2027 का महासंग्राम: मायावती ने फूंका चुनावी बिगुल, बोलीं, "भाजपा की गिरती जमीन पर बसपा बनाएगी वापसी का इतिहास", विकसित नहीं महाशक्ति भारत बनाने का दिया मंत्र
The Great Battle of 2027: Mayawati blew the election bugle, saying, "The BSP will make history by returning to the BJP's declining ground," and offered the mantra of making India a superpower, not a developed one.
IPN Live
Lucknow, 24 Sep, 2026 01:08 PMजितेन्द्र त्रिपाठी
लखनऊ, 24 सितम्बर 2026 (आईपीएन)। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने के संकेत देते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। बसपा की ऑल इंडिया स्तर की महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ चुनावी तैयारियों की समीक्षा करते हुए मायावती ने स्पष्ट कहा कि पार्टी को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और मजबूती के साथ मैदान में उतरना होगा। बैठक में संगठन, उम्मीदवार चयन, बूथ प्रबंधन, सामाजिक समीकरण और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
2027 को लेकर बसपा ने तेज की तैयारी
मायावती ने बैठक में कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय होने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि चुनाव लड़ने की तैयारी केवल कागजों पर नहीं, बल्कि गांव, कस्बे और शहर तक दिखाई देनी चाहिए। पार्टी संगठन को मजबूत बनाने के साथ-साथ ऐसे उम्मीदवारों के चयन पर जोर दिया गया जो संघर्षशील, जनाधार वाले और संगठन के प्रति पूरी निष्ठा रखने वाले हों।
बैठक में चुनावी तैयारियों के साथ-साथ पार्टी संगठन में आवश्यक फेरबदल और जिम्मेदारियों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये।
भाजपा सरकार के खिलाफ बढ़ते जन असंतोष पर नजर
बैठक में प्राप्त फीडबैक का हवाला देते हुए मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, पिछड़ापन और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा जिन वादों और उम्मीदों के सहारे सत्ता तक पहुंची थी, वे अपेक्षाएं पूरी नहीं हो सकीं।
उन्होंने कहा कि जनता अब अपने "अच्छे दिनों" का इंतजार करते हुए निराशा महसूस कर रही है। भाजपा की नीतियों के कारण सामाजिक और आर्थिक स्तर पर कई वर्ग स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, जिसका प्रभाव आने वाले चुनावों में दिखाई दे सकता है।
"भाजपा की गिरती जमीन पर बसपा बनाएगी वापसी का इतिहास"
मायावती ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं को उत्साहित करते हुए कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां बसपा के लिए अवसर लेकर आई हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि संगठन पूरी ताकत से काम करता है तो भाजपा की कमजोर पड़ती राजनीतिक जमीन पर बसपा अपनी वापसी का नया इतिहास लिख सकती है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे केवल चुनावी राजनीति तक सीमित न रहें, बल्कि जनता के सुख-दुख के साथी बनकर काम करें और बहुजन आंदोलन की विचारधारा को घर-घर तक पहुंचाएं।
दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और सर्वजन पर फोकस
बसपा प्रमुख ने एक बार फिर अपनी पार्टी की मूल राजनीतिक सोच "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" को दोहराया। उन्होंने कहा कि बसपा किसी एक जाति, वर्ग या समुदाय की पार्टी नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों को सम्मान और सहभागिता देने वाली राजनीतिक शक्ति है।
उन्होंने दलित, पिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को पार्टी की ताकत बताते हुए कहा कि सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मिशन को आगे बढ़ाना बसपा की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
"विकसित भारत नहीं, महाशक्ति भारत" की अवधारणा
बैठक के दौरान मायावती ने देश की आर्थिक और सामाजिक दिशा को लेकर भी अपनी सोच सामने रखी। उन्होंने कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के गरीबों, मजदूरों, किसानों, दलितों, पिछड़ों और अन्य वंचित वर्गों तक समान रूप से पहुंचे। यदि समाज का एक बड़ा वर्ग बुनियादी सुविधाओं और अवसरों से वंचित रह जाता है, तो विकास अधूरा माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत को केवल "विकसित भारत" के लक्ष्य तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसा "महाशक्ति भारत" बनना चाहिए जहां आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक न्याय, समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन की गारंटी भी सुनिश्चित हो। बसपा प्रमुख ने संकेत दिया कि आने वाले समय में पार्टी विकास और सामाजिक न्याय के इस संयुक्त एजेंडे को और मजबूती से जनता के बीच ले जाएगी।
ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाकर दिया नया राजनीतिक संकेत
बैठक का एक महत्वपूर्ण निर्णय युवा अधिवक्ता ईशान आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया जाना भी रहा। मायावती ने सार्वजनिक रूप से उन पर विश्वास जताते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी और उम्मीद व्यक्त की कि वे पार्टी संगठन तथा बहुजन आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राजनीतिक दृष्टि से इस फैसले के कई मायने निकाले जा रहे हैं। एक ओर इसे संगठन में नई पीढ़ी को आगे लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, तो दूसरी ओर यह संकेत भी माना जा रहा है कि बसपा 2027 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद की राजनीति के लिए नए नेतृत्वकारी चेहरों को तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लंबे समय से संगठनात्मक पुनर्गठन पर जोर दे रहीं मायावती अब अनुभवी नेतृत्व और नई पीढ़ी के बीच संतुलन बनाकर पार्टी को नई ऊर्जा देने की रणनीति पर आगे बढ़ रही हैं। ऐसे समय मेंशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंपा जाना केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि बसपा के भविष्य के नेतृत्व ढांचे से जुड़ा महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।
परिवारवाद और जातिवादी राजनीति पर हमला
बैठक में मायावती ने अन्य राजनीतिक दलों पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए कहा कि बसपा का राजनीतिक चरित्र परिवारवाद से मुक्त रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने हमेशा संगठन और मिशन को महत्व दिया है, जबकि कई दल निजी हितों और पारिवारिक राजनीति के इर्द-गिर्द सिमटते चले गए।
उन्होंने जातिवादी, संकीर्ण और विभाजनकारी राजनीति की आलोचना करते हुए कहा कि बसपा सामाजिक सद्भाव और बराबरी की राजनीति में विश्वास रखती है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब पर विशेष फोकस
राजनीतिक दृष्टि से इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड और पंजाब के संगठनात्मक हालात और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने तीनों राज्यों के पदाधिकारियों से फीडबैक लेकर संगठन को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
है कि बसपा अपने पारंपरिक बहुजन आधार को कितना मजबूत कर पाती है और "सर्वजन" की नई सामाजिक इंजीनियरिंग के जरिए 2027 के चुनावी मुकाबले में कितना प्रभाव पैदा कर पाती है। फिलहाल इतना तय है कि मायावती ने संगठन को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि आने वाली लड़ाई केवल चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक पुनर्स्थापना की लड़ाई है।
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