सिद्धार्थनाथ सिंह बता रहें हैं: उ.प्र. की जनता अखिलेश, प्रियंका और मायावती को क्यों न चुनें

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के प्रवक्ता एवं उनकी कैबिनेट में शामिल सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना है कि सरकार में उनके मंत्री पद पर रहते हुए उन्हें बहुत अच्छा अनुभव मिला है। वो कहते हैं कि एक बदलते हुए उत्तर प्रदेश को प्रस्तुत करने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

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Lucknow, 30 Jan, 2022 01:34 PM
सिद्धार्थनाथ सिंह बता रहें हैं: उ.प्र. की जनता अखिलेश, प्रियंका और मायावती को क्यों न चुनें

लखनऊ, (आईपीएन)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के प्रवक्ता एवं उनकी कैबिनेट में शामिल सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना है कि सरकार में उनके मंत्री पद पर रहते हुए उन्हें बहुत अच्छा अनुभव मिला है। वो कहते हैं कि एक बदलते हुए उत्तर प्रदेश को प्रस्तुत करने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ है। 

बतौर मंत्री खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई, निवेश प्रोत्साहन विभाग का काम देख रहे सिद्धार्थ बताते हैं कि उनकी सरकार में सिर्फ जनता के लिए और जनता के मन का ही कार्य किया जा रहा है। विभागीय सभी कार्याें को करने के लिए अपने मन के बाग-बाग होने की बात करते हुए सिद्धार्थनाथ का कहना है कि कोरोना काल नहीं आया होता तो हम 55 हजार करोड़ से कहीं अधिक का निवेश लाते।

अपनी सरकार को बहुमत से रिपीट होने की बात करते हुए सिद्धार्थ मुख्यमंत्री भी योगी आदित्यनाथ के बनने की बात कर रहे हैं।

आईपीएन को दिए गये अपने साक्षात्कार में विपक्ष की दिशा पर टिप्पणी करते हुए सिद्धार्थनाथ यह भी बताते हैं कि अखिलेश, प्रियंका और मायावती को उ.प्र. की जनता क्यों न चुनें।

पेश है आईपीएन ग्रुप के सम्पादक जितेन्द्र त्रिपाठी की उ.प्र. सरकार के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह से बातचीत के मुख्य अंश:-

1- सवाल: योगी जी की सरकार में कैसा रहा आपके मंत्री पद का कार्यकाल ?

जवाब: बहुत अच्छा अनुभव रहा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में लोगों की सेवा करने का मौका मिला। आयुष्मान भारत योजना मेरे ही कार्यकाल में शुरू हुई। एमएसएमई में ओडीओपी को और विस्तार से जमीन पर उतारना और लोगों को रोज़गार से उसको जोड़ना। इन सब चीजों का मुझे एक अच्छा अनुभव रहा। 

निवेश मंत्री के रूप में, निर्यात मंत्री के रूप में, एनआरआई मंत्री के रूप में एक बदलते हुए उत्तर प्रदेश को प्रोजेक्ट करने का भी मुझे सौभाग्य मिला। 

2- सवाल: क्या आप सरकार में मंत्री बनने के बाद जनता के लिए समर्पित होकर जैसा सोचते थे, वैसी डिलीवरी दे पाये ?

जवाब: शायद विधायक रहता तो इतना कार्य नीचे तक नहीं कर पाता जो मंत्री के रूप में मैं अपने क्षेत्र की सेवा कर पाया हूं।

3- सवाल: योगी जी की सरकार में क्या आप जनता के लिए अपने मन की कर पाये ?

जवाब: योगी जी की सरकार में मुख्यमंत्री जी खाली जनता के लिए ही करते हैं, और किसी के लिए करते नहीं। जो जनता का मन है, उसी के कार्य में पूरा पांच साल हम सब का निकला है। योगी सरकार में जनता के मन का ही कार्य किया जा रहा है, और हम भी वही कर रहे हैं।

4- सवाल: अपने विभाग से जुडे़ कुछ ऐसे कार्यों को बतायें, जिन्हें करने के बाद आपका मन बाग-बाग हो ?

जवाब: स्वास्थ्य मंत्री के रूप में किये गये अपने कार्यों, ओडीओपी और निर्यात सम्बन्धी सभी कार्याें को करने के बाद मेरा मन बाग-बाग है।

5- सवाल: अपनी सरकार में कोई ऐसा कार्य जिसे आप अभी तक न कर पाये हों ?

जवाब: कोरोना काल नहीं आया होता तो उत्तर प्रदेश के अन्दर जो हम 55 हजार करोड़ का ही निवेश ला पाये शायद उससे कहीं अधिक लाते और उ.प्र. को देश का एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बना देते। लेकिन समय आयेगा तो हम लोग वो भी करेंगे।

6- सवाल: क्या आप योगी सरकार के सभी कामों से खुश हैं, या कोई मन में टीस है ?

जवाब: हम लोग काउंसिल ऑफ मिनिस्टर एक साथ काम करते हैं। ज्वाइंटली काम कर रहे हैं, खुश क्यों नहीं होंगे। टीस जैसी कोई बात नहीं है। 

7- सवाल: क्या आपको लगता है कि 2022 में भाजपा की योगी सरकार रिपीट हो रही है ? 

जवाब: अच्छी बहुमत से रिपीट हो रही है। 

8- सवाल: क्या उ.प्र. की जनता योगी जी को दोबारा मुख्यमंत्री और आपको मंत्री बनते देखना चाहती है, यदि हां तो क्यों ?

जवाब: जब सरकार बन रही है और चेहरा हमारा योगी आदित्यनाथ हैं तो मुख्यमंत्री वहीं बनेंगे। स्वयं को मंत्री के लिए मैं नहीं कह सकता, वो तो मुख्यमंत्री के ऊपर होता है। ये प्रश्न आप उनसे पूछेंगे तो वो आपको बतायेंगे। 

9- सवाल: क्या उ.प्र. का विपक्ष सही दिशा में अपनी जिम्मेदारियों को निभा पा रहा है ?

जवाब: मुझे नहीं लगता कि विपक्ष सही दिशा में है। यहां सकारात्मक नहीं नकारात्मक है विपक्ष।

10- सवाल: अखिलेश, प्रियंका और मायावती को उ.प्र. की जनता क्यों न चुनें, आपकी नज़र में इसकी कोई वजह ?

जवाब: वो गणित की राजनीति करना चाहते हैं, हम विकास की राजनीति करना चाहते हैं। हम राम का नाम लेते हैं वो जिन्ना का नाम लेते हैं। 


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