AKHILESH को BJP का करारा जवाब, बोली : परिवारवादी लोगों के मुँह से लोभ लालच और स्वार्थ पर उपदेश शोभा नहीं देता
BJP's strong reply to Akhilesh, said: Sermons on greed and selfishness from the mouth of family-oriented people do not suit.
IPN Live
Lucknow, 11 May, 2026 01:22 AMलखनऊ, (IPN)। भारतीय जनता पार्टी ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के ट्वीट पर कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि आय से अधिक संपत्ति और परिवार तक ही पार्टी और सरकार को सीमित करने वाले लोगो के मुँह से लोभ लालच और स्वार्थ पर उपदेश शोभा नहीं देता।परात्पर ब्रह्म श्री कृष्ण चराचर में व्याप्त हैं। जनता जनार्दन उन्ही का स्वरूप है। यह भी अखिलेश को समझना होगा जो गीता का ही संदेश है।
दरअसल, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को अपने ट्वीट में लिखा कि समय बिताने के लिए करना है कुछ काम!
वैसे भी मंत्रिमंडल के विस्तार में तो इनका कोई काम है नहीं। उधर से पर्ची आएगी, यहाँ तो सिर्फ़ पढ़ी जाएगी। भाजपा राज में वैसे भी CM का मतलब बस यही रह गया है :y6y Courier-Messenger.
वैसे जनता पूछ रही है कि फ़िल्म सबसे आगे बैठकर देखेंगे या पीछे बैठकर?
जनता का अनुरोध है कि फ़िल्म ध्यान से देखिएगा… हो सकता है ‘कर्मफल-कंसफल’ का सिद्धांत समझकर कुछ जागरण हो जाए और कुछ अच्छा बदलाव भी।
हम तो यही मानते हैं कि मूल रूप से व्यक्ति नहीं उसका ‘लालच-लोभ’ ही बुरा होता है, जो धीरे-धीरे उसका दुराचरण बन जाता है। बुराई इंसान को और बुरा बनाती जाती है।
इसके विपरीत ये भी सच है कि जब व्यक्ति ‘स्वार्थ’ को छोड़कर ‘परमार्थ’ के मार्ग पर चल निकलता है तो सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है, वो मानवता के लिए सार्थक साबित हो सकता है। अपने अंदर की सौ बुराइयों के ऊपर चंद अच्छाइयां जीत हासिल कर सकती हैं, यही महाकाव्यों का गहरा आंतरिक संदेश है। अपनी गलतियों और दुर्भावनाओं के लिए प्रायश्चित करने का कोई स्थान नियत नहीं होता है, इसके लिए अंदर का प्रकाश चाहिए जो सैकड़ों लोगों के बीच ‘अंधेरे बंद परिसर’ में भी हो सकता है।
तमसो मा ज्योतिर्गमय!
उधर अखिलेश के इस ट्वीट के बाद भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने पीठ पर अखिलेश को करारा जवाब देते हुए लिखा कि सपा मुखिया अखिलेश ममता को पश्चिम बंगाल की जनता जनार्दन ने अपने कंस कर्मों का प्रायश्चित करने के लिए राजसत्ता से बाहर कर मजबूर किया अब संभवतः उन्हें अपने अंदर की बुराई के लिए प्रायश्चित करने का अवसर मिलेगा। अखिलेश वर्ष 2012 से 2017 के अपनी सरकार में हुए कंस कर्मों के प्रायश्चित के जनता जनार्दन द्वारा मजबूर किए जाने के बावजूद वह कृष्णावतरम् से शिक्षा नही ले रहे हैं उन्हें यह अभी तक समझ में ही नहीं आ रहा है कि वे अपनी सरकार के कंस कर्मों के प्रायश्चित को ही झेल रहे हैं।
मेरी सलाह है कि उपदेशक की भूमिका छोड़कर अखिलेश को कृष्णावतारम अपनी पार्टी के नेताओ के साथ देखे और ख़ुद भी श्री कृष्ण के संदेश को समझे और पार्टी के लोगो को भी बताए उपदेशक की भूमिका में योगयोगेश्वर श्री कृष्ण को ही रहने दे।
प्रवक्ता श्री श्रीवास्तव ने कहा कि आय से अधिक संपत्ति और परिवार तक ही पार्टी और सरकार को सीमित करने वाले लोगो के मुँह से लोभ लालच और स्वार्थ पर उपदेश शोभा नहीं देता।परात्पर ब्रह्म श्री कृष्ण चराचर में व्याप्त हैं। जनता जनार्दन उन्ही का स्वरूप है। यह भी अखिलेश को समझना होगा जो गीता का ही संदेश है।

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