मायावती ने की राजस्थान की समीक्षा, दिए निर्देश
Mayawati reviewed Rajasthan, gave instructions
IPN Live
Lucknow, 11 Jul, 2022 01:19 AMनई दिल्ली, 10 जुलाई 2022 (आईपीएन)। बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने, दिल्ली आते ही पार्टी बैठकों का दौर शुरू करने के क्रम में, आज यहाँ पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय में आयोजित राजस्थान पार्टी यूनिट के स्टेट, ज़िलों के प्रमुख व वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं अन्य ज़िम्मेदार लोगों की बड़ी व लम्बी अहम बैठक में राज्य की राजनीतिक गतिविधियों, वहाँ के साम्प्रदायिक हालात, विधान सभा आमचुनाव की तैयारियों, पार्टी संगठन के कार्यकलापों, जनाधार को बढ़ाने के सम्बंध में सक्रियता आदि के बारे में विस्तार से चर्चा व गहन समीक्षा की तथा आगे की कार्रवाई को गति प्रदान करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश देने के साथ-साथ विश्वासघाती एवं बिकाऊ तत्वों को पूरी तरह से दूर रखते हुए ज्यादातर मिशनरी आधार पर पार्टी व संगठन को तैयार करने की सख़्त हिदायत दी।
इस बैठक में खास तौर से नोट किया कि कांग्रेस पार्टी, भाजपा के विरुद्ध मुस्तैदी से लड़ने की वजाय, केवल सेक्युलर ताकतों में भी खासकर बी.एस.पी. को ही तरह-तरह से आघात पहुँचाने में ही लगी रहती है तथा पिछली दो सरकारें इन्होंने बी.एस.पी. विधायकों को तोड़कर बनाई है जिसे लोगों के लिए भुला पाना मुश्किल है। इस प्रकार के कड़वे सच से सबक सीखकर ही अब पार्टी व मूवमेन्ट को आगे बढ़ाना है तथा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व कांशीराम के बताए मिशनरी कार्यों में विशेषकर युवा वर्ग को प्राथमिकता के आधार पर पूरी भागीदारी देकर आगे बढ़ना है।
राजस्थान में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की आपसी खींचतान व रस्साकशी आदि के अलावा विरोधी पार्टी भाजपा की संकीर्ण व नकारात्मक रवैये आदि के कारण राजस्थान की गरीब व मेहनतकश जनता काफी त्रस्त है, जिसको पूरी तरह से विश्वास में लेकर आगे बढ़ने का प्रयत्न करना है ताकि अगली बार सत्ता में बी.एस.पी. की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
इस क्रम में स्पष्ट है कि बी.एस.पी. की राजनीतिक व चुनावी लड़ाई कांग्रेस व भाजपा दोनों की दलित व अन्य उपेक्षित-विरोधी जातिवादी पार्टियों से है तथा इनके शासन में गरीबांे, मजदूरों, उपेक्षितों एवं अन्य मेहनतकश समाज के लोगों का सही हित व कल्याण संभव नहीं है, जो कि अब तक यूपी आदि राज्यों की तरह राजस्थान में भी देखने को मिल रहा है। इन शोषित व उपेक्षित वर्गों का हित केवल अम्बेडकरवादी पार्टी बी.एस.पी. में ही निहित है, जैसाकि यूपी में हमारी पार्टी की चार बार रही सरकारों में ऐसा करके भी दिखाया गया है।
खासकर उदयपुर की अति-दुःखद व घोर निन्दनीय हिंसक घटना के संदर्भ में मायावती ने कहा कि एक तरफ जहाँ कांग्रेस सरकार हालात का सही आकलन करके लोगों के लिए सुरक्षा की उचित व्यवस्था लागू करने में विफल रही है, वहीं भाजपा इस घटना की आड़़ में जबरदस्त राजनीति करने में व्यस्त रहकर इस मामले को तूल देने में ही लगी है, जो अति दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण है। कुल मिलाकर राजस्थान सरकार जातिवादी व साम्प्रदायिक तत्वों से सख्ती से निपटने में काफी हद तक विफल रही है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड रह़ा है।
