दीर्घायु विज्ञान और AI में वैश्विक नेतृत्व हासिल करे भारत : डॉ. राजेश्वर सिंह

India should achieve global leadership in longevity science and AI: Dr. Rajeshwar Singh

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Lucknow, 5 Nov, 2026 03:41 AM
दीर्घायु विज्ञान और AI में वैश्विक नेतृत्व हासिल करे भारत : डॉ. राजेश्वर सिंह

AI, बायोटेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर का संगम बनेगा भविष्य की बड़ी इंडस्ट्री, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर


लखनऊ, 5 नवंबर 2026 (आईपीएन)। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि दीर्घायु विज्ञान (Longevity Science), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बायोटेक्नोलॉजी का संगम आने वाले दशकों में दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक और आर्थिक क्रांतियों में से एक बन सकता है। भारत को इस क्षेत्र में केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनना होगा।


उन्होंने कहा कि दुनिया में अब उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को केवल प्राकृतिक नियति नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के माध्यम से समझने तथा बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। द इकोनॉमिस्ट की 3 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष दीर्घायु बायोटेक कंपनियों ने 18.4 अरब डॉलर का निवेश जुटाया, जो पिछले दस वर्षों के कुल निवेश से भी अधिक है।


डॉ. सिंह ने कहा कि Altos Labs ने वर्ष 2022 में तीन अरब डॉलर जुटाए, जबकि Eli Lilly ने AI आधारित दवा अनुसंधान कंपनी Insilico Medicine के साथ 2.75 अरब डॉलर तक के संभावित समझौते पर हस्ताक्षर किए। Sam Altman समर्थित Retro Biosciences मानव जीवन में 10 स्वस्थ वर्ष जोड़ने की संभावनाओं पर अनुसंधान कर रही है।


उन्होंने कहा कि AI आधारित दवा अनुसंधान, बायोलॉजिकल एजिंग क्लॉक्स और एपिजेनेटिक रीप्रोग्रामिंग जैसी तकनीकें भविष्य में बीमारियों की रोकथाम और स्वस्थ जीवन की अवधि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, इन तकनीकों की प्रभावशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभी व्यापक चिकित्सकीय परीक्षण आवश्यक हैं।


डॉ. सिंह ने कहा कि भारत के युवाओं को इस परिवर्तन का केवल उपभोक्ता बनने के बजाय अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से नेतृत्व करना चाहिए। स्वास्थ्य तकनीक, AI आधारित औषधि अनुसंधान, बायोटेक्नोलॉजी और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में निवेश तथा कौशल विकास को बढ़ावा देकर देश वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।


उन्होंने आगाह किया कि दीर्घायु विज्ञान के नाम पर किए जा रहे दावों को वैज्ञानिक प्रमाणों और चिकित्सकीय परीक्षणों के आधार पर ही स्वीकार किया जाना चाहिए। अप्रमाणित उपचारों और महंगे व्यावसायिक दावों से लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।


डॉ. सिंह ने कहा कि स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की बुनियाद संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और नशामुक्त जीवनशैली है। वैज्ञानिक प्रगति का उद्देश्य केवल संपन्न वर्ग की जीवन अवधि बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानजनक जीवन के अधिक वर्ष उपलब्ध कराना होना चाहिए।


उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे AI, बायोटेक्नोलॉजी और दीर्घायु विज्ञान के क्षेत्र में ज्ञान एवं कौशल विकसित करें, ताकि भारत भविष्य की स्वास्थ्य क्रांति में आत्मनिर्भर बनने के साथ वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सके।


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