आज हमारे देश में पुनः एक बार फिर कुछ फिरकापरस्त ताकतें पनप गई हैं, लेकिन हमें उसके खिलाफ खडे़ होना है: अजय राय
Today once again some communal forces have emerged in our country, but we have to stand against them: Ajay Rai
IPN Live
Lucknow, 16 Aug, 2024 12:13 AMलखनऊ, 15 अगस्त 2024 (आईपीएन)। स्वतंत्रता दिवस की 78वीं वर्षगांठ आज यहां प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय प्रांगण में हर्षाेल्लास के साथ मनाई गई। इस मौके पर परंपरागत तरीके से सेवादल के मुख्य संगठक डॉ0 प्रमोद पाण्डेय के नेतृत्व में ध्वज वंदन किया गया। तत्पश्चात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने ध्वजारोहण कर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत ‘‘वन्दे मातरम’’ एवं ‘‘ध्वज गीत’’ से हुई।
ध्वजारोहण के अवसर पर सैकड़ों की संख्या में उपस्थित कांग्रेसजनों को सम्बोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अंग्रेजों के लगभग 200 वर्षों के शासन का अंत कर आज ही के दिन 1947 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं0 जवाहर लाल नेहरू ने राष्ट्रध्वज फहराया। यह आजादी हमें असंख्य कुर्बानियों के बाद मिली है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अगुवाई में स्वतंत्रता आंदोलन में स्वतंत्रा संग्राम के महान नायक चन्द्रशेखर आजाद, अशफाक उल्ला खान, सुभाषचन्द्र बोस, सरदार बल्लभ भाई पटेल, भगत सिंह, बाबा साहब डॉ0 भीमराव अम्बेड़कर, खुदीराम बोस, बाल गंगाधर तिलक, लक्ष्मी सहगल, सरोजनी नायडू, अब्दुल गफ्फार खान, रामप्रसाद बिस्मिल, लाला लाजपत राय, मौलाना आजाद, सहित तमाम ज्ञात अज्ञात असंख्य क्रान्तिकारियों के संघर्ष, बलिदान और त्याग के परिणाम स्वरूप हम सभी को आज का दिन देखने को मिला है। कांग्रेस के नेतृत्व में लड़ी गई आजादी की इस लड़ाई में असंख्य लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी। आज के दिन हम उन अमर शहीदों को नमन करते हैं।
श्री राय ने कहा कि आज हमारे देश में पुनः एक बार फिर कुछ फिरकापरस्त ताकतें पनप गई हैं जो देश और समाज को तोड़ने का कुत्सित प्रयास कर रही हैं। लेकिन हमें उसके खिलाफ खडे़ होना है और अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के नेतृत्व में देश के संविधान एवं लोकतंत्र की रक्षा के लिए पूरी ताकत के साथ संघर्ष करना है।
राय ने कहा कि आजादी के आंदोलन के समय आरएसएस के लोग अंग्रेजों की मुखबिरी करते हुए पेंशनजीवी रहे, उनका आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं था? उन्होंने कहा कि क्या माफीजीवी बनकर देश के लोगों का साथ न देना, अंग्रेजों के नेतृत्व को स्वीकार करना राष्ट्र धर्म था? ऐसे देश विरोधी ताकतों का डट कर सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि हम लोगों की आज के दिन देश को अक्षुण्य बनाये रखने का संकल्प लेने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान द्वारा हुआ।

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