भाजपा की अखिलेश यादव को सलाह, बोली: राजाज्ञा पढ़कर अपना भ्रम दूर कर लें अखिलेश
भाजपा ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री समाजवादी पार्टी के सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं के बीच भी अपनी खिल्ली उड़ाने का काम कर रहे हैं। उ.प्र. भाजपा ने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा है कि अखिलेश जनता जनार्दन को भ्रमित करने के बजाय राजाज्ञा पढ़कर अपना भ्रम दूर कर लें।
IPN Live
Lucknow, 26 Jan, 2026 01:00 AMलखनऊ, (आईपीएन)। रविवार को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के हवाले से मीडिया में ‘‘जनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम तक नहीं है, गिनेंगे क्या’’ शीर्षक से प्रकाशित हुए समाचार पर भाजपा ने अपनी नाराज़गी व्यक्त की है। भाजपा ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री समाजवादी पार्टी के सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं के बीच भी अपनी खिल्ली उड़ाने का काम कर रहे हैं। उ.प्र. भाजपा ने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा है कि अखिलेश जनता जनार्दन को भ्रमित करने के बजाय राजाज्ञा पढ़कर अपना भ्रम दूर कर लें।
इस सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता हरीशचन्द्र श्रीवास्तव ने आईपीएन को दिए अपने बयान में कहा कि सपा मुखिया अखिलेश यादव के ‘‘जनगणना में जाति का कालम नहीं’’ बयान को बौद्धिक खोखलापन, हास्यास्पद कहा जाय या राजनैतिक हताशा व निराश यह तो देश प्रदेश की सम्मानित जनता तय करेगी। लेकिन सपा मुखिया जो कि सांसद और प्रदेश के मुखमंत्री भी रहे हैं समाजवादी पार्टी के सांसदों, विधायकों, कार्यकर्ताओं के बीच भी अपनी खिल्ली उड़ाने का काम कर रहे हैं क्योकि भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा केंद्रीय सरकार के जनगणना अधिनियम 1948 के अंतर्गत 22 जनवरी 2026 को जारी की गई राजाज्ञा के बिन्दु संख्या 12 में अनुसूचित, पिछड़ा आदि जातियों का विवरण दर्ज किए जाने का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि मेरी अखिलेश यादव को सलाह है कि जनता जनार्दन को भ्रमित करने के बजाय राजाज्ञा पढ़कर अपना भ्रम दूर कर लें।
बता दें कि शनिवार को अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा था कि जनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम तक नहीं है, गिनेंगे क्या। जातिगत जनगणना भी भाजपा का जुमला है। भाजपा का सीधा फ़ार्मूला है, न गिनती होगी, न आनुपातिक आरक्षण-अधिकार देने का जनसांख्यिकीय आधार बनेगा। जातिगत जनगणना न करना पीडीए समाज के ख़िलाफ़ भाजपाई साज़िश है।
अखिलेश ने कहा था कि आज भाजपा पर भरोसा करनेवाले अपने को ठगा हुआ ही नहीं बल्कि घोर अपमानित भी महसूस कर रहे हैं। भाजपा में जो कार्यकर्ता व नेता अब तक जातिगत जनगणना करवाने का दावा कर रहे थे, वो अब अपने समाज में मुँह दिखाने लायक नहीं बचे। वो अब गले से भाजपाई पट्टा और घरों, दुकानों, वाहनों से भाजपा का झंडा उतारने के लिए मजबूर हैं। पीडीए को अपने मान-सम्मान, आरक्षण और अधिकार की लड़ाई ख़ुद लड़नी होगी।
अखिलेश ने कहना था कि अब जब विरोध होगा तो ‘छलजीवी भाजपा’ फिर कहेगी ये टाइपिंग मिस्टेक हो गयी। भाजपा अब इतनी बुरी तरह एक्सपोज़ हो गयी है कि सबको मालूम है कि अपने गलत मंसूबों के भंडाफोड़ होने के बाद आगे क्या करेगी। दरअसल ये भाजपाई चालाकी नहीं, भाजपाई बेशर्मी है।
अन्त में अखिलेश ने यह भी लिखा था कि अब शब्दकोशों में ‘वचन-विमुखी’ भाजपा का मतलब ‘धोखा’ लिख देना चाहिए।

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