पढ़ाई के लिए खून बेचने को मजबूर गरीब छात्र! प्रयागराज की घटना ने खोली यूपी की शिक्षा व्यवस्था की पोल : राजेंद्र पाल गौतम
Poor students forced to sell their blood to fund their education! The Prayagraj incident exposes the flaws in Uttar Pradesh's education system: Rajendra Pal Gautam
IPN Live
Lucknow, 4 Nov, 2026 02:28 AMभाजपा सरकार में शिक्षा का सपना बना आर्थिक शोषण का शिकार, कोचिंग फीस और पेट पालने के लिए छात्र लगा रहे स्वास्थ्य दांव पर
खून के कथित अवैध कारोबार में एजेंटों और ब्लड बैंकों की भूमिका की जांच की मांग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला
नई दिल्ली/लखनऊ, 3 नवंबर 2026 (आईपीएन)। उत्तर प्रदेश में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का सपना किस कदर महंगा पड़ रहा है, इसका गंभीर मामला प्रयागराज से सामने आया है। नीट, एसएससी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को कोचिंग फीस, हॉस्टल और भोजन का खर्च जुटाने के लिए कथित तौर पर अपना खून बेचने तक की नौबत आ रही है। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार की शिक्षा व्यवस्था और गरीब युवाओं के प्रति उसकी जवाबदेही पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने इस मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाते हुए आयोग के अध्यक्ष इन्द्रजीत सिंह को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने प्रयागराज सहित प्रदेश के प्रमुख कोचिंग केंद्रों में विद्यार्थियों से जुड़े रक्त के कथित अवैध कारोबार की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और प्रभावित छात्रों को आर्थिक सहायता देने की मांग की।
राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि **जिस उम्र में गरीब बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में भविष्य के सपने होने चाहिए, उस उम्र में उन्हें पढ़ाई और पेट पालने के लिए अपना खून बेचने की नौबत आना भाजपा सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर करारा तमाचा है।** यह केवल आर्थिक बदहाली नहीं, बल्कि गरीब और वंचित वर्गों के भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है।
**1.80 लाख रुपये तक कोचिंग फीस, गरीब परिवारों के सामने शिक्षा का संकट**
गौतम ने 25 से 27 अक्टूबर 2026 के बीच एक समाचारपत्र में प्रकाशित खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थानों की सालाना फीस करीब 1.20 लाख से 1.80 लाख रुपये तक है। इसके अलावा हॉस्टल, मेस और अध्ययन सामग्री का खर्च भी विद्यार्थियों पर भारी पड़ रहा है।
ग्रामीण और किसान परिवारों से आने वाले प्रतिभाशाली युवाओं के लिए इन खर्चों को उठाना मुश्किल हो रहा है। बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर प्रयागराज पहुंचने वाले छात्रों को आर्थिक तंगी के कारण अपने स्वास्थ्य से समझौता करना पड़ रहा है।
**8 हजार में रक्त की यूनिट, छात्र के हिस्से में महज 3,500 से 4,000 रुपये!**
ज्ञापन में रक्त के कथित अवैध कारोबार का उल्लेख करते हुए गौतम ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार ब्लड बैंकों के आसपास सक्रिय एजेंट और दलाल आर्थिक रूप से मजबूर विद्यार्थियों को रक्त बेचने के लिए प्रेरित करते हैं। मरीजों के परिजनों से एक यूनिट रक्त के बदले करीब 8 हजार रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है, जबकि विद्यार्थियों को तमाम कटौतियों के बाद महज 3,500 से 4,000 रुपये ही मिलते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ विद्यार्थियों द्वारा आर्थिक मजबूरी में महीने में दो से चार बार तक रक्तदान करने के मामले सामने आए हैं। बार-बार रक्तदान करना उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रदेश में गरीब विद्यार्थियों की ऐसी मजबूरी का फायदा उठाने वाले लोगों को किसका संरक्षण मिल रहा है और इस पूरे नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
**मानवाधिकार आयोग से सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग**
राजेंद्र पाल गौतम ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देशित कर प्रयागराज सहित प्रदेश के प्रमुख कोचिंग केंद्रों में विशेष जांच कराने की मांग की। उन्होंने रक्त के कथित अवैध कारोबार में शामिल एजेंटों, दलालों और इसमें भूमिका पाए जाने वाले ब्लड बैंकों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए सरकारी कोचिंग योजनाओं का विस्तार, विशेष छात्रवृत्ति, सस्ते छात्रावास और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि किसी भी विद्यार्थी को पढ़ाई जारी रखने के लिए अपने स्वास्थ्य और जीवन को जोखिम में न डालना पड़े।
**गरीबों के बच्चों के लिए शिक्षा का रास्ता इतना कठिन क्यों?**
गौतम ने कहा कि यह घटना शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती असमानता और गरीब, दलित, पिछड़े तथा वंचित वर्गों के युवाओं के साथ हो रहे अन्याय का गंभीर उदाहरण है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रवृत्ति, आवास और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराए। शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा, जब गरीब परिवारों के बच्चे भी बिना आर्थिक शोषण के अपना भविष्य बना सकें।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी वंचित वर्गों के युवाओं को शिक्षा और सम्मानजनक भविष्य का अधिकार दिलाने की लड़ाई मजबूती से लड़ती रहेगी। प्रदेश सरकार को तत्काल इस मामले में संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करनी चाहिए और प्रभावित विद्यार्थियों को राहत पहुंचानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा किसी की आर्थिक हैसियत की मोहताज नहीं होनी चाहिए। गरीब के बच्चे को भी आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए, न कि उसे पढ़ाई की कीमत अपने खून से चुकानी पड़े।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में दिल्ली के ह्यूमन राइट्स एंड लॉ डिपार्टमेंट के अध्यक्ष सुनील कुमार सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता और कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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