जल संकट का समाधान समाज की सोच और संस्कारों में बदलाव से निकलेगा : सुनील आम्बेकर
The solution to the water crisis will come from a change in the thinking and values of the society: Sunil Ambekar
IPN Live
Lucknow, 26 Oct, 2026 02:38 AMराष्ट्रधर्म के विशेषांक ‘जल है तो कल है’ का विमोचन, जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने पर जोर
लखनऊ, 26 अक्टूबर 2026 (आईपीएन)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर ने कहा कि जल संकट का समाधान केवल सरकारी योजनाओं और तकनीकी उपायों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज की सोच, संस्कार और जीवनशैली में बदलाव लाना होगा। जल को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का आधार मानकर उसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। भारतीय संस्कृति की दृष्टि से ही जल संकट के स्थायी समाधान का रास्ता निकलेगा।
सुनील आम्बेकर रविवार को लखनऊ स्थित भागीदारी भवन में राष्ट्रधर्म मासिक पत्रिका के विशेषांक ‘जल है तो कल है’ के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जल संकट केवल पानी की कमी का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारे व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। मनुष्य सृष्टि का स्वामी नहीं, बल्कि उसका अभिन्न अंग है। इसलिए विकास योजनाओं में मनुष्य के साथ पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देनी होगी।
जखनी और हिवरे बाजार से सीखें जल संरक्षण का मॉडल
आम्बेकर ने बुंदेलखंड के जखनी और महाराष्ट्र के हिवरे बाजार का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानीय लोगों की भागीदारी और निरंतर प्रयासों से जल संकट का समाधान संभव है। इन गांवों के अनुभव बताते हैं कि सामुदायिक सहभागिता के जरिए जल संरक्षण को प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से अपने क्षेत्रों में ऐसी पहल करने और सफल मॉडलों को दूसरे गांवों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि पानी किसी एक राज्य, वर्ग या समूह का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र से जुड़ा प्रश्न है। इसका समाधान आपसी संघर्ष से नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी निभाने से निकलेगा। शहरों की योजना बनाते समय पानी की उपलब्धता, वर्षा, जनसंख्या और प्राकृतिक संसाधनों की क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। अनियोजित शहरीकरण और संसाधनों के अत्यधिक दोहन से जल संकट बढ़ता है। आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के हितों की रक्षा भी आवश्यक है।
जल संरक्षण के लिए समाज को आगे आना होगा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने कहा कि जल संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं छोड़ी जा सकती। समाज को आगे आकर सामूहिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों को पुनर्जीवित करने और इस विषय से जुड़े साहित्य को गांवों, ग्राम पंचायतों तथा आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
पद्मश्री डॉ. पोपटराव पवार ने महाराष्ट्र के हिवरे बाजार का उदाहरण देते हुए बताया कि जल प्रबंधन, फसल नियोजन और सामुदायिक अनुशासन से सूखे की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पानी की उपलब्धता के अनुसार खेती, चराईबंदी, कुल्हाड़बंदी और नशाबंदी जैसे सामूहिक प्रयासों ने गांव में सकारात्मक बदलाव लाने में भूमिका निभाई। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण योजना तैयार करने और ग्रामसभा की भागीदारी से उसे लागू करने की आवश्यकता बताई।
राष्ट्रधर्म के विशेषांक में जल संरक्षण के सफल प्रयोग
राष्ट्रधर्म के संपादक अशोक वाजपेयी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंच परिवर्तन में पर्यावरण संरक्षण महत्वपूर्ण विषय है और जल संरक्षण इसका अभिन्न हिस्सा है। इसी उद्देश्य से ‘जल है तो कल है’ विशेषांक तैयार किया गया है। इसमें जल से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक विचारों, पारंपरिक संरक्षण प्रणालियों, मौजूदा चुनौतियों और देश के विभिन्न हिस्सों में हुए सफल प्रयासों को शामिल किया गया है। विशेषांक का उद्देश्य जल संकट पर देशव्यापी चर्चा को प्रोत्साहित करना और पारंपरिक ज्ञान व सफल मॉडलों को व्यापक स्तर पर अपनाने की दिशा में प्रयास करना है।
कार्यक्रम का संचालन संपादक मंडल के सदस्य डॉ. अनुज मिश्रा ने किया, जबकि प्रभारी निदेशक सर्वेशचंद्र द्विवेदी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य सुरेश सोनी की पुस्तक ‘हमारी सांस्कृतिक विचारधारा के मूल सूत’ के सातवें संस्करण का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में प्रान्त प्रचारक कौशल, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष, राष्ट्रधर्म के निदेशक एवं सहक्षेत्र प्रचार प्रमुख मनोज कांत, राज्य सूचना आयुक्त पी.एन. द्विवेदी, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बी.एन. सिंह, प्रान्त सम्पर्क प्रमुख गंगा सिंह, प्रान्त प्रचार प्रमुख अशोक कुमार दुबे, वरिष्ठ प्रचारक अशोक केडिया, डॉ. हरनाम सिंह, देवेंद्र अस्थाना, प्रशांत भाटिया, विभाग प्रचारक अनिल, डॉ. ओम प्रकाश सिंह, राजकिशोर सहित राष्ट्रधर्म से जुड़े पदाधिकारी, लेखक और अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
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