योगी सरकार में राजस्व वादों के त्वरित निस्तारण को मिली रफ्तार, लाखों मामलों का हुआ निपटारा
Speedy disposal of revenue disputes gains momentum under Yogi government, lakhs of cases settled
IPN Live
Lucknow, 13 Aug, 2026 09:27 PMधारा-24, 34 और 80 के मामलों में तेजी, नामांतरण के 2.21 लाख से अधिक वाद विशेष अभियान में निस्तारित
भू-उपयोग परिवर्तन के 49,855 और कुर्रा-बंटवारा के 22,451 वादों का हुआ निस्तारण
लखनऊ, 13 अगस्त (आईपीएन)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की त्वरित न्याय और जनसमस्याओं के प्रभावी निस्तारण की नीति के तहत राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण की प्रक्रिया में तेजी आई है। शासन स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग और विशेष अभियानों के जरिए पुराने एवं लंबित मामलों के निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप धारा-24, धारा-34 और धारा-80 सहित विभिन्न राजस्व मामलों के निस्तारण में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
धारा-24 के 39,645 वादों का निस्तारण
सीमांकन और पैमाइश से संबंधित धारा-24 के तहत 31 दिसंबर 2025 तक प्रदेश में 28,556 वाद विचाराधीन थे। इसके बाद 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच 91,472 नए वाद आए, जिनमें से 39,645 वादों का निस्तारण किया गया।
वर्तमान में धारा-24 के तहत 80,383 वाद विचाराधीन हैं। इनमें पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित वादों की संख्या महज 24 है। धारा-24 के तहत सबसे अधिक विचाराधीन वादों वाले जिलों में प्रयागराज, प्रतापगढ़, लखनऊ, अमेठी और मथुरा शामिल हैं।
धारा-34 में विशेष अभियान से 2.21 लाख से अधिक वाद निस्तारित
नामांतरण और दाखिल-खारिज से संबंधित धारा-34 के मामलों में भी बड़े स्तर पर निस्तारण किया गया है। 31 दिसंबर 2025 तक 48,910 वाद विचाराधीन थे। 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच कुल 14,70,133 वाद आए, जिनमें से 10,96,814 वादों का निस्तारण किया गया।
इसके अलावा 45 दिन से अधिक समय से लंबित नामांतरण वादों के निस्तारण के लिए 15 से 25 जून 2026 तक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान ही 2,21,667 वादों का निस्तारण किया गया।
भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों में भी तेजी
धारा-80 के तहत भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े मामलों के निस्तारण में भी तेजी आई है। 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच धारा-80 के तहत 28,797 वाद आए, जबकि इस अवधि में 49,855 वादों का निस्तारण किया गया।
खास बात यह है कि धारा-80 के तहत पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित वादों की संख्या शून्य दर्ज की गई है। इससे पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने की सरकार की नीति का असर दिखाई देता है।
धारा-116 के कुर्रा-बंटवारा वादों का भी निस्तारण
कुर्रा-बंटवारा से संबंधित धारा-116 के मामलों में भी निस्तारण की प्रक्रिया को गति दी गई है। इस अवधि में 22,451 वादों का निस्तारण किया गया है। इससे भूमि संबंधी विवादों के समाधान में तेजी आने और आमजन को राजस्व न्यायालयों से समयबद्ध राहत मिलने की उम्मीद है।
पुराने मामलों के निस्तारण पर विशेष जोर
योगी सरकार द्वारा राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शासन स्तर से नियमित समीक्षा, विशेष अभियान और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग के जरिए मामलों की प्रगति पर नजर रखी जा रही है।
सरकार का उद्देश्य राजस्व संबंधी विवादों के निस्तारण में अनावश्यक देरी को कम करना, आमजन को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना और राजस्व न्यायालयों की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं सुगम बनाना है। विशेष अभियानों के जरिए बड़ी संख्या में वादों के निस्तारण से भूमि, नामांतरण, दाखिल-खारिज, भू-उपयोग परिवर्तन और बंटवारे से जुड़े मामलों में लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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