अखिलेश का 'मास्टरस्ट्रोक' या BJP के लिए सबसे बड़ा सियासी झटका? तीसरी राज्यसभा सीट पर व्यापारी कार्ड, विनीत अग्रवाल शारदा के नाम की तेज हुई चर्चा

Akhilesh's 'masterstroke' or the biggest political setback for the BJP? Vineet Agarwal Sharda's name is gaining traction for the third Rajya Sabha seat.

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Lucknow, 3 Oct, 2026 04:42 PM
अखिलेश का 'मास्टरस्ट्रोक' या BJP के लिए सबसे बड़ा सियासी झटका? तीसरी राज्यसभा सीट पर व्यापारी कार्ड, विनीत अग्रवाल शारदा के नाम की तेज हुई चर्चा

जितेंद्र त्रिपाठी

लखनऊ, 03 अक्टूबर 2026 (आईपीएन)। उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की तीसरी सीट को लेकर बना सस्पेंस अब प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित विषय बन चुका है। प्रो. रामगोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा करने वाले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अब तीसरे उम्मीदवार के रूप में ऐसा दांव चल सकते हैं, जो सीधे भाजपा के कोर वोट बैंक और व्यापारी वर्ग के बीच बड़ा राजनीतिक संदेश देने वाला साबित हो सकता है।

व्यापारी राजनीति के केंद्र में विनीत अग्रवाल शारदा

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार समाजवादी पार्टी ने भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के पांच बार के संयोजक रहे वरिष्ठ व्यापारी नेता विनीत अग्रवाल शारदा के नाम पर अंदरखाने गंभीर मंथन शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि भाजपा से नाराज व्यापारी वर्ग को साधने और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नई राजनीतिक जमीन तैयार करने की रणनीति के तहत सपा इस विकल्प पर विचार कर रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सपा ऐसा कदम उठाती है तो यह केवल एक उम्मीदवार का चयन नहीं होगा, बल्कि भाजपा के परंपरागत समर्थक वर्ग तक सीधा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी होगी।

तीसरी सीट के लिए वोटों का गणित भी साधने में जुटी सपा

दिलचस्प बात यह है कि सपा केवल उम्मीदवार के नाम पर ही नहीं, बल्कि तीसरी सीट के लिए जरूरी वोटों की व्यवस्था पर भी मजबूत काम कर चुकी है। सूत्रों का दावा है कि पार्टी ने ऐसे कई विधायकों से संपर्क साधा है, जिनके बारे में माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनके टिकट को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

यही वजह है कि सपा नेतृत्व तीसरे उम्मीदवार का नाम अंतिम समय तक गोपनीय रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

भाजपा खेमे में सेंधमारी की चर्चा

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि समाजवादी पार्टी को भरोसा है कि विधानसभा के मौजूदा अंकगणित से परे कुछ अतिरिक्त समर्थन भी उसे मिल सकता है। सपा की नजर खासतौर पर उन विधायकों पर है जो अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर आशंकित हैं। चर्चा यह तक है कि आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक पुनर्स्थापन के संकेत देकर क्रॉस वोटिंग की जमीन तैयार की जा रही है।

हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि किसी भी स्तर पर नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह विषय चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।

राजभर के बयान से बढ़ी सियासी सरगर्मी

उधर सुभासपा खेमे से उठी हलचल ने भी भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि उनकी पार्टी के कुछ विधायक उनके पूर्ण नियंत्रण में नहीं हैं और राज्यसभा चुनाव में अलग रुख अपना सकते हैं।

अब्बास अंसारी की अखिलेश यादव से हुई मुलाकात ने इन चर्चाओं को और बल दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन घटनाक्रमों ने तीसरी सीट के मुकाबले को और रोचक बना दिया है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है...

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल विनीत अग्रवाल शारदा की राजनीतिक स्थिति को लेकर है। मेरठ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अपनी नाराजगी जाहिर करने के बावजूद उन्होंने सार्वजनिक रूप से साफ कहा था कि विपक्षी दलों से प्रस्ताव मिलने की चर्चा भले हो, लेकिन वह भाजपा छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।

उन्होंने अपनी मांग केवल भाजपा नेतृत्व के समक्ष रखते हुए कहा था कि प्रदेश के करोड़ों व्यापारियों के सम्मान और प्रतिनिधित्व के लिए उन्हें राज्यसभा भेजा जाना चाहिए।

यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सपा के टिकट पर विनीत अग्रवाल शारदा के चुनाव लड़ने की संभावना फिलहाल बेहद सीमित दिखाई देती है। लेकिन राजनीति संभावनाओं का खेल है और उनके नाम की चर्चा भर ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

सलीम शेरवानी अब भी सबसे मजबूत दावेदार

फिलहाल सलीम इकबाल शेरवानी तीसरे उम्मीदवार की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन और वरिष्ठ नेता अरविंद सिंह गोप के नाम भी चर्चा में हैं। इसके बावजूद अखिलेश यादव की कार्यशैली को देखते हुए राजनीतिक हलकों में यह मानने वालों की कमी नहीं है कि तीसरे उम्मीदवार के नाम पर अंतिम क्षणों में एक और बड़ा सरप्राइज सामने आ सकता है।

2027 की लड़ाई की भी दिख रही झलक

राज्यसभा की यह लड़ाई अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गई है, बल्कि यह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक ताकत, सामाजिक समीकरणों और विधायकों की निष्ठा की बड़ी परीक्षा के रूप में देखी जा रही है।

समाजवादी पार्टी जहां इस चुनाव के जरिए व्यापक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश में है, वहीं भाजपा भी अपने सहयोगी दलों और विधायकों को एकजुट रखने की कवायद में जुटी हुई है। ऐसे में तीसरी सीट का मुकाबला आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा सियासी केंद्र बनने जा रहा है।

अब सबकी नजर अखिलेश यादव के अगले कदम पर टिकी हुई है। क्या सपा व्यापारी कार्ड खेलकर बड़ा राजनीतिक संदेश देगी या फिर किसी पारंपरिक राजनीतिक चेहरे पर दांव लगाएगी? इसका जवाब नामांकन की अंतिम घड़ी में ही सामने आने की संभावना है।

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