गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मिले चंदे की जांच की मांग, अजय राय ने ED और CBDT को लिखा पत्र

गुजरात से जुड़े छह दलों को वर्ष 2023-24 में करीब 1,700 करोड़ रुपये का चंदा मिलने का दावा, उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव में ऐसे संगठनों के संभावित इस्तेमाल पर जताई चिंता

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Lucknow, 6 Sep, 2026 06:19 PM
गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मिले चंदे की जांच की मांग, अजय राय ने ED और CBDT को लिखा पत्र

लखनऊ, 6 सितंबर (आईपीएन)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने गुजरात से जुड़े पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) को मिले कथित संदिग्ध चंदे और उसके वास्तविक स्रोत की जांच की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष रवि अग्रवाल तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक राहुल नवीन को अलग-अलग पत्र भेजे हैं।

अजय राय ने अपने पत्रों में बीबीसी हिंदी की 4 सितंबर 2026 की पत्रकार शुभांगी मिश्रा की पड़ताल का हवाला देते हुए कहा है कि गुजरात से जुड़े छह RUPPs को वर्ष 2023-24 में लगभग 1,700 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जबकि लोकसभा चुनाव में इन दलों के केवल 15 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे। पत्र के अनुसार, चार दलों के पंजीकृत कार्यालय अहमदाबाद के एक ही क्षेत्र में हैं और शेष दो भी गुजरात में स्थित हैं।

इन दलों को मिले चंदे का उल्लेख

अजय राय ने पत्र में दावा किया है कि आम आदमी पार्टी को लगभग 620 करोड़ रुपये, समाजवादी रक्षक पार्टी को लगभग 330 करोड़ रुपये, स्वतंत्र अभिव्यक्ति पार्टी को लगभग 219 करोड़ रुपये, न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी को लगभग 200 करोड़ रुपये, गरीब कल्याण पार्टी को लगभग 138 करोड़ रुपये और भारतीय नेशनल जनता दल को लगभग 191 करोड़ रुपये मिले।

उन्होंने कहा कि यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि CBDT की पूर्व कार्रवाई में भी कुछ RUPPs के माध्यम से चंदे, धन के स्रोत और संदिग्ध आवागमन से जुड़े मामलों में अनियमितताओं की जानकारी सामने आ चुकी है। उन्होंने इन छह दलों के धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों की जांच आवश्यक बताई है।

CBDT से आयकर कानून के तहत जांच की मांग

CBDT अध्यक्ष को लिखे पत्र में अजय राय ने आयकर अधिनियम, 1961/2025 तथा उसके अधीन नियमों और लागू प्रावधानों के तहत जांच की मांग की है। उन्होंने चंदा देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं की वास्तविक पहचान, उनके स्थायी खाता संख्या (PAN), आयकर विवरणियों, बैंक खातों तथा घोषित आर्थिक क्षमता का चंदे से मिलान करने की आवश्यकता बताई।

पत्र में यह भी कहा गया है कि चंदे के बदले नकद वापसी, कमीशन अथवा पर्ची-आधारित वित्तीय लेन-देन तो नहीं हुआ तथा इन दलों के वास्तविक बैंक संचालक, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता, चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य मध्यस्थ कौन हैं, इसकी भी जांच की जाए। अजय राय ने अलग-अलग RUPPs के पीछे समान व्यक्तियों अथवा वित्तीय नेटवर्क के काम करने की संभावना की जांच का सुझाव दिया है।

ED से PMLA के तहत जांच की अपील

प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक को भेजे पत्र में अजय राय ने धन के वास्तविक स्रोत, मूल दाता, वास्तविक नियंत्रक अथवा लाभकारी स्वामी (beneficial owners) की पहचान और धन के विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से लेयरिंग या रूटिंग की जांच की मांग की है।

उन्होंने यह भी जानने की आवश्यकता बताई कि क्या नकद, हवाला अथवा सीमा-पार लेन-देन का कोई संबंध है और क्या धन का अंतिम लाभार्थी कोई अन्य व्यक्ति या संस्था है। पत्र में Prevention of Money Laundering Act, 2002 (PMLA) की संबंधित धाराओं के तहत आवश्यक जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

चुनाव में संभावित इस्तेमाल पर भी जताई चिंता

अजय राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों को देखते हुए यह जांच करना आवश्यक है कि कहीं ऐसे संगठन अथवा वित्तीय नेटवर्क चुनावी दलों के लिए जुटाए गए धन के इस्तेमाल का माध्यम तो नहीं बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले धन का स्रोत, उसका वास्तविक लाभार्थी और उसका इस्तेमाल लोकतांत्रिक पारदर्शिता का विषय है।

उन्होंने जांच में सामने आने वाली महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी भारत निर्वाचन आयोग के साथ साझा करने की मांग की, ताकि आयोग लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की संबंधित धाराओं तथा अपने नियमों और निर्देशों के तहत ऐसे दलों के पंजीकरण और वित्तीय अनुपालन की निगरानी कर सके।

अजय राय ने दोनों पत्रों में जनहित में आवश्यक वैधानिक जांच एवं कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा जताई है।

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