पिछड़े वर्गों के पारंपरिक हुनर को मिलेगा नया मुकाम, ‘श्री अन्न कला बोर्ड’ के गठन पर मंथन
Traditional skills of backward classes will get a new platform, brainstorming on the formation of 'Shri Anna Kala Board'
IPN Live
Lucknow, 20 Aug, 2026 01:02 AMभुर्जी, भोजवाल और भड़भूजा समाज के सशक्तीकरण की पहल, पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण, ऋण, सब्सिडी और बाजार से जोड़ने की तैयारी
लखनऊ, 19 अगस्त (आईपीएन)। उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्गों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने महत्वपूर्ण पहल की है। आयोग की मासिक बैठक में पारंपरिक रूप से अनाज भूनने वाले भुर्जी, भोजवाल और भड़भूजा समाज के कारीगरों के हितों को ध्यान में रखते हुए ‘श्री अन्न कला बोर्ड’ के गठन के प्रस्ताव पर विस्तार से मंथन किया गया।
प्रस्तावित बोर्ड का उद्देश्य पारंपरिक हुनर से जुड़े लोगों को संस्थागत संरक्षण देने के साथ उन्हें आधुनिक तकनीक, कौशल प्रशिक्षण, आसान ऋण, सब्सिडी और बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। इस पहल को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और एक जनपद, एक उत्पाद (ODOP) जैसी योजनाओं से जोड़कर पारंपरिक स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की संभावना भी तलाशी जा रही है।
पारंपरिक हुनर को मिलेगा संस्थागत संरक्षण
लखनऊ स्थित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने की। बैठक में एसके सिंघानिया के पत्र पर विचार करते हुए भुर्जी, भोजवाल और भड़भूजा समाज के लोगों के लिए श्री अन्न कला बोर्ड के गठन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई।
प्रस्ताव के तहत पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े कारीगरों को उनके हुनर के संरक्षण के साथ खाद्य प्रसंस्करण से जोड़ने, कौशल विकास को बढ़ावा देने, आसान ऋण एवं सब्सिडी उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों के लिए बाजार विकसित करने की दिशा में काम किए जाने की संभावना है।
आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ने की तैयारी
आयोग की बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े कारीगरों को केवल संरक्षण तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक और बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाए। इससे पारंपरिक अनाज एवं खाद्य उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता और मार्केटिंग के माध्यम से नए बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है।
बोर्ड के गठन की परिकल्पना से पारंपरिक हुनर को रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने तथा संबंधित समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की उम्मीद है।
चार राज्यों से जुटाई जाएगी जानकारी
बैठक में विश्वकर्मा एकीकरण अभियान संस्था की ओर से विश्वकर्मा समाज की सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करने संबंधी पत्र पर भी विचार किया गया। विश्वकर्मा कल्याण आयोग/विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के गठन को लेकर मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और हरियाणा से जानकारी जुटाकर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया।
इसके लिए आयोग के सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित राज्यों में संचालित व्यवस्थाओं, उनके स्वरूप और कार्यप्रणाली की जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा कि आयोग में अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित प्राप्त शिकायतों का त्वरित निस्तारण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेष रूप से पिछड़ा वर्ग के पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए आयोग प्रतिबद्ध है।
उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष सूर्य प्रकाश पाल, उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली सहित आयोग के सदस्य मौजूद रहे।
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