बहुजन कल्याण रैली के माध्यम से 7 को शक्ति प्रदर्शन करेंगे आठवले: पवन भाई गुप्ता
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Lucknow, 22 Dec, 2021 12:51 AMलखनऊ, 21 दिसम्बर 2021 (आईपीएन)। सहारनपुर से 26 सितंबर को शुरू हुई रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले), प्रदेश के समस्त जनपदों से होते हुए आगामी 22 दिसम्बर को लखनऊ पहुंच रही है। बहुजन कल्याण यात्रा के लखनऊ पहुंचने में पार्टी की ओर से एक रोड शो का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही 7 जनवरी को लखनऊ में एक विशाल बहुजन कल्याण रैली का आयोजन करके पार्टी की ओर से शक्ति प्रदर्शन किया जाएग। इस रैली में राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. रामदास आठवले सहित तमाम राष्ट्रीय स्तर के नेता मौजूद रहेंगे। ये बात आरपीआई (आठवले) के प्रदेश अध्यक्ष पवन भाई गुप्ता ने जियामऊ स्थित आरपीआई प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कही।
पवन भाई गुप्ता ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. रामदास आठवले ने 26 सितंबर 2021 को रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले की बहुजन कल्याण यात्रा की शुरुआत सहारनपुर से की थी। बहुजन कल्याण यात्रा प्रदेश के समस्त जनपदों से होकर गुजरी। हर जनपद में बहुजन कल्याण यात्रा को अपार जनसमर्थन मिला। प्रत्येक जनपद से सैकड़ों की संख्या में लोग पार्टी से जुड़े।
बहुजन कल्याण यात्रा के बनारस एवं कुशीनगर पहुंचने पर भी जनसभा का आयोजन हुआ, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रामदास आठवले की गरिमामयी उपस्थिति रही।
लखनऊ में आरपीआई का रोड शो प्रदेश कार्यालय से निकलकर, 1090 चौराहा, मुख्यमंत्री आवास चौराहा, वीवीआईपी गेस्ट हाउस चौराहा, माल एवेन्यू, योजना भवन के पास, गांधी भवन के सामने से लालबाग होते हुए भाजपा कार्यालय के बाहर पहुंचेगा। उसके बाद हजरतगंज चौराहा से घूमते हुए पार्टी कार्यालय पहुंचेगी। रोड शो के दौरान बाइक रैली के साथ सैकड़ों वाहन काफिले के साथ चलेंगे।
पवन ने कहा कि आरपीआई-भाजपा गठबंधन की घोषणा, आगामी 7 जनवरी को होने वाली वाली बहुजन कल्याण रैली के बाद होगी। गठबंधन को लेकर गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीएल संतोष, सुनील बंसल सहित भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेताओं से बातचीत हुई है।
पवन ने कहा कि पूरे प्रदेश में बहुजन कल्याण यात्रा के माध्यम से बहुजन समाज को राजनीतिक, सामाजिक रूप से जागरूक किया गया।
सपा-बसपा ने हमेशा दलित, वंचित समाज को धोखा देने का काम किया है। बहुजन समाज पार्टी, दलितों के समर्थन से 4 बार सत्ता में आई और बहन मायावती जी मुख्यमंत्री बनी लेकिन बहुजन समाज का कोई कल्याण नहीं किया।
समाजवादी पार्टी का चरित्र हमेशा से दलित विरोधी रहा है। प्रोन्नति में आरक्षण का बिल फाड़ने वाली सपा ने दलित, पिछड़े वंचित वंचित समाज का कुछ भी भला नहीं क़िया। 2012 में सपा के सत्ता पर आते ही दलित बस्तियों पर हमले तेज हो गए थे। दलितों के उत्पीड़न में सपा-बसपा दोनों एक समान रहे हैं। अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री काल में दलितों का ठेके में आरक्षण ख़त्म किया गया। मिड डे मील में दलित महिला रसोइया के होने के प्रावधानों को शिथिल किया। दलित और पिछड़े महापुरुषों के नाम पर बने पार्क व मेडिकल कालेजों का नाम बदल दिया गया।
उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और योगी सरकार ने वंचित समाज के कल्याण के लिए जो कार्य किये हैं, वह सराहनीय हैं। 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद शासन की योजनाएं दलित वंचित समाज तक बिना किसी मतभेद तक पहुँची, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने दलितो, वंचितों आदिवासियों, पिछड़ो, वनवासियों और महिलाओं सहित हर तबके के उत्थान के लिए कार्य किया। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, सौभाग्य योजना से बिजली कनेक्शन, उज्जवला योजना से रसोई गैस कनेक्शन लोगों को मिला, इससे सबसे ज्यादा लाभान्वित दलित, वंचित समाज हुआ।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की शोषित वंचित समाज के प्रति कार्य को देखकर रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) लगातार करीब 7 वषों से केंद्र में मोदी सरकार के सहयोगी दल के रूप में कार्य कर रही है।
पवन ने कहा कि आरपीआई, केंद्र सरकार के साथ गठबंधन में है। उत्तर प्रदेश में भी हम भाजपा सरकार को लगातार मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
पवन भाई गुप्ता ने कहा कि पिछले 2 सालों में आरपीआई की प्रदेश में सक्रियता बढ़ी है। है समाज, हर वर्ग के लोग पार्टी से जुड़ रहे हैं। मैं पूरे उत्तर प्रदेश के गांव, शहर, जिले में लगातार यात्रा कर रहा हूं। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की विचारधारा को मानने वाला एक बड़ा वर्ग उत्तर प्रदेश में है। जो तेजी से पार्टी के साथ जुड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण, दलित उत्थान के नाम पर जातीय उन्माद भड़का रहे हैं। जो बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बताए गए समतामूलक समाज की स्थापना के सिद्धांतों के विरुद्ध है। भीम आर्मी, पहले ऐसे दलित, पिछड़े युवाओं में जातीय जहर भरकर उकसाती है, लेकिन जब उन पर मुकदमा होता है तो भीम आर्मी उनका कोई समर्थन नहीं करती और उनका जीवन कष्टप्रद हो जाता है।

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