भाजपा का ‘सोशल इंजीनियरिंग मास्टरस्ट्रोक’! राज्यसभा की 8 सीटों पर दांव, क्या अंतिम दिन होगा 9वां बड़ा खेल?
BJP's 'social engineering masterstroke'! Eight Rajya Sabha seats at stake, will the final day bring a big 9th?
IPN Live
Lucknow, 5 Oct, 2026 06:51 PMजितेंद्र त्रिपाठी
लखनऊ, 05 अक्टूबर 2026 (आईपीएन)। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा दांव चला, जिसकी चर्चा सिर्फ सत्ता के गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समीकरणों और आगामी चुनावी रणनीति के संदर्भ में भी की जा रही है। भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 8 उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। उम्मीदवारों के नामों की घोषणा पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी तरुण चुग ने केंद्रीय चुनाव समिति की मंजूरी के बाद की।
घोषित उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, प्रियंका सिंह रावत, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।
सामाजिक संतुलन का बड़ा संदेश
भाजपा की सूची पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि पार्टी ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को केंद्र में रखकर उम्मीदवारों का चयन किया है। ओबीसी, दलित, ब्राह्मण, क्षत्रिय और महिला प्रतिनिधित्व को संतुलित तरीके से साधने का प्रयास किया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ राज्यसभा चुनाव की सूची नहीं बल्कि 2027 की चुनावी तैयारी का रोडमैप भी है।
दो महिलाओं को मौका, महिला शक्ति पर भरोसा
भाजपा ने पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत और बरेली की चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता श्रुति गंगवार को राज्यसभा भेजने का फैसला कर महिला नेतृत्व को मजबूत संदेश दिया है।
बाराबंकी से पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत ने 2014 में कांग्रेस के दिग्गज नेता पीएल पुनिया को बड़े अंतर से हराकर राष्ट्रीय पहचान बनाई थी। वहीं श्रुति गंगवार, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वर्तमान झारखंड राज्यपाल संतोष गंगवार की पुत्री हैं और रुहेलखंड क्षेत्र में सक्रिय सामाजिक चेहरा मानी जाती हैं।
लोधी वोट बैंक का बड़ा चेहरा बने धर्मपाल सिंह
राज्यसभा उम्मीदवारों में सबसे चर्चित नाम। पांच बार विधायक रह चुके धर्मपाल सिंह को भाजपा का भरोसेमंद और अनुभवी चेहरा माना जाता है।
शिक्षक से दिल्ली दरबार तक का सफर
15 जनवरी 1953 को बरेली में जन्मे धर्मपाल सिंह ने राजनीति में आने से पहले शिक्षक और किसान के रूप में काम किया। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों के बीच उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है।
पांच बार विधायक
आंवला विधानसभा सीट से धर्मपाल सिंह 1996, 2002, 2012, 2017 और 2022 में विधानसभा पहुंचे। तीन दशक से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने लगातार अपना जनाधार बनाए रखा है।
कई सरकारों में निभाई अहम भूमिका
मायावती सरकार में राज्य मंत्री से लेकर कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह सरकारों में स्वतंत्र प्रभार मंत्री तक की जिम्मेदारी संभाल चुके धर्मपाल सिंह योगी सरकार के पहले कार्यकाल में सिंचाई मंत्री रहे। वर्तमान में वे पशुपालन, दुग्ध विकास और राजनीतिक पेंशन विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं।
क्यों दिया गया राज्यसभा टिकट?
भाजपा सूत्रों का मानना है कि लोधी समाज में मजबूत पकड़, साफ-सुथरी छवि और संगठन के प्रति समर्पण के चलते पार्टी अब उन्हें प्रदेश की राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए तैयार कर रही है।
ओबीसी और दलित समीकरण पर खास फोकस
भाजपा ने प्रकाश पाल को टिकट देकर पाल-गडेरिया समाज को संदेश देने का प्रयास किया है। वर्तमान में वे भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
वहीं विद्यासागर सोनकर का चयन दलित राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्व सांसद, पूर्व MLC और भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री रहे सोनकर पूर्वांचल में दलित समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं।
ब्राह्मण और प्रबुद्ध वर्ग को भी साधा
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा और वरिष्ठ संगठनकर्ता गोपी कृष्ण पांडेय को राज्यसभा भेजकर भाजपा ने ब्राह्मण समाज और प्रबुद्ध वर्ग के बीच अपनी पैठ मजबूत करने का संकेत दिया है।
क्षत्रिय प्रतिनिधित्व का चेहरा बने राम प्रताप
पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश महामंत्री राम प्रताप सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और क्षत्रिय समाज को भी प्रतिनिधित्व दिया है। संगठन में उनकी सक्रियता और राजनीतिक अनुभव को टिकट का आधार माना जा रहा है।
हरदीप सिंह पुरी को नहीं मिला मौका
इस बार भाजपा ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उत्तर प्रदेश से दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया। इसकी जगह पार्टी ने संगठन में लंबे समय से काम कर रहे और सामाजिक आधार रखने वाले नेताओं पर भरोसा जताया है।
सीएम योगी ने दी जीत की अग्रिम शुभकामनाएं
उम्मीदवारों की घोषणा के तुरंत बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सभी प्रत्याशियों को बधाई देते हुए लिखा कि सभी सम्मानित प्रत्याशियों की ऐतिहासिक विजय के लिए उनकी अनंत मंगलकामनाएं हैं।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती...
राजनीतिक गलियारों में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा एक संभावित “नौवें प्रत्याशी” को लेकर है।
सूत्रों और व्यापारी वर्ग में चल रही चर्चाओं के मुताबिक भाजपा नामांकन के अंतिम दिन एक और बड़ा राजनीतिक दांव खेल सकती है। चर्चाओं में भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि अंदरखाने उन्हें पूरी तैयारी रखने के संकेत दिए गए हैं। व्यापारी समुदाय के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि भाजपा व्यापारिक वर्ग को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकती।
यहीं नहीं, राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि जरूरत पड़ी तो भाजपा अतिरिक्त सीट के लिए जरूरी वोटों का गणित भी साध चुकी है। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
स्पष्ट है कि पार्टी केवल राज्यसभा सीटें भरने नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की सामाजिक राजनीति में अपने व्यापक संदेश को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
अब निगाहें नामांकन के अंतिम दिन पर टिक गई हैं। यदि भाजपा सचमुच नौवें प्रत्याशी के रूप में कोई बड़ा नाम मैदान में उतारती है, तो राज्यसभा चुनाव का गणित और राजनीतिक संदेश दोनों ही नए सिरे से चर्चा का विषय बन जाएंगे।
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