जातिगत जनगणना फॉर्म में ओबीसी कॉलम न होने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
Congress raises questions over absence of OBC column in caste census form
IPN Live
Lucknow, 21 Aug, 2026 11:45 PMलखनऊ, 21 अगस्त 2026 (आईपीएन)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में शुक्रवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रभारी उत्तर प्रदेश एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम तथा पिछड़ा वर्ग विभाग के राष्ट्रीय चेयरमैन डॉ. अनिल जयहिन्द ने प्रेसवार्ता कर जातिगत जनगणना के फॉर्म में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम नहीं होने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि जातिगत जनगणना फॉर्म में एससी/एसटी का कॉलम है, लेकिन ओबीसी वर्ग का अलग कॉलम नहीं है। उन्होंने कहा कि नोटिफिकेशन में ओबीसी कॉलम नहीं जोड़ने का अर्थ है कि भाजपा सरकार पिछड़े वर्ग को सामाजिक, आर्थिक, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी नहीं देना चाहती।
उन्होंने कहा कि संसद में प्रधानमंत्री द्वारा जाति जनगणना कराए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन फॉर्म में ओबीसी कॉलम नहीं देकर पिछड़े वर्ग के साथ बड़ा धोखा किया गया है। कांग्रेस की मांग है कि दोबारा नोटिफिकेशन जारी कर ओबीसी जातियों के लिए ड्रॉप-डाउन कॉलम बनाया जाए और सभी ओबीसी जातियों को उसमें शामिल किया जाए।
गौतम ने कहा कि प्रत्येक जाति के कई टाइटिल होते हैं। ऐसे में तेलंगाना के जाति जनगणना मॉडल के आधार पर जातियों की नंबरिंग की जानी चाहिए, ताकि एक ही जाति के अलग-अलग टाइटिल को एक विशेष नंबर के तहत शामिल किया जा सके।
उन्होंने दावा किया कि ओबीसी जातियां 52 प्रतिशत से भी अधिक हैं। यदि इन वर्गों के लोगों ने जेन-जी की तरह आंदोलन कर दिया तो सरकार संभल नहीं पाएगी और उखड़ जाएगी।
पिछड़ा वर्ग विभाग के राष्ट्रीय चेयरमैन डॉ. अनिल जयहिन्द ने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र की भाजपा सरकार और आरएसएस देश में मनुवादी व्यवस्था को दोबारा स्थापित करना चाहते हैं, इसलिए वैज्ञानिक तरीके से जातिगत जनगणना नहीं कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि जनगणना में ओबीसी का कॉलम नहीं होने से ओबीसी जातियों की सही गणना संभव नहीं होगी। केवल टाइटिल के आधार पर गणना किए जाने पर जातियों की संख्या लाखों में पहुंच सकती है, जिससे तैयार होने वाला डाटा प्रभावी नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज को उसकी सामाजिक, आर्थिक, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से जातिगत आंकड़े जुटाना जरूरी है।
डॉ. जयहिन्द ने कहा कि राहुल गांधी चाहते हैं कि जातिगत जनगणना SEEEP (Social, Economic, Education, Employment and Political) मॉडल यानी तेलंगाना मॉडल के आधार पर कराई जाए, ताकि जनगणना से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर शोषित जातियों को उनकी सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी का लाभ मिल सके।
उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि देश की संपत्ति कुछ बड़े उद्योगपतियों के हाथों में केंद्रित की जा रही है। उन्होंने भाजपा के पिछड़े वर्ग के नेताओं अनुप्रिया पटेल, डॉ. संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे अपने समाज के कथित शोषण के खिलाफ आवाज नहीं उठा रहे हैं।
डॉ. जयहिन्द ने जातिगत जनगणना के फॉर्म में ओबीसी कॉलम नहीं होने और केंद्र व राज्य की सूचियों के अनुसार जातियों की गणना नहीं कराने की कथित मंशा को ओबीसी वर्ग के अधिकारों पर बड़ा हमला बताया।
प्रेसवार्ता में कांग्रेस के नवनियुक्त राष्ट्रीय सचिव एवं सह-प्रभारी उत्तर प्रदेश जगदीश चंद्र जांगीड़, मीडिया चेयरमैन एवं पूर्व मंत्री डॉ. सीपी राय, पिछड़ा वर्ग विभाग के चेयरमैन मनोज यादव, प्रवक्ता डॉ. उमाशंकर पाण्डेय, प्रवक्ता प्रियंका गुप्ता, प्रवक्ता सचिन रावत और प्रवक्ता डॉ. राजकुमार मौर्य सहित अन्य नेता उपस्थित रहे।
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