योगी सरकार की ओडीओपी योजना से बदली राजन की तकदीर, टेराकोटा ने दिलाई नई पहचान
Yogi government's ODOP scheme changed Rajan's fortunes, terracotta gave him a new identity.
IPN Live
Lucknow, 20 Aug, 2026 07:06 PM‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के विजन को नई उड़ान दे रहा गोरखपुर का टेराकोटा शिल्प
राष्ट्रपति सम्मान से रोजगार सृजन तक, स्थानीय कला से वैश्विक बाजार तक पहुंचे राजन प्रजापति
मिट्टी के शिल्प से खड़ा किया कारोबार, लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार करने वाले सफल उद्यमी बने राजन
25 से अधिक कारीगरों को मिला रोजगार, जीआई टैग और आधुनिक तकनीक से बढ़ी टेराकोटा उत्पादों की मांग
लखनऊ/गोरखपुर, 20 अगस्त (आईपीएन)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार की ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना इसी विजन का प्रमुख आधार बनकर उभरी है। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गोरखपुर के टेराकोटा शिल्पकार राजन प्रजापति की सफलता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं, पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक का मेल किस तरह आर्थिक उन्नति का माध्यम बन सकता है।
लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार करने वाले सफल उद्यमी बने राजन
गोरखपुर के औरंगाबाद, लंगड़ी गुलरिहा गांव निवासी राजन प्रजापति बताते हैं कि उन्होंने अपने पुश्तैनी टेराकोटा शिल्प को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढालकर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। कभी सीमित आय और संसाधनों के बीच संघर्ष करने वाले राजन आज लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार करने वाले सफल उद्यमी बन चुके हैं।
उनकी इकाई में 25 से अधिक कारीगरों को नियमित रोजगार मिला है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
ओडीओपी योजना बनी परिवर्तन का बड़ा माध्यम
राजन प्रजापति के अनुसार योगी सरकार की महत्वाकांक्षी ओडीओपी योजना उनके लिए परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बनी। योजना के तहत आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार तक पहुंच मिलने से उत्पादन क्षमता और उत्पादों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
इलेक्ट्रिक चाक और आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से उनका कारोबार तेजी से बढ़ा। आज उनके टेराकोटा उत्पाद देश के अनेक बड़े शहरों में भेजे जा रहे हैं।
जीआई टैग से टेराकोटा को मिली राष्ट्रीय पहचान
गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों को जीआई टैग मिलने से इस पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है और इसकी बाजार संभावनाएं भी बढ़ी हैं। स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने की नीति ने कारीगरों और उद्यमियों में नया आत्मविश्वास पैदा किया है।
त्योहारों के मौसम में राजन की इकाई से 18 से 24 ट्रक तक टेराकोटा उत्पाद विभिन्न राज्यों में भेजे जाते हैं। बढ़ती मांग ने पारंपरिक कला को आधुनिक कारोबार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राजन प्रजापति की कार्यशाला अब प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित हो चुकी है, जहां युवाओं को टेराकोटा शिल्प की बारीकियां सिखाई जाती हैं। इससे पारंपरिक कला के संरक्षण के साथ युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के विजन को मिल रही नई उड़ान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ का विजन स्थानीय प्रतिभाओं, पारंपरिक उत्पादों और युवा उद्यमियों को नई पहचान देने पर केंद्रित है। राजन प्रजापति जैसे सफल उद्यमी इस बात के प्रमाण हैं कि सही नीति, तकनीक और बाजार का सहयोग मिलने पर प्रदेश का युवा न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा कर सकता है।
ओडीओपी योजना से स्थानीय उत्पादों को मिल रहा वैश्विक मंच
उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों को प्रोत्साहित करना, कारीगरों एवं उद्यमियों की आय बढ़ाना तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।
योजना के तहत प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, वित्तीय सहयोग, आधुनिक उपकरण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के अनेक पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान मिल रही है।
गोरखपुर का टेराकोटा शिल्प भी इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने स्थानीय कला को व्यापक बाजार से जोड़ने के साथ रोजगार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है।
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