गो संरक्षण में अब ‘जेन जी’ की एंट्री, गांव-गांव तैयार होंगे 10 हजार ‘गो मित्र’
Now 'Gen Ji' enters the cow protection sector, 10,000 'Go Mitras' will be prepared in every village.
IPN Live
Lucknow, 17 Aug, 2026 04:22 AMलखनऊ, 16 अगस्त (आईपीएन)। योगी सरकार प्रदेश के गो संरक्षण अभियान से अब नई पीढ़ी, खासकर जेन जी को जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके तहत गांव-गांव अभियान चलाकर युवाओं को गोवंश संरक्षण, गो सेवा और इसके सामाजिक एवं आर्थिक महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए करीब 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार किए जाएंगे।
अभियान के तहत पहले मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे, जो आगे अन्य लोगों को प्रशिक्षण देंगे। गो संरक्षण और गो सेवा में पहले से रुचि रखने वाले लोगों को इसमें प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, हरित ऊर्जा और रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता का मॉडल विकसित करने पर भी जोर दे रही है।
बच्चों और युवाओं तक पहुंचेगा गो संरक्षण का संदेश
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो संरक्षण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। नई पहल में बच्चों और युवाओं को गो संरक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर रहेगा।
गांवों में अभियान चलाकर नई पीढ़ी को देसी गोवंश, गो सेवा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय की भूमिका के बारे में जानकारी दी जाएगी। उद्देश्य युवाओं को गो संरक्षण के पर्यावरणीय और आर्थिक पहलुओं से परिचित कराना है।
अभियान के लिए तैयार किए जाने वाले मास्टर ट्रेनर आगे अन्य लोगों को प्रशिक्षित करेंगे। इससे गांव-गांव प्रशिक्षित लोगों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
7,500 से अधिक गो आश्रय स्थलों में 12 लाख से ज्यादा गोवंश
प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। सरकार के अनुसार राज्य में 7,500 से अधिक गो आश्रय स्थल विकसित किए गए हैं, जहां 12 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं।
गोवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ किसानों की फसलों को निराश्रित पशुओं से होने वाले नुकसान को कम करना भी अभियान का उद्देश्य है। सरकार ने गोवंश के भरण-पोषण के लिए सहायता राशि को 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन किया है। अधिकांश गो आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था भी की गई है।
1.15 लाख पशुपालकों को सौंपे गए करीब 1.85 लाख गोवंश
गोवंश संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत करीब 1.15 लाख पशुपालकों को लगभग 1.85 लाख गोवंश सौंपे गए हैं।
सरकार के अनुसार इससे गोवंश को परिवार आधारित संरक्षण मिलने के साथ पशुपालकों को भी इससे जुड़ने का अवसर मिला है। उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक पशुधन वाले राज्यों में है और दुग्ध उत्पादन में भी अग्रणी है। सरकार इस क्षमता को ग्रामीण आय और रोजगार बढ़ाने के माध्यम के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।
गोशालाओं से गो-आधारित उद्योग तक
सरकार गोशालाओं को धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में गोबर से गो-काष्ठ, गो-पेंट, वर्मीकम्पोस्ट, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गमले और दीपक जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
इसके साथ पंचगव्य, घनामृत और जीवामृत जैसे उत्पादों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इन गतिविधियों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर है, जिससे गांवों में महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा हो सकें।
सरकार का उद्देश्य गोबर को अपशिष्ट के बजाय खाद, ऊर्जा और विभिन्न उत्पादों के माध्यम से आय के स्रोत के रूप में विकसित करना है।
हर जिले की गोशालाओं का होगा मूल्यांकन
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने प्रदेश की गोशालाओं की क्षमता का व्यापक मूल्यांकन करने की पहल की है। इसके तहत जिलों की स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार गो-आधारित आर्थिक गतिविधियों को विकसित करने की योजना है।
किसी जिले में बायोगैस की बेहतर संभावना होने पर वहां इस क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि अन्य जिलों में जैविक खाद, गो-काष्ठ या गोमूत्र आधारित उत्पादों की इकाइयां विकसित की जा सकती हैं।
सरकार का लक्ष्य गो संरक्षण को स्थानीय रोजगार से जोड़ना और ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत तैयार करना है।
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