माटीकला महोत्सव-2026 का आगाज, कारीगरों को आधुनिक तकनीक और रोजगार से जोड़ने पर जोर

Matikala Mahotsav-2026 begins, emphasis on connecting artisans with modern technology and employment

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Lucknow, 29 Oct, 2026 08:56 AM

पिछले वर्ष पांच करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री, इस बार नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद

48,048 कारीगर परिवार चिन्हित, 18,432 विद्युत चालित चाक वितरित

लखनऊ, 28 अक्टूबर 2026 (आईपीएन)। 

उत्तर प्रदेश की पारंपरिक माटीकला को आधुनिक तकनीक और रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से खादी भवन में माटीकला महोत्सव-2026 का शुभारंभ किया गया। खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने फीता काटकर महोत्सव का उद्घाटन किया। उन्होंने पिछले वर्ष पांच करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री का उल्लेख करते हुए इस बार बिक्री का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद जताई।

महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर पांच कारीगरों को निःशुल्क विद्युत चालित चाक, दो कारीगरों को पगमिल मशीन और मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना की एक लाभार्थी को दो लाख रुपये के बैंक ऋण का चेक प्रदान किया गया।

48 हजार से अधिक कारीगर परिवार चिन्हित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पारंपरिक शिल्प को आधुनिक तकनीक, कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने पर जोर दे रही है। माटीकला क्षेत्र को संगठित रूप से बढ़ावा देने के लिए 19 जुलाई, 2018 को उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड का गठन किया गया था। बोर्ड के माध्यम से अब तक 48,048 कारीगर परिवारों को चिन्हित किया गया है। कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 39,468 माटीकला कारीगरों को मिट्टी निकासी के पट्टे आवंटित किए गए हैं।

18,432 विद्युत चालित चाक वितरित

कारीगरों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए अब तक 18,432 विद्युत चालित चाक वितरित किए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,740 अतिरिक्त चाक वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मिट्टी गूथने की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए 675 पगमिल मशीनें वितरित की गई हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 300 और मशीनें वितरित करने की योजना है।

इसके अलावा मूर्तियों के निर्माण के लिए 603 जोड़ी पीओपी डाई, पेंटिंग के लिए 31 मशीनें और दीये बनाने के लिए 81 मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इन उपकरणों से कारीगरों को उत्पादन बढ़ाने और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने में मदद मिल रही है।

माटीकला रोजगार योजना से स्थापित हुईं 1,333 इकाइयां

मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत पिछले सात वर्षों में 1,333 लाभार्थियों को ऋण स्वीकृत कराकर माटीकला इकाइयां स्थापित कराई गई हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में मार्च 2027 तक 300 अतिरिक्त इकाइयां स्थापित कराने का लक्ष्य है।

कारीगरों के कौशल विकास के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए हैं। पिछले सात वर्षों में 18,432 लाभार्थियों को आधुनिक उपकरणों के संचालन का तकनीकी प्रशिक्षण, 1,333 को उद्यम संचालन का प्रशिक्षण और 7,836 लाभार्थियों को शिल्पकारी का प्रशिक्षण दिया गया है।

प्रदेश के पीलीभीत, रामपुर, कन्नौज, अमरोहा, बाराबंकी, फिरोजाबाद, बिजनौर, अमेठी, बरेली और जालौन में कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए गए हैं।

पारंपरिक उत्पादों को बाजार से जोड़ने की पहल

मंत्री राकेश सचान ने कहा कि मिट्टी के दीये, खिलौने, मूर्तियां और बर्तन भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं। सरकार का प्रयास है कि इन उत्पादों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बढ़ावा मिले और इनसे जुड़े कारीगरों की आजीविका मजबूत हो।

कुल्हड़, घड़ा, सुराही और मिट्टी के दीये जैसे उत्पाद आज भी अपनी पारंपरिक पहचान बनाए हुए हैं। माटीकला महोत्सव के जरिए कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिलता है। इससे कारीगरों और ग्राहकों के बीच सीधा संपर्क बढ़ाने, पारंपरिक शिल्प को पहचान दिलाने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने में मदद मिलती है।

कारीगरों को चाक, पगमिल और ऋण के चेक वितरित

महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर लखनऊ के शिवा प्रजापति, राम खेलावन, नन्हा, अजय और गायत्री को विद्युत चालित चाक प्रदान किए गए। रमेश कुमार और दिलीप कुमार को पगमिल मशीनें दी गईं। मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत लखनऊ के मुंशीगंज, डालीगंज निवासी श्रेया को दो लाख रुपये के ऋण का चेक प्रदान किया गया।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग तथा सार्वजनिक उद्यम विभाग अनिल सागर और उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के सीईओ शिशिर उपस्थित रहे।

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