लखनऊ के विकास के लिए महापौर ने मांगे 7,603 करोड़ रुपये, छठे राज्य वित्त आयोग के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें

The Mayor has demanded Rs 7,603 crore for the development of Lucknow and placed five key demands before the Sixth State Finance Commission.

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Lucknow, 14 Oct, 2026 07:20 PM
लखनऊ के विकास के लिए महापौर ने मांगे 7,603 करोड़ रुपये, छठे राज्य वित्त आयोग के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें

नगर निगम का क्षेत्रफल 310 से बढ़कर 568 वर्ग किलोमीटर हुआ, विस्तारित और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के लिए अतिरिक्त बजट की मांग

लखनऊ, 14 अक्टूबर 2026 (आईपीएन)। लखनऊ नगर निगम की महापौर सुषमा खर्कवाल ने राजधानी के विस्तारित क्षेत्रों और गोमती नदी से सटे बाढ़ प्रभावित इलाकों के विकास के लिए छठे राज्य वित्त आयोग से 7,603 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने नगर निकायों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में जनसंख्या के साथ क्षेत्रफल, आधारभूत सुविधाओं की कमी और स्थानीय निकायों की वास्तविक जिम्मेदारियों को भी आधार बनाने पर जोर दिया।

होटल ताज, लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश मेयर्स फोरम ऑन सिक्स्थ स्टेट फाइनेंस कमीशन के कार्यक्रम ‘लिसनिंग टू सिटीज, सॉल्विंग अर्बन चैलेंजेज’ में महापौर ने नगर निगम की वित्तीय आवश्यकताओं और राजधानी की विशेष जिम्मेदारियों को विस्तार से रखा। कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष दीपक कुमार, आयोग के सदस्य, विभिन्न शहरों के महापौर और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

83 प्रतिशत से अधिक बढ़ा नगर निगम का क्षेत्रफल

महापौर ने बताया कि लखनऊ नगर निगम का क्षेत्रफल लगभग 310 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 568 वर्ग किलोमीटर हो गया है। क्षेत्रफल में 83 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ नए इलाकों में सड़क, नाली, जलनिकासी, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छता, पार्क, पेयजल और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि नगर निगम की सीमा में नए क्षेत्रों को शामिल करने के बाद वहां के नागरिकों को भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। इसके लिए क्षेत्र विस्तार के अनुरूप वित्तीय संसाधन मिलने चाहिए, ताकि शहर के केंद्र से लेकर अंतिम छोर तक बसे मोहल्लों में विकास कार्य कराए जा सकें।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए भी धनराशि की जरूरत

महापौर ने गोमती नदी से सटे बाढ़ प्रभावित इलाकों में आधारभूत संरचनाओं को हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए पुनर्निर्माण, जलनिकासी और नागरिक सुविधाओं की बहाली के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

नगर निगम के प्रस्तुत प्रतिवेदन में विस्तारित क्षेत्रों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए लगभग 7,603 करोड़ रुपये की वित्तीय आवश्यकता का आकलन किया गया है। महापौर ने आयोग से इस आवश्यकता को ध्यान में रखकर सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।

वित्तीय संसाधनों के लिए आयोग के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें

महापौर ने नगर निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने के लिए पांच प्रमुख मांगें रखीं।

1. नगर निगम का वित्तीय अंश दोगुना हो: पिछले 15 वर्षों में जनसंख्या और क्षेत्रफल में हुई वृद्धि को देखते हुए पूर्व आयोग द्वारा निर्धारित वित्तीय अंश को दोगुना करने का आग्रह किया।

2. विकास और मार्ग प्रकाश के लिए 2,184 करोड़ रुपये: विस्तारित क्षेत्रों में विकास कार्यों, मार्ग प्रकाश व्यवस्था और प्रशासनिक व्यय के लिए आकलित 2,184 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की मांग की।

3. पेयजल और सीवर व्यवस्था के लिए 5,825.85 करोड़ रुपये: जलकल विभाग द्वारा विस्तारित क्षेत्रों में पेयजल और सीवर सुविधाओं के विकास के लिए आकलित 5,825.85 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

4. स्टाम्प ड्यूटी की पूरी दो प्रतिशत धनराशि मिले: नगर निगम के विकास कार्यों के लिए निर्धारित दो प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी की पूरी धनराशि नगर निगम को उपलब्ध कराने की मांग की।

5. कर संबंधी छूट से होने वाली राजस्व हानि की भरपाई हो: UPSIDA की संपत्तियों को कर के दायरे से बाहर रखने और कुछ श्रेणियों की संपत्तियों के कर निर्धारण में छूट से नगर निगम के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने ऐसी व्यवस्थाओं से होने वाली राजस्व हानि की उचित भरपाई करने का आग्रह किया।

राजधानी की विशेष जिम्मेदारियों के लिए अतिरिक्त सहायता की मांग

महापौर ने कहा कि राजधानी होने के कारण लखनऊ में कर्मचारी, विद्यार्थी, मरीज, व्यापारी, पर्यटक और अन्य लोग प्रतिदिन आते हैं। वीआईपी आवागमन, राज्यस्तरीय कार्यक्रमों, विशेष स्वच्छता व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर भी नगर निगम को अतिरिक्त व्यय करना पड़ता है। इन सुविधाओं का लाभ प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले नागरिकों को भी मिलता है।

उन्होंने आयोग से लखनऊ की विशेष जिम्मेदारियों को देखते हुए अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने पर विचार करने का आग्रह किया। साथ ही, मोटर वाहन कर जैसे उपयुक्त राज्य करों में नगर निकायों की न्यायसंगत हिस्सेदारी और स्वीकृत अनुदानों का समयबद्ध हस्तांतरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

निर्माण के साथ रखरखाव के लिए भी नियमित बजट जरूरी

महापौर ने कहा कि नगर निकायों को नई आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के साथ उनके रखरखाव के लिए भी नियमित धनराशि मिलनी चाहिए। सड़कों, नालियों, पार्कों, स्ट्रीट लाइट और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखने के लिए नियमित बजट आवश्यक है।

नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए उन्होंने संपत्ति कर व्यवस्था में सुधार, जीआईएस सर्वेक्षण के माध्यम से कर के दायरे से बाहर रह गई संपत्तियों को शामिल करने, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और नगर निगम की भूमि, बाजारों तथा अन्य परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग जैसे उपायों का भी उल्लेख किया।

महापौर ने कहा कि नगर निकायों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप पर्याप्त वित्तीय संसाधन और अधिकार मिलने चाहिए, जिससे नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

हर वार्ड और मोहल्ले तक विकास पहुंचाने पर जोर

महापौर ने कहा कि नगर निगम की मांग किसी विशेषाधिकार के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों और उपलब्ध संसाधनों के बीच उचित संतुलन स्थापित करने के लिए है। लखनऊ के प्रत्येक वार्ड, विस्तारित क्षेत्र और बाढ़ प्रभावित इलाके में विकास कार्यों को गति देने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता जरूरी है।

उन्होंने विश्वास जताया कि छठा राज्य वित्त आयोग नगर निकायों की वास्तविक आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक संस्तुतियां करेगा। इससे लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में आधारभूत सुविधाओं के विकास को गति मिल सकेगी।

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