ज्योतिष सरीखी भारतीय विधाओं का दुनिया मान रही है लोहा : डा. दिनेश शर्मा

The world is acknowledging the power of Indian disciplines like astrology: Dr. Dinesh Sharma

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Lucknow, 24 Aug, 2026 12:33 AM
ज्योतिष सरीखी भारतीय विधाओं का दुनिया मान रही है लोहा : डा. दिनेश शर्मा
विदेशों में भी बढ़ रहा है ज्योतिष के प्रति आकर्षण, ज्योतिष को आत्मचिंतन, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण का माध्यम बनाने पर जोर

ज्योतिष की विधाओं पर शोध की जरूरत, डिजिटल युग में बदल रहा है इसका स्वरूप

पीएम मोदी के समय में भारत की ज्ञान परंपराओं का हो रहा है विस्तार

कानपुर, 23 अगस्त 2026 (आईपीएन)। राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि ज्योतिष सरीखी भारत की प्राचीन ज्ञान विधाओं का दुनिया लोहा मान रही है। ज्योतिष भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण अंग होने के साथ-साथ खगोलीय गणनाओं से भी जुड़ा हुआ है। ज्योतिष और विज्ञान जब एक-दूसरे के पूरक बनकर कार्य करते हैं, तब भारत की ज्ञान परंपरा का दुनिया में परचम लहराता है। आज दुनिया के अन्य देशों में भी ज्योतिष के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है।

डॉ. शर्मा कानपुर के गुजैनी स्थित दुर्गा प्रसाद विद्यानिकेतन में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित के.एम. दुबे ‘पद्मेश’ द्वारा आयोजित 76वें राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन-2026 एवं सौमित्र दुबे विद्वत शिखर सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में देशभर से आए विद्वान ज्योतिषाचार्यों एवं मनीषियों ने हिस्सा लिया।

उन्होंने कहा कि ज्योतिष को केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं, बल्कि व्यक्ति को आत्मचिंतन, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करने का माध्यम बनाया जाना चाहिए। सही ज्ञान रखने वाला ज्योतिष भय उत्पन्न कर आर्थिक लाभ लेने का साधन नहीं बनाता। जब कुछ लोग भय और भ्रम पैदा कर इसे आर्थिक लाभ का माध्यम बनाते हैं तो यह ज्योतिष का दुरुपयोग है।

आस्था के साथ शोध और तर्क भी जरूरी

डॉ. शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में ज्योतिष और विज्ञान को लेकर बहस होती रहती है, लेकिन दोनों का अपने-अपने स्थान पर महत्व है। परंपराओं पर गर्व के साथ उनके अध्ययन में तर्क और शोध की कसौटी को स्वीकार किया जाना चाहिए। आस्था के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान भी साथ चलना चाहिए।

उन्होंने ज्योतिष की विभिन्न विधाओं पर व्यापक शोध की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि शोध से सामने आने वाले नए ज्ञान का दस्तावेजीकरण और उसका व्यापक प्रसार होना चाहिए। भारत के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक पद्धतियों से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान एवं परंपराओं के अध्ययन और प्रोत्साहन के लिए भी व्यवस्था की गई है।

डिजिटल युग में बदल रहा ज्योतिष का स्वरूप

राज्यसभा सांसद ने कहा कि डिजिटल युग में ज्योतिष का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और यह परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। पंचांग, कुंडली सहित ज्योतिष से जुड़ी तमाम जानकारियां अब डिजिटल माध्यमों से लोगों तक पहुंच रही हैं। ऐसे में ऑनलाइन ज्योतिष के क्षेत्र में पारदर्शिता, विशेषज्ञता और नैतिक मानकों का पालन बेहद जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा कि ज्योतिष में कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक का प्रयोग पूरी सतर्कता के साथ किया जाना चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी असावधानी भी बड़े भ्रम का कारण बन सकती है। ज्योतिष को सरल और सहज बनाकर दुनिया के हर कोने तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

ज्ञान परंपरा के संरक्षण के साथ विस्तार जरूरी

डॉ. शर्मा ने कहा कि कानपुर औद्योगिक नगरी होने के साथ-साथ शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। भारत की ज्ञान परंपरा के अनेक स्वरूप हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समय में भारतीय ज्ञान परंपराएं केवल संग्रहालयों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि उनका विस्तार भी हो रहा है। वर्तमान सरकार के प्रयासों से भारत की ज्ञान परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ उनके दस्तावेजीकरण और आधुनिक संदर्भों में उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित वरिष्ठ ज्योतिषाचार्यों से अपील की कि वे अपने शिष्य तैयार करें और उन्हें अपना ज्ञान प्रदान करें। इससे यह ज्ञान आने वाली कई पीढ़ियों तक पहुंच सकेगा। उन्होंने कहा कि ज्योतिष को आधुनिक उपयोगिता के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है और लोगों का इस विद्या के प्रति भरोसा मजबूत होना चाहिए।

डॉ. शर्मा ने कहा कि ज्योतिष आदि काल से चली आ रही ज्ञान परंपरा है। प्रयास यह होना चाहिए कि यह अंधविश्वास का कारण न बने, बल्कि लोगों को आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और जीवन में अनुशासन की प्रेरणा देने वाली विधा के रूप में विकसित किया जाए।

विद्वानों के योगदान को सराहा

इस अवसर पर ज्योतिष, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में विद्वानों के महत्वपूर्ण योगदान पर भी प्रकाश डाला गया।

सम्मेलन में भाजपा अध्यक्ष शिवराम, भाजपा कानपुर उपाध्यक्ष शशांक मिश्रा, आचार्य इंदु प्रकाश मिश्र (इंडिया टीवी), डॉ. सतीश शर्मा (राजस्थान), प्रो. पवन सिन्हा (आजतक टीवी), के. लेखराज शर्मा (हिमाचल प्रदेश), डॉ. हेमचंद्र पाण्डेय (भोपाल), आचार्य रमेश सेमवाल, आचार्य शैलेन्द्र पाण्डेय (आजतक टीवी), पं. राहुल राज, आचार्य सुभेश शर्मा, डॉ. घनश्याम ठाकुर, आचार्य अविनाश राय, पं. आर.के. शर्मा, वास्तुविद अंकिता झुनझुनवाला, डॉ. संजीव श्रीवास्तव, आचार्य आनंद पाण्डेय एवं पं. पंकज त्रिवेदी उपमन्यु सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बबन शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता विजय सोनी सहित अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के आयोजक आचार्य के.एम. दुबे ‘पद्मेश’ एवं सिद्धार्थ दुबे ने सभी अतिथियों और विद्वानों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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