे आवाजें दबने के बजाय और तेज हो सकती हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ पुलिस निषेधाज्ञा और प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी तरफ ध्रुव राठी अपनी कार्रवाई को अपहरण बताते हुए सवाल उठा रहे हैं। अब इस मामले में चर्चा का केंद्र यही है कि विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने की कार्रवाई और नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे सुनिश्चित किया जाए।

फिलहाल, ध्रुव राठी के आरोप उनके अपने बयान हैं और पुलिस का पक्ष अलग है। उनके अपहरण के दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नहीं की जा सकती।

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