कांग्रेस और विपक्ष RSS से सीखें, केवल विरोध नहीं समाज सेवा करें : डॉ. राजेश्वर सिंह
Congress and opposition should learn from RSS, do social service instead of just opposition: Dr. Rajeshwar Singh
IPN Live
Lucknow, 17 Aug, 2026 03:31 AMलखनऊ/सरोजनीनगर, 16 अगस्त (आईपीएन)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सरोजनीनगर से भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने संघ की लंबे समय से जारी जमीनी गतिविधियों, संगठन निर्माण और सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस और विपक्षी दलों को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित न रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्थायी जनाधार और जनविश्वास 365 दिन की सेवा, मजबूत संगठन और समाज के साथ निरंतर जुड़ाव से बनता है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि राजनीति केवल चुनाव के समय सक्रिय होने का माध्यम नहीं है। RSS की एक सदी की यात्रा निरंतर सामाजिक जुड़ाव और संगठन निर्माण का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को भी समाज के बीच जाकर काम करने, संस्थाएं खड़ी करने और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने पर ध्यान देना चाहिए।
89 हजार दैनिक शाखाओं और सामाजिक संस्थाओं का किया उल्लेख
डॉ. सिंह ने कहा कि RSS करीब 89 हजार दैनिक शाखाओं के माध्यम से 55 हजार से अधिक स्थानों तक पहुंच चुका है। उनके अनुसार पिछले दो-तीन वर्षों में चार हजार से अधिक नए स्थानों पर शाखाएं शुरू हुई हैं और पांच हजार से अधिक नई शाखाएं जुड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि संघ की गतिविधियां केवल शाखाओं तक सीमित नहीं हैं। उनके मुताबिक विद्या भारती के 12 हजार से अधिक विद्यालयों में करीब 30 लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। एक लाख से अधिक एकल विद्यालयों के माध्यम से उन क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाई जा रही है, जहां सरकारी विद्यालय उपलब्ध नहीं हैं। राष्ट्रीय सेवा भारती के पांच हजार से अधिक स्वास्थ्य केंद्र सेवा कार्य कर रहे हैं, जबकि वनवासी कल्याण आश्रम लंबे समय से जनजातीय क्षेत्रों में काम कर रहा है। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के करीब 75 लाख सदस्यों का भी उल्लेख किया।
‘केवल विरोध से राजनीति लंबे समय तक मजबूत नहीं हो सकती’
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि नकारात्मक राजनीति कोई स्थायी रणनीति नहीं है। किसी विचारधारा का विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन केवल विरोध के आधार पर राजनीति को लंबे समय तक मजबूत नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि समाज के बीच जाकर काम करना, संस्थाएं बनाना और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना स्थायी जनविश्वास की नींव है।
केरल का उदाहरण देकर समझाया संगठन का महत्व
डॉ. सिंह ने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां RSS का राजनीतिक प्रभाव सीमित होने के बावजूद देश में बड़ी संख्या में शाखाएं हैं। उनके अनुसार यह केवल चुनावी संगठन नहीं, बल्कि सामाजिक और संगठनात्मक संरचना है, जो चुनावी गणित से अलग निरंतर काम करती है।
कांग्रेस की सेवा-दल परंपरा पुनर्जीवित करने की अपील
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कांग्रेस की स्वयंसेवी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वयंसेवक आधारित संगठन की अवधारणा कांग्रेस से भी जुड़ी रही है। उन्होंने 1923 में काकीनाडा में हिंदुस्तानी सेवा दल की पहल और 1931 में महात्मा गांधी द्वारा इसे मान्यता दिए जाने का उल्लेख किया।
उन्होंने कांग्रेस से अपनी सेवा-दल परंपरा को पुनर्जीवित करने और इसे केवल चुनावी गतिविधियों तक सीमित न रखने की अपील की।
‘विपक्ष सामाजिक संस्थाएं खड़ी करे’
डॉ. सिंह ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष के सामने स्पष्ट विकल्प है कि वे हर समय आलोचना करने के बजाय समाज में संस्थाएं खड़ी करें, युवाओं के साथ काम करें, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान दें और जरूरतमंदों की सेवा करें। उन्होंने कहा कि यही प्रयास राजनीतिक दलों को समाज से स्थायी रूप से जोड़ सकता है।
उन्होंने कांशीराम द्वारा BAMCEF और DS-4 जैसे संगठनों के निर्माण का भी उल्लेख करते हुए कहा कि मजबूत कैडर और सामाजिक संगठन किसी भी राजनीतिक आंदोलन की दीर्घकालीन ताकत बन सकते हैं।
डॉ. सिंह ने समाजवादी पार्टी से भी सवाल किया कि सरकार से बाहर रहते हुए अपने संसाधनों से संचालित और ऐसे लोगों की सेवा करने वाली कितनी सामाजिक संस्थाएं उसके पास हैं, जो संभवतः उसे वोट न दें।
‘सेवा निरंतर हो, संगठन मजबूत हो’
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में केवल आलोचना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि सेवा का काम चुनाव के समय शुरू होकर चुनाव खत्म होने के साथ बंद नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार RSS ने लंबे समय तक निरंतरता के साथ काम किया है और विपक्षी दलों को भी इससे सीख लेते हुए सेवा, संगठन और समाज निर्माण को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाना चाहिए।
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