प्रदेश में बाढ़ राहत सामग्री वितरण अभियान तेज, प्रभावित परिवारों तक पहुंच रहीं जरूरी वस्तुएं
Flood relief material distribution campaign intensifies in the state, essential items reaching affected families
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Lucknow, 19 Aug, 2026 01:28 AMकानपुर में 1,100 राहत किट तैयार, हर किट में 26 जरूरी सामग्री; वाराणसी में नाविकों को 33,300 लाइफ जैकेट वितरित
बाढ़ प्रभावित जिलों में राशन, भूसा, दवाओं और चारे की व्यवस्था पूरी, राहत शिविर भी तैयार
लखनऊ, 18 अगस्त (आईपीएन)। गंगा, यमुना, रामगंगा और उनकी सहायक नदियों के उफान के बीच प्रदेश के दर्जनों जिलों में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। हालांकि योगी सरकार का प्रशासनिक अमला संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से ही मुस्तैद है। कानपुर से लेकर वाराणसी और मेरठ से लेकर मिर्जापुर तक बाढ़ राहत की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है। जिन क्षेत्रों में बाढ़ से लोग प्रभावित हैं, वहां राहत सामग्री का वितरण शुरू कर दिया गया है। वहीं, जिन इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है, वहां राहत सामग्री को प्रभावित क्षेत्रों के करीब पहुंचाया जा रहा है, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
कानपुर में 176 संवेदनशील गांवों पर नजर
कानपुर में गंगा, यमुना, पांडु, नोन और रिंद नदी के किनारे बसे 176 संवेदनशील गांवों पर प्रशासन की सीधी नजर है। इन गांवों की सुरक्षा के लिए 35 बाढ़ चौकियां और 101 शरणालय पहले ही तैयार किए जा चुके हैं।
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए 1,100 राहत किट तैयार की गई हैं। प्रत्येक किट में 26 प्रकार की जरूरी सामग्री शामिल है। बचाव कार्यों के लिए नावों और प्रशिक्षित टीमों की व्यवस्था भी की गई है।
कानