मायावती की नसीहत के बाद अशोक सिद्धार्थ का सियासी संन्यास, आकाश आनंद की वापसी पर भी बड़ा सवाल

Following Mayawati's advice, Ashok Siddhartha retires from politics, and Akash Anand's return is also a major question mark.

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Lucknow, 10 Sep, 2026 11:29 AM
मायावती की नसीहत के बाद अशोक सिद्धार्थ का सियासी संन्यास, आकाश आनंद की वापसी पर भी बड़ा सवाल

बसपा सुप्रीमो ने निजी स्वार्थ छोड़ने की दी थी सलाह, अशोक सिद्धार्थ बोले- बहन जी का आदेश मेरे लिए अंतिम शब्द

लखनऊ, 10 सितंबर 2026 (आईपीएन)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की बुधवार को एक्स पर की गई पोस्ट के बाद पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने गुरुवार सुबह अपने राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। मायावती ने अपनी पोस्ट में अशोक सिद्धार्थ पर निजी और पारिवारिक स्वार्थों को पार्टी के मिशन से अधिक महत्व देने का आरोप लगाते हुए उन्हें राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने की सलाह दी थी। इसके जवाब में अशोक सिद्धार्थ ने मायावती को संबोधित करते हुए कहा कि उनके लिए बहन जी का आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़कर है।

मायावती ने पार्टी हित में संन्यास लेने की दी थी सलाह

मायावती ने अपनी पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ये तीनों राज्य बसपा तथा बहुजन आंदोलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी, समर्थक और शुभचिंतक सत्ता प्राप्ति के मिशन में पूरी ताकत से जुटे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे समय में बसपा और बहुजन आंदोलन को विरोधी पार्टियों तथा जातिवादी तत्वों से कड़े चैलेंजों का सामना करना पड़ रहा है। मायावती ने सर्वसमाज से सहयोग की अपील करते हुए विशेष रूप से दलित समाज के लोगों से निजी या पारिवारिक स्वार्थ में ऐसा कोई कार्य न करने को कहा, जो पार्टी के मिशन में बाधा उत्पन्न करे।

मायावती ने अपनी पोस्ट में अशोक सिद्धार्थ को इसका चर्चित उदाहरण बताते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें सुधारने के लिए कई बार अवसर दिया, लेकिन उन्होंने पार्टी के मिशन से अधिक निजी, पारिवारिक स्वार्थ और महत्वाकांक्षा को महत्व दिया। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा अशोक सिद्धार्थ के साथ-साथ उनके दामाद आकाश आनंद को भी भुगतना पड़ा है।

आकाश आनंद की जिम्मेदारियों को लेकर भी मायावती का संकेत

मायावती ने कहा कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित के साथ-साथ अशोक सिद्धार्थ के परिवार एवं आकाश आनंद के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके पास अभी भी अवसर है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा त्यागकर राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लें।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आकाश आनंद का स्वतंत्र रूप से पार्टी में काम करना संभव होगा और पार्टी उनकी जिम्मेदारियां वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकती है। मायावती ने यह भी कहा कि इस संबंध में पार्टी में आम राय है।

अशोक सिद्धार्थ ने कहा- बहन जी का आदेश अंतिम शब्द

मायावती की पोस्ट के बाद अशोक सिद्धार्थ ने गुरुवार सुबह एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मायावती को संबोधित करते हुए कहा कि वे बीते 35 वर्षों से बसपा, मान्यवर कांशीराम और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहे हैं।

अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि मायावती ने उन्हें विधान परिषद और राज्यसभा तक पहुंचने का अवसर दिया तथा अपने परिवार का सदस्य बनाया। उन्होंने कहा कि यह उनका ऐसा ऋण है, जिसे वे इस जीवन में चुका नहीं सकते।

उन्होंने कहा, “मेरे लिए आपका आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़ कर है। आपके आदेश के आगे मेरे रिश्ते नाते, परिवार सभी बेहद छोटे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि मायावती की एक-एक नसीहत और आदेश उनके लिए अंतिम शब्द हैं।

आरोपों को बताया राजनीतिक विरोधियों की साजिश

अशोक सिद्धार्थ ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्होंने कभी पार्टी के हित के खिलाफ कोई काम नहीं किया और मायावती के खिलाफ कुछ करने के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकते। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ साथी उन्हें मायावती से मिले सम्मान के कारण पार्टी पर कब्जा करने और आकाश आनंद को गुमराह करने का आरोप लगाते हैं, लेकिन इसमें लेशमात्र भी सच्चाई नहीं है।

उन्होंने इन आरोपों को अपने राजनीतिक विरोधियों की साजिश बताया और कहा कि इसकी सच्चाई एक न एक दिन मायावती के सामने जरूर आएगी।

बोले- आकाश आनंद की वापसी को मेरे संन्यास से न जोड़ें

अशोक सिद्धार्थ ने मायावती से विनम्र निवेदन करते हुए कहा कि उनके संन्यास लेने को आकाश आनंद की वापसी से न जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद उनके दामाद से पहले मायावती के भतीजे और आनंद कुमार के बेटे हैं।

उन्होंने कहा कि आकाश आनंद ने अपने जीवन के दो दशक मायावती की छत्रछाया और देखरेख में बिताए हैं। उनके अनुसार, मायावती आकाश आनंद के अच्छे-बुरे को किसी और से अधिक बेहतर समझती हैं और उन्हें जिम्मेदारी देना या न देना उनका अपना फैसला है।

बहुजन मिशन को नुकसान पहुंचने की आशंका पर लिया संन्यास

अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि मायावती स्वयं त्याग और दया की मूर्ति हैं तथा समाज के हित में उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी और राज्यसभा के सदस्य पद को भी ठोकर मार दी थी। उन्होंने कहा कि यदि मायावती को लगता है कि उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन में रहने से संतों, गुरुओं और महापुरुषों के बनाए बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है, तो वे उसी समय राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहे हैं।

उन्होंने अपनी पोस्ट का समापन “जय भीम, जय भारत, जय बहुजन समाज” के साथ किया।

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