मुख्यमंत्री आवास पर भारत-जापान की युवा पीढ़ी का मिलन, ‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ में गूंजा दोस्ती और भविष्य का संदेश

India-Japan youth meet at Chief Minister's residence; 'A Dialogue with the Future' conveys the message of friendship and the future

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Lucknow, 21 Aug, 2026 11:36 PM
मुख्यमंत्री आवास पर भारत-जापान की युवा पीढ़ी का मिलन, ‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ में गूंजा दोस्ती और भविष्य का संदेश
लखनऊ, 21 अगस्त (आईपीएन)। मुख्यमंत्री आवास पर शुक्रवार को भारत और जापान की युवा पीढ़ी के बीच दोस्ती, संस्कृति और भविष्य की साझेदारी का अनूठा संगम देखने को मिला। उत्तर प्रदेश-जापान निवेश बैठक के क्रम में आयोजित विशेष कार्यक्रम ‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ में जापान के यामानाशी प्रान्त से आए 13 विद्यार्थियों और उनके फैकल्टी सदस्यों ने लखनऊ के विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यामानाशी प्रान्त के गवर्नर कोटारो नागासाकी की मौजूदगी में हुए इस संवाद में दोनों देशों की युवा पीढ़ी ने एक-दूसरे की संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों को समझा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी विद्यार्थियों और उनके फैकल्टी सदस्यों का आत्मीय स्वागत करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत जापानी अभिवादन ‘ओहायो गोजाइमासु’ से की। उन्होंने कहा कि यह केवल विद्यार्थियों का मिलन नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों, दो परंपराओं और दो देशों की युवा पीढ़ियों का मिलन है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बच्चा लखनऊ के किसी गांव से आया है और दूसरा जापान के किसी गांव से। दोनों की भाषाएं अलग हैं, लेकिन दोनों के बीच सबसे बड़ी समानता यह है कि वे अपने भविष्य की कहानी लिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष भारत और जापान के राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और ऐसे समय में दोनों देशों के विद्यार्थी भविष्य के राजदूत के रूप में इस संबंध को नई ऊंचाई दे सकते हैं।

योगी आदित्यनाथ ने जापानी विद्यार्थियों को उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराया। उन्होंने अयोध्या, मथुरा, वाराणसी और सारनाथ का उल्लेख करते हुए कहा कि जापान से आए विद्यार्थियों के लिए उत्तर प्रदेश की यात्रा भारत की आध्यात्मिकता, संस्कृति और सभ्यतागत विरासत को करीब से जानने का अवसर है। विद्यार्थियों ने आगरा में ताजमहल भी देखा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान की नई पीढ़ी भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि साझा सभ्यतागत मित्र के रूप में जाने, यही इस संवाद की बड़ी उपलब्धि होगी। वहीं भारतीय विद्यार्थियों को जापान की कार्य संस्कृति, अनुशासन, ‘इकीगाई’, टीमवर्क, पारस्परिक सम्मान, स्वच्छता, समयबद्धता, पारंपरिक कला और उत्सवों को समझने का अवसर मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि जापान की ताकत सेल्फ डिसिप्लिन, प्रिसिजन, क्वालिटी, टीमवर्क और इनोवेशन में है, जबकि भारत की शक्ति युवा शक्ति, प्रतिभा, विविधता और सृजनात्मकता में है। जब दोनों देशों की ये ताकतें साथ आएंगी तो वैश्विक स्तर पर नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।

मुख्यमंत्री ने भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और जापान के सामाजिक सामंजस्य के दर्शन के बीच समानता को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति पूरी दुनिया को एक परिवार मानती है। उन्होंने विद्यार्थियों से एक-दूसरे की भाषा के साथ भावनाओं, संस्कृति, मूल्यों और जीवन दृष्टि को समझने तथा उनका सम्मान करने का आह्वान किया। उन्होंने अपने संबोधन का समापन जापानी भाषा में ‘अरिगातो गोजाइमासु’ कहकर किया।

यामानाशी प्रान्त के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों के विद्यार्थियों को एक-दूसरे को समझने और जुड़ने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात केवल एक दिन का कार्यक्रम बनकर नहीं रहनी चाहिए। भारतीय और जापानी विद्यार्थियों को इस दोस्ती को आगे बढ़ाकर दीर्घकालिक संबंधों में बदलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों को बेहतर ढंग से जोड़ने के लिए पहले यह समझना जरूरी है कि उनके बीच क्या समानताएं और क्या भिन्नताएं हैं। उन्होंने भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और यामानाशी की पारस्परिक समृद्धि की भावना के बीच समानता का उल्लेख किया।

कार्यक्रम के दौरान जापानी विद्यार्थियों ने जापानी भाषा में सामूहिक गीत प्रस्तुत किया। इसके जवाब में भारतीय विद्यार्थी ईशान ने भगवान श्रीराम को समर्पित ‘कौशल्या दशरथ के नंदन’ गीत प्रस्तुत किया। दोनों प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि भाषाएं और संस्कृतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन संगीत और भावनाएं लोगों को जोड़ती हैं।

लखनऊ की छात्रा अक्षरा पांडेय ने जापानी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत में अतिथि को भगवान का स्वरूप माना जाता है। उन्होंने जापानी भाषा में ‘अरिगातो’ कहकर विद्यार्थियों का स्वागत किया और कहा कि भारत के बच्चों की बचपन की यादों में डोरेमोन भी शामिल रहा है।

जापानी विद्यार्थियों ने भी भारत यात्रा के अपने अनुभव साझा किए। छात्र कजामा ने भारत आने को अपना विशेष अनुभव बताते हुए कहा कि ताजमहल की सुंदरता और भव्यता ने उन्हें प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि वह भारत और जापान के बीच मैत्री और समझ का सेतु बनना चाहते हैं।

जापानी छात्रा मियागी मोतो ने कहा कि अलग-अलग संस्कृतियों को समझना और एक-दूसरे की संस्कृति का सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने ताजमहल देखने और पहली बार बिंदी लगाने के अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने भारत-जापान की मित्रता को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाने की इच्छा जताई।

जापानी विद्यार्थियों ने ओरिगेमी के माध्यम से भी शांति और मित्रता का संदेश दिया। कागज से बनाए गए सुंदर ओरिगेमी मुख्यमंत्री को भेंट किए गए। बच्चों के इस छोटे से उपहार में दोनों देशों की नई पीढ़ियों के बीच शांति, मित्रता और साथ आगे बढ़ने की भावना दिखाई दी।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी और भारतीय विद्यार्थियों के साथ सेल्फी भी ली। इस दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह दिखाई दिया।

मुख्यमंत्री आवास पर हुआ यह कार्यक्रम भारत-जापान संबंधों की आर्थिक और निवेश साझेदारी से आगे बढ़कर मानवीय रिश्तों और सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश दे गया। यामानाशी और लखनऊ के बच्चों के बीच हुए इस संवाद में भाषाएं अलग थीं, संस्कृतियां अलग थीं, लेकिन भविष्य का सपना साझा था—दोस्ती, सहयोग और साथ मिलकर आगे बढ़ने का संकल्प।

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