अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद मायावती का बड़ा फैसला, आकाश आनंद बसपा से पूरी तरह मुक्त
Mayawati's big decision after Ashok Siddharth's retirement, Akash Anand completely free from BSP
IPN Live
Lucknow, 10 Sep, 2026 05:19 PMमायावती बोलीं- देर आए दुरुस्त आए, लेकिन नीयत और अभिलाषा पर अब भी सवाल; आकाश आनंद के डबल माइण्ड होने पर भी उठाया सवाल
लखनऊ, 10 सितंबर 2026 (आईपीएन)। बहुजन समाज पार्टी में गुरुवार को सियासी घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने एक्स पर एक और पोस्ट कर इस फैसले को देर से उठाया गया सही कदम बताया। साथ ही उन्होंने अशोक सिद्धार्थ की नीयत और राजनीतिक अभिलाषा पर सवाल उठाते हुए उनके दामाद एवं बसपा के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को भी पार्टी से पूरी तरह मुक्त किए जाने की घोषणा कर दी।
मायावती ने कहा- संन्यास का फैसला देर से लिया
मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया सही कदम है। उन्होंने कहा कि यदि यह फैसला काफी पहले लिया गया होता तो बसपा, बहुजन समाज, बहुजन मूवमेन्ट और आकाश आनंद को लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।
मायावती के मुताबिक विधानसभा चुनाव, विशेषकर उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार सरकार बनाने की तैयारियों के बीच पार्टी और मूवमेन्ट के व्यापक हित में उन्हें अशोक सिद्धार्थ के संबंध में कई बार कड़े फैसले लेने पड़े।
निजी और पारिवारिक स्वार्थ से ऊपर उठने का संदेश
बसपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी की अम्बेडकरवादी राजनीति की परंपरा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के पदचिन्हों पर चलते हुए त्याग, तपस्या, संघर्ष और कुर्बानी के साथ-साथ निजी एवं पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की पहचान रखती है।
उन्होंने कहा कि मान्यवर कांशीराम की तरह वह भी इस विचारधारा के लिए समर्पित हैं और पार्टी के सभी लोगों को इससे सबक लेते हुए निजी, पारिवारिक स्वार्थ और पद की लालसा से ऊपर उठना चाहिए। मायावती ने कहा कि तभी सदियों से शोषित, पीड़ित, उपेक्षित और तिरस्कृत बहुजन समाज को शासक वर्ग बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि जितना महान लक्ष्य होता है, उतनी ही बड़ी कुर्बानी की जरूरत होती है।
अशोक सिद्धार्थ के फैसले को बताया- देर आए दुरुस्त आए
मायावती ने कहा कि कुल मिलाकर अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेने का फैसला ‘देर आए दुरुस्त आए’ की कहावत की तरह अच्छी बात है। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने उनके फैसले पर गंभीर सवाल भी खड़े किए।
मायावती के अनुसार यदि अशोक सिद्धार्थ को अपने दामाद आकाश आनंद के उज्ज्वल भविष्य तथा बसपा और अम्बेडकरवादी बहुजन मूवमेन्ट के व्यापक हित की थोड़ी भी चिंता होती तो उन्हें बिना देरी के संन्यास की घोषणा कर देनी चाहिए थी।
नीयत और अभिलाषा पर मायावती का सीधा हमला
बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि संन्यास की घोषणा में देरी से यह प्रतीत होता है कि अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट और राजनीतिक अभिलाषा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि यदि वे पहले ही संन्यास ले लेते तो आकाश आनंद की पार्टी और मूवमेन्ट के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी।
आकाश आनंद के रुख पर भी मायावती ने उठाए सवाल
मायावती ने आकाश आनंद के रवैये पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद का अपने कैरियर से अधिक अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति लगाव दिखाई देता है और उन्होंने बसपा प्रमुख के एक्स अकाउंट पर अशोक सिद्धार्थ से संबंधित पोस्ट को रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा।
मायावती ने दावा किया कि इससे पहले आकाश आनंद बसपा प्रमुख की पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं। उन्होंने इसे आकाश आनंद के रुख को लेकर महत्वपूर्ण संकेत के रूप में पेश किया।
‘डबल माइण्ड’ होने पर सवाल
मायावती ने कहा कि इन परिस्थितियों से यही लगता है कि अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद दोनों को पार्टी और बहुजन मूवमेन्ट की सफलता की अपेक्षा निजी और पारिवारिक स्वार्थ का मोह अधिक है।
उन्होंने कहा कि यदि आकाश आनंद को पार्टी और मूवमेन्ट के वास्तविक हित तथा अपने राजनीतिक कैरियर की अपेक्षा रिश्ते-नातों का मोह अधिक है तो यह सवाल स्वाभाविक है कि वह ‘डबल माइण्ड’ होकर बसपा और बहुजन मूवमेन्ट का भला कैसे कर सकते हैं।
आकाश आनंद अब बसपा में भी पूरी तरह मुक्त
मायावती ने इसी क्रम में आकाश आनंद को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि जिस प्रकार 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के महत्वपूर्ण पद की सभी अहम जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी पूरी तरह ‘फ्री’ यानी आजाद कर दिया जाए।
मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आकाश आनंद पार्टी में स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं और अब उन्हें पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है।
यूपी में फिर पूर्ण बहुमत का लक्ष्य
अपनी पोस्ट के अंत में मायावती ने बसपा के सभी लोगों से विरोधियों के साम, दाम, दंड और भेद सहित सभी हथकंडों का डटकर सामना करने का आह्वान किया। उन्होंने खासकर उत्तर प्रदेश में फिर से पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं से पूरे तन, मन और धन से जुटने की अपील की।
मायावती ने कहा कि ‘सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय’ की मजबूत कानून-व्यवस्था तथा बेहतरीन विकास वाली सरकार बनाना ही बसपा का सर्वोच्च लक्ष्य है।
इस तरह अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक संन्यास के बाद मायावती की नई पोस्ट ने बसपा के भीतर चल रहे घटनाक्रम को एक और निर्णायक मोड़ दे दिया है। एक ओर अशोक सिद्धार्थ ने मायावती के आदेश को सर्वोपरि बताते हुए राजनीति से संन्यास की घोषणा की, वहीं दूसरी ओर मायावती ने आकाश आनंद को भी पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का ऐलान कर दिया है।
हैशटैग:

No Previous Comments found.