अयोध्या का वैभव सात समंदर पार, मॉस्को में गूंजी रामराज्य की अवधारणा
The splendor of Ayodhya spread across the seven seas, the concept of Ramrajya resonated in Moscow
IPN Live
Lucknow, 20 Oct, 2026 02:10 AM'रूसी राम' पेचनिकोव की 100वीं जयंती पर भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों को किया गया याद
लखनऊ, 19 अक्टूबर 2026 (आईपीएन)। उत्तर प्रदेश में अयोध्या के व्यापक विकास और भगवान श्रीराम की सांस्कृतिक विरासत की गूंज अब सात समंदर पार रूस तक पहुंच चुकी है। रूस की राजधानी मॉस्को में सोवियत रंगमंच के प्रसिद्ध अभिनेता और 'रूसी राम' के नाम से विख्यात गेनादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की 100वीं जयंती पर आयोजित समारोह में रूसी कलाकारों, बुद्धिजीवियों और प्रवासी भारतीयों ने भगवान राम के आदर्शों, रामराज्य की अवधारणा तथा भारत-रूस के सांस्कृतिक संबंधों पर विस्तार से चर्चा की।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या का स्वरूप तेजी से बदला है और आज यह विश्वभर में भारतीय संस्कृति एवं आस्था का प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दीपोत्सव के दौरान अयोध्या जगमगा उठती है, उसी प्रकार मॉस्को में भी रामलीला और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से भारतीय परंपराओं की झलक प्रस्तुत की जाएगी।
अयोध्या के विकास की रूस में चर्चा
मॉस्को बाल रंगमंच की निदेशक अल्ला लियोनिदोव्ना ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या में किए गए विकास कार्यों ने विश्व का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भगवान राम के आदर्शों और मानवीय मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है भारतीय संस्कृति से जुड़ने की उत्सुकता बढ़ी है।
पिता ने सांस्कृतिक रिश्तों को दी नई ऊंचाई : तात्याना
गेनादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की पुत्री तात्याना पेचनिकोव ने कहा कि उनके पिता ने भगवान राम की भूमिका निभाकर रूसी समाज को भारतीय संस्कृति, रामायण और भारतीय जीवन मूल्यों से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में हुए विकास और बढ़ती वैश्विक पहचान ने भगवान राम से जुड़े सांस्कृतिक विमर्श को और मजबूत किया है। उनके अनुसार पेचनिकोव का योगदान दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।
रूस को रामराज्य से परिचित कराने में अहम भूमिका
मॉस्को के एर्शोव थिएटर संस्थान के वीसी बिताली एवगेनिविच दाशिंस्की ने कहा कि पेचनिकोव ने अपने अभिनय के जरिए रूस के लोगों को भगवानस्कृतिक संवाद को भी नई दिशा दी।
नई पीढ़ी तक पहुंच रहे भगवान राम के आदर्श
एर्शोव थिएटर संस्थान की रेक्टर अलेक्जेंड्रा कोनेवा ने कहा कि भगवान राम का जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि रंगमंच और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय दर्शन, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से परिचित कराया जा सकता है।
'रूसी राम' के रूप में बनाई अलग पहचान
रामलीला निर्माता एवं निर्देशक डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि गेनादी मिखाइलोविच पेचनिकोव सोवियत रंगमंच के प्रतिष्ठित कलाकारों में गिने जाते थे। भगवान राम की भूमिका के उनके प्रभावशाली अभिनय ने उन्हें रूस में 'रूसी राम' के रूप में विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि पेचनिकोव ने रामायण और भारतीय संस्कृति को लोकप्रिय बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया, जिसे उनकी जन्मशताब्दी पर आयोजित समारोह में विशेष रूप से याद किया गया।
समारोह में रूसी कलाकारों, शिक्षाविदों, सांस्कृतिक हस्तियों और प्रवासी भारतीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। वक्ताओं ने कहा कि भगवान राम के आदर्श आज भी भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
हैशटैग
#Ayodhya #RamMandir #Russia #Moscow #RussianRam #GennadyPechenikov #RamLeela #IndiaRussiaRelations #CulturalDiplomacy #YogiAdityanath #AyodhyaDevelopment #IndianCulture #RamRajya #UPNews #InternationalNews #IPNNews #अयोध्या #रामराज्य #रूस #मॉस्को #भारतीय_संस्कृति #रामलीला #भारत_रूस_संबंध #योगी_आदित्यनाथ #अयोध्या_विकास #आईपीएन_न्यूज

No Previous Comments found.