पश्चिमी हिमालय में ग्लेशियरों का तीव्र क्षरण और झीलों का विस्तार, बाढ़ का बढ़ता खतरा

Rapid Glacier Retreat and Lake Expansion in the Western Himalayas: The Growing Threat of Floods

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Lucknow, 30 Mar, 2026 12:54 AM
पश्चिमी हिमालय में ग्लेशियरों का तीव्र क्षरण और झीलों का विस्तार, बाढ़ का बढ़ता खतरा

लखनऊ, (आईपीएन)। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में हिमालयी ग्लेशियरों के तेज़ी से पिघलने और क्षेत्र में ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न बाढ़ के बढ़ते खतरे को उजागर किया गया है।

इस शोध का नेतृत्व डॉ. विनीत कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, भूविज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय एवं पूर्व वैज्ञानिक-डी, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (WIHG) ने किया। उनके साथ डॉ. मनीष मेहता (वैज्ञानिक-ई, WIHG) तथा डॉ. अजय सिंह राणा (पूर्व पीएचडी शोधार्थी, WIHG) भी शामिल रहे। यह शोध अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित जर्नल Progress in Physical Geography: Earth and Environment में प्रकाशित हुआ है।

अध्ययन में ज़ांस्कर के पदम घाटी स्थित पदम ग्लेशियर का अध्ययन किया गया तथा इसकी तुलना निकटवर्ती नातियो नाला ग्लेशियर से की गई। वैज्ञानिकों ने पाया कि झील से जुड़े (lake-terminating) पदम ग्लेशियर का क्षरण, भूमि-आधारित (land-terminating) नातियो नाला ग्लेशियर की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से हो रहा है।

1993 से 2022 के बीच पदम ग्लेशियर में उल्लेखनीय पीछे हटना (retreat) दर्ज किया गया और इसके क्षेत्रफल में बड़ी कमी आई, जबकि नातियो नाला ग्लेशियर में अपेक्षाकृत धीमे परिवर्तन देखे गए। अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि पदम ग्लेशियर के अग्रभाग पर स्थित ग्लेशियल झील (पदम झील) का आकार लगभग 69% तक बढ़ गया है।

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार तेजी से बढ़ने वाली झीलें ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का जोखिम बढ़ाती हैं, जो अचानक आने वाली बाढ़ होती हैं और निचले क्षेत्रों में भारी विनाश का कारण बन सकती हैं।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि दोनों ग्लेशियरों की गति धीमी हो रही है तथा वे बर्फ (ice mass) खो रहे हैं, हालांकि झील से जुड़े और भूमि-आधारित ग्लेशियरों के व्यवहार में अंतर देखा गया।

डॉ. विनीत कुमार के अनुसार, ये निष्कर्ष हिमालयी ग्लेशियरों पर जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव को दर्शाते हैं। उन्होंने संभावित जोखिमों को कम करने के लिए ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निरंतर निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया।

यह अध्ययन वैश्विक स्तर पर उपलब्ध प्रमाणों को और सशक्त करता है कि ग्लेशियरों का क्षरण जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है और भविष्य में पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले संवेदनशील समुदायों के लिए एक चेतावनी है।

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