KGMU : टीबी की ट्रूनॉट जांच की सुविधा मिलेगी अब रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में

KGMU: TruNat testing for TB will now be available in the Department of Respiratory Medicine.

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Lucknow, 26 May, 2026 06:28 PM
KGMU : टीबी की ट्रूनॉट जांच की सुविधा मिलेगी अब रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में

*टीबी मरीजों को अब मिलेगी बड़ी राहत: डॉ0 सूर्यकान्त*

*रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग को बधाईः डॉ0 सोनिया नित्यानन्द, कुलपति केजीएमयू*

लखनऊ, (IPN)। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में टीबी जांच सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ0 सूर्यकान्त ने बताया कि ओएनजीसी के सीएसआर के सहयोग से लखनऊ जनपद को 04 नवीन मॉड्यूल ट्रूनॉट मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। जिसमें से एक ट्रूनॉट मशीन की स्थापना एवं संचालन अब रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के डाट्स सेन्टर में होगा। जिससे टीबी रोग से पीड़ित मरीजो को अब विभाग में ही बड़ी राहत मिलेगी।

यह ट्रूनॉट मशीन डॉ0 सूर्यकान्त के अथक प्रयासों के बाद लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला क्षय रोग अधिकारी द्वारा उपलब्ध करायी गई है। इसके लिए डॉ0 सूर्यकान्त ने जिला एवं राज्य क्षय रोग अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी व उ0प्र0 के स्वास्थ विभाग को धन्यवाद ज्ञापित कर व आभार व्यक्त किया। डॉ0 सूर्यकान्त ने बताया कि अभी तक टीबी रोगियों के बलगम एकत्र कराकर माइक्रोबायोलॉजी विभाग भेजे जाते थे। ज्ञात रहे कि केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में लखनऊ के अतिरिक्त अन्य जिलों से भी टीबी की जांच के लिए सेम्पल आते है, इस कारण विभाग पर इस जांच का काफी दबाव बना रहता है। 

डॉ0 सूर्यकान्त ने बताया कि आज इस ट्रूनॉट मशीन का डेमोंस्ट्रेशन विभाग में किया गया। इस मशीन का संचालन इतना सरल है कि कोई भी स्वास्थ कार्यकर्ता इस मशीन को 5 दिनों के अन्दर संचालन करना सीख सकता है। 

डा0 सोनिया नित्यानन्द, कुलपति केजीएमयू ने टीबी की शीघ्र एवं सटीक जांच हेतु अत्याधुनिक ट्रूनॉट मशीन के संचालन हेतु रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग को बधाई दी। उन्होने कहा टीबी, एमडीआर टीबी व गम्भीर टीबी के रोगियों के लिए यह अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।

ट्रूनॉट मशीन के डेमोंस्ट्रेशन कार्यक्रम में विभाग के चिकित्सक डॉ० अंकित कुमार, सीनियर एवं जूनियर डॉक्टर, डॉट्स सेंटर के समस्त स्वास्थ्य कार्यकर्ता तथा MELA परियोजना की टीम उपस्थित रही। MELA परियोजना की टीबी प्रोजेक्ट समन्वयक कैथरीन डेलोनी एवं थोमस डेलोनी, जो ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी हैं, DEVI संस्थान के माध्यम से समय-समय पर मरीजों के हित में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान कोविड मरीजों की सहायता से लेकर वर्तमान में टीबी रोगियों के उपचार एवं देखभाल तक, उनका योगदान निरंतर सराहनीय रहा है। 

इस अवसर पर डॉ० सूर्यकान्त ने कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सामाजिक संस्थाओं, जनजागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका की आवश्यता है। डॉ० सूर्यकान्त ने संबंधित अधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से नवीन स्थापित ट्रूनॉट मशीनों के सुचारु संचालन एवं नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने का आह्वान किया, ताकि आमजन को त्वरित, गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय जांच सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रग रेजिसन्टेन्ट टी.बी. केयर के संस्थापक प्रभारी डॉ0 सूर्यकान्त ने बताया कि इस अत्याधुनिक ट्रूनॉट मशीन की स्थापना एवं संचालन से टीबी रोग की शीघ्र एवं सटीक जांच संभव हो सकेगी, जिससे मरीजों को उसी दिन रेपोर्ट प्राप्त हो जायेगी। इसका लाभ एमडीआर टीबी व गम्भीर टीबी मरीजों का समय पर उपचार उपलब्ध कराने में बड़ी सहायता मिलेगी। 

डॉ0 सूर्यकान्त ने बताया कि टीबी की जांच सही समय पर सटीक जांच होना अति आवश्यक है सिर्फ एक्स-रे के धब्बे के आधार पर टीबी की दवा शुरू करना मरीज के लिए अहितकारी हो सकता है। उनका एक कथन है जैसे- *’’हर चमकी हुयी चींज सोना नही होती, उसी प्रकार एक्स रे का हर धब्बा टीबी नही होता’’*। अब ट्रूनॉट मशीन से सटीक और समय पर जांच प्राप्त होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने में आधुनिक जांच तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नई मशीनों के माध्यम से जांच क्षमता बढ़ेगी और टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को गति मिलेगी। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम नार्थ जोन टास्ट फोर्स के चेयरमैन डा0 सूर्यकान्त ने कहा कि वह प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत अभियान में सक्रीय भूमिका निभा रहे है, अब तक 500 सौ से अधिक टीबी रोग से ग्रसित मरीजों को गोद लिया है, इसके साथ ही 1 गांव व एक स्लम एरिया 2019 से ही गोद ले चुके हैं। केजीएमयू संस्थान द्वारा अब तक लगभग 15 ग्राम पंचायतों को गोद लिया जा चुका है। यह पहल न केवल चिकित्सा सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाओं का भी प्रतीक है, जो समाज के अन्य संस्थानों और व्यक्तियों को भी प्रेरित करती है कि वे इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

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