भाजपा से लड़ते-लड़ते विपक्ष प्रभु श्रीराम से टकराने लगा, भूल गया कि राम से लड़ेंगे तो निपट जाएंगे : संदीप सिंह

While fighting the BJP, the opposition started clashing with Lord Shri Ram, forgetting that if they fight Ram, they will be finished: Sandeep Singh

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Lucknow, 9 Jan, 2026 01:20 AM
भाजपा से लड़ते-लड़ते विपक्ष प्रभु श्रीराम से टकराने लगा, भूल गया कि राम से लड़ेंगे तो निपट जाएंगे : संदीप सिंह
 कन्नौज, (आईपीएन)। भाजपा से राजनीतिक संघर्ष करते-करते विपक्ष अब प्रभु श्रीराम से ही टकराने की राह पर चल पड़ा। शायद वह यह भूल गया कि प्रभु श्रीराम से लड़ेंगे तो निपट जाएंगे। उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में आज जो सख्ती, पारदर्शिता और कानून के प्रति सम्मान दिखाई दे रहा है, वह कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ के सुशासन मॉडल का ही स्वाभाविक विस्तार है। 

यह बात उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कन्नौज के मुक्ताकाशीय मंच, रोमा स्मारक में आयोजित पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।

मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश जिस निर्णायक, अनुशासित और जनहितकारी शासन व्यवस्था की ओर अग्रसर है, उसकी वैचारिक नींव बाबूजी ने वर्षों पहले रख दी थी। आज वही विचारधारा आधुनिक संदर्भ में और अधिक प्रभावी एवं परिणामकारी रूप में सामने आ रही है।

उन्होंने कहा कि बाबूजी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे सिद्धांत, साहस और जनहित की राजनीति के जीवंत प्रतीक थे। वे स्वयं से पहले समाज और राष्ट्र के हित में सोचते थे। यही कारण है कि उनके शासनकाल की नीतियां किसी वर्ग विशेष या परिवार तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि सर्वसमाज के कल्याण के लिए समर्पित थीं। बाबूजी परिवारवाद के कभी समर्थक नहीं रहे और उन्होंने राजनीति में वंशवाद के बजाय योग्यता, सेवा और नैतिकता को प्राथमिकता दी।

बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश भ्रष्टाचार, जातिवाद और माफियाराज के दलदल में फंसा हुआ था, तब बाबूजी ने कानून के राज और प्रशासनिक अनुशासन का स्पष्ट मार्ग प्रशस्त किया। सुशासन को उन्होंने केवल एक सरकारी शब्द नहीं, बल्कि कमजोर, वंचित और पिछड़े वर्गों की सुरक्षा और आत्मसम्मान से जोड़ा। अपराध और अन्याय के विरुद्ध उनका रुख सदैव निर्भीक, स्पष्ट और निर्णायक रहा।

श्रीराम मंदिर का उल्लेख करते हुए संदीप सिंह ने कहा कि प्रभु श्रीराम की सेवा उसे ही मिलती है, जिसे स्वयं प्रभु चुनते हैं। अयोध्या मंदिर आंदोलन के लिए प्रभु ने बाबूजी को चुना था। आज श्रीराम मंदिर अपने भव्य स्वरूप में देश और दुनिया के सामने सनातन संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बनकर खड़ा है।

उन्होंने कहा कि बाबूजी ने करसेवकों पर बल प्रयोग न करने और गोली न चलाने का ऐतिहासिक निर्णय लेकर सारी जिम्मेदारी स्वयं अपने ऊपर ले ली थी। वे चाहते तो अपनी सत्ता बचा सकते थे, क्योंकि एक मुख्यमंत्री के लिए करसेवकों को विवादित ढांचे तक पहुंचने से रोकना असंभव नहीं था, लेकिन उन्होंने सत्ता से ऊपर आस्था, साहस और नैतिक मूल्यों को रखा।

विपक्ष पर प्रहार करते हुए संदीप सिंह ने कहा कि जो लोग आज पीडीए की बात कर रहे हैं, उन्होंने जब-जब सत्ता संभाली, तब-तब पिछड़ों का शोषण किया और उन्हें कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा। इसके विपरीत बाबूजी ने बिना किसी भेदभाव के सभी समाज को साथ लेकर चलने का कार्य किया और समरसता आधारित सुशासन की मजबूत नींव रखी।

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