वास्तव में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कानून के तटस्थ राज को सख्ती से लागू करके शान्ति-व्यवस्था बहाल रखनेे की जिम्मेदारी निभाने के वजाय अराजक तत्वों के तुष्टीकरण करते रहने के मामले में कांग्रेस व भाजपा दोनों ही पार्टियों की सरकारें एक-दूसरे से ज्यादा भिन्न नहीं लग रही हैं। ऐसे में जनकल्याणकारी विकास ज्यादातर मामलों में केवल कागजी दावा व जुबानी बयानबाजी ही बनकर रह जाता है, जिस स्थिति से यूपी की तरह राजस्थान को भी निकाल कर जनता की राहत दिलाने का प्रयास करना है। सभी सरकारों की जिम्मेदारी अराजकता को संरक्षण देना नहीं बल्कि उसको हर हाल में रोकना होना चाहिए, जिसके अभाव में ही भारी संकटों से जूझ रहे देश में हर तरफ तनाव एवं अफरातफरी आदि का अति-दुःखद माहौल व्याप्त है।
इसके साथ ही यूपी, पंजाब, हरियाणा, बिहार आदि राज्यों की तरह ही राजस्थान प्रदेश के खासकर ग्रामीण परिवेश तथा किसान परिवारों के मेहनती नौजवान भी फौज में काफी गर्व के साथ भर्ती होने के लिए बड़ी उम्मीदों के साथ कड़ी मेहनत व लगन के साथ लम्बी तैयारी करते हैं, जिन्हें भी पूरे देश के युवाओं की तरह केन्द्र सरकार की नई ठेके वाली अस्थाई ’अग्निपथ’ सेना भर्ती योजना से काफी निराशा हुई है। उनकी इस दशा के प्रति केन्द्र सरकार को गंभीरतापूर्वक जरूर विचार करना चाहिये।
वैसे भी गरीब लोगों के अपने देश में बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी व आसमान छूती महंगाई आदि की जबरदस्त मार व संकट झेल रहे देश के युवाओं के प्रति केन्द्र व सभी राज्य सरकारों को उनकी जिन्दगी की सबसे बड़ी रोजगार देने की जरूरत के हिसाब से ही नीति व कार्यक्रम तैयार करना समय की सबसे बड़ी माँग है, ना कि रक्षा जगत के मामले में भी दूसरे देशों की देखादेखी एवं नकल होनी चाहिए। खासकर देश की बढ़ती हुई रक्षा चुनौतियों के मामले में फौज की नई भर्ती स्कीम लोगों की समझ से परे व अविश्वासी ज्यादा नजर आ रही है।
पसमान्दा (उपेक्षित व पिछड़े) मुस्लिम समाज के लोगों के प्रति भाजपा के नए-नए उभरे प्रेम को पार्टी का ’’नया शिगुफा व छलावा’’ बताते हुए सुश्री मायावती जी ने कहा कि आज देश भर में हर तरफ जो जानलेवा महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी व आर्थिक विपन्नता का अभिशाप व्याप्त है उससे हर वर्ग व हर समाज के लोग काफी ज्यादा दुःखी व त्रस्त हैं तथा सभी काफी शोषित, उपेक्षित व ठगे हुए महसूस कर रहे हैं।
इसीलिए खासकर केन्द्र तथा विशाल आबादी वाले यूपी व मध्य प्रदेश आदि की राज्य सरकारों को, कोरी बयानबाजी व तरह-तरह से लोगों का ध्यान बाँटों कार्यक्रम त्याग कर, सर्वसमाज की सही कल्याणकारी चिन्ता में पूरी तरह से जुट जाने की जरूरत है, जिसके अभाव में लोगों की आस टूट रही है। गरीब हताश व निराश हैं तथा उनका मनोबल टूट रहा है तथा वें आत्महत्यायें करने को भी मजबूर हो रहे हैं। सरकार लोगों को भूखे पेट तथा बेरोजगार रखने की वजाय सबसे पहले रोजी-रोजगार की समुचित व्यवस्था करे, यही सबसे बड़ा राजधर्म, हितकारी व मानवीयता है।

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