गोमती को निर्मल बनाने के लिए योगी सरकार ने तेज की कवायद, सीवेज प्रबंधन का बड़ा एक्शन प्लान तैयार
Yogi government intensifies efforts to clean Gomti river, prepares major action plan for sewage management
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Lucknow, 13 Aug, 2026 06:31 PMड्रोन सर्वे में मिले 12 नए नाले, गोमती में गिर रहे 45 नालों को लेकर होगी कार्रवाई
160, 150 और 65 एमएलडी फ्लो डायवर्जन की योजना, नालों की टैपिंग कर एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा सीवेज
पीपराघाट-घैला में मॉड्यूलर एसटीपी, भरवारा और दौलतगंज प्लांट के अपग्रेडेशन का प्रस्ताव
लखनऊ, 13 अगस्त (आईपीएन)। योगी सरकार ने लखनऊ की जीवनरेखा कही जाने वाली गोमती नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने की दिशा में कवायद तेज कर दी है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गोमती नदी के समेकित पुनरुद्धार के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत नदी में सीधे गिरने वाले नालों की टैपिंग, सीवेज का फ्लो डायवर्जन, एसटीपी की क्षमता बढ़ाने और नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
गोमती में गिरने वाले नालों की स्थिति का पता लगाने के लिए कराए गए ड्रोन सर्वे में 12 नए नाले चिह्नित हुए हैं। नगर निगम के रिकॉर्ड में पहले 33 नालों का उल्लेख था। नए नालों को मिलाकर अब गोमती में गिरने वाले कुल 45 नालों का विवरण सामने आया है। इन नालों से नदी में पहुंच रहे सीवेज को रोककर अलग-अलग एसटीपी से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार की गई है।
45.56 लाख आबादी, 7.52 लाख घर
वर्ष 2026 में लखनऊ नगर की अनुमानित आबादी करीब 45.56 लाख है। शहर में 110 वार्ड और करीब 7.52 लाख घर हैं। इनमें से लगभग 4.01 लाख घर यानी 53.32 प्रतिशत घर सीवरेज नेटवर्क से जुड़े हैं। ऐसे में सीवरेज नेटवर्क का विस्तार करने और नालों के जरिए गोमती में पहुंच रहे प्रदूषित पानी को रोकना नदी संरक्षण के लिए बड़ी चुनौती है।
आंकड़ों के अनुसार लखनऊ में आबादी के सापेक्ष करीब 546.77 एमएलडी घरेलू सीवेज उत्पन्न होता है, जबकि वास्तविक डिस्चार्ज करीब 880.70 एमएलडी है। इसमें लगभग 690.33 एमएलडी सीवेज नालों के माध्यम से और 190.71 एमएलडी सीवर नेटवर्क के जरिए प्रवाहित होता है।
राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह ने कहा कि नदियों को स्वच्छ बनाना सरकार की प्राथमिकता है। नए नालों की पहचान की गई है और उन्हें जल्द शोधित किए जाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे लखनऊ के बड़े हिस्से से गुजरने वाली गोमती नदी के प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
10 एसटीपी, 629.5 एमएलडी शोधन क्षमता
शहर में सीवेज के शोधन के लिए कुल 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित हैं। इनकी कुल शोधन क्षमता करीब 629.5 एमएलडी है। हालांकि वास्तविक डिस्चार्ज और मौजूदा शोधन क्षमता के बीच अंतर बना हुआ है। इसलिए नदी में सीधे पहुंच रहे सीवेज को रोकने के साथ ही उपलब्ध शोधन क्षमता का प्रभावी उपयोग और अतिरिक्त क्षमता विकसित करना जरूरी है।
ड्रोन सर्वे में सामने आए 12 नए नाले
लखनऊ में गोमती नदी करीब 30 किलोमीटर की लंबाई में प्रवाहित होती है। नगर निगम के रिकॉर्ड में पहले नदी में गिरने वाले 33 नालों का विवरण था। ड्रोन सर्वे के बाद 12 नए नाले चिह्नित किए गए। इस तरह कुल 45 नालों की पहचान हुई है।
इन 45 नालों में से 12 नालों से लगभग 75 एमएलडी डिस्चार्ज टैप किया जा चुका है। पांच नालों में टैपिंग की आवश्यकता नहीं पाई गई है। शेष 28 अनटैप्ड एवं आंशिक रूप से टैप्ड नालों का डिस्चार्ज लगभग 260 एमएलडी है।
39 एमएलडी एसटीपी का निर्माण पूरा
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 39 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का निर्माण 4 नवंबर 2024 को पूरा किया गया था। इसके बाद 5 नवंबर 2024 से इसके अनुरक्षण एवं संचालन का कार्य जारी है।
एक अनटैप्ड नाले को टैप कर 3.5 एमएलडी क्षमता वाले बरीकलां एसटीपी में शोधित करने की योजना पर भी काम चल रहा है। इस परियोजना को अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसी तरह दो अनटैप्ड और एक आंशिक रूप से टैप्ड नाले को टैप कर 50 एमएलडी क्षमता वाले लोनियापुरवा एसटीपी से जोड़ने की योजना निर्माणाधीन है। इस परियोजना को जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
160, 150 और 65 एमएलडी फ्लो डायवर्जन की योजना
गोमती के पुनरुद्धार के लिए तैयार प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (पीएफआर) में शेष नालों को विभिन्न एसटीपी से जोड़कर सीवेज का शोधन कराने का प्रस्ताव है।
इसके तहत 28 अनटैप्ड एवं आंशिक रूप से टैप्ड नालों को टैप करने के लिए 160 एमएलडी बसंतकुंज, 65 एमएलडी वजीरगंज, 150 एमएलडी जियामऊ और 65 एमएलडी नीलमथा में एसटीपी निर्माण की कार्ययोजना प्रस्तावित है।
इसके अलावा मस्तेमऊ नाले पर नेचर बेस्ड तकनीक के माध्यम से सीवेज शोधन, पीपराघाट में 750 केएलडी और घैला में 100 केएलडी क्षमता के मॉड्यूलर एसटीपी स्थापित करने की योजना है।
भरवारा और दौलतगंज एसटीपी होंगे अपग्रेड
कार्ययोजना में भरवारा एसटीपी के अपग्रेडेशन के साथ उससे जुड़े 19 नालों की आवश्यक मरम्मत भी शामिल है। इसी प्रकार दौलतगंज एसटीपी के अपग्रेडेशन और उससे जुड़े दो नालों की आवश्यक मरम्मत का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।
इन सभी कार्यों का उद्देश्य नालों के जरिए गोमती में पहुंच रहे सीवेज को रोककर उसे वैज्ञानिक तरीके से शोधित करना है, जिससे नदी में प्रदूषण का स्तर कम किया जा सके।
एनएमसीजी को भेजी जा चुकी है पीएफआर
गोमती नदी के समेकित पुनरुद्धार की इस कार्ययोजना की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट 6 मई 2026 को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), नई दिल्ली को भेजी जा चुकी है।
प्रस्तावित कार्यों के क्रियान्वयन के बाद ओवरफ्लो हो रहे और अनटैप्ड नालों की टैपिंग की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। नए एसटीपी, मौजूदा प्लांटों के अपग्रेडेशन, फ्लो डायवर्जन और नालों की टैपिंग के जरिए गोमती में सीधे पहुंचने वाले सीवेज को रोकने की योजना है। इससे लखनऊ में गोमती नदी के प्रदूषण को कम करने और उसके पुनरुद्धार की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है।
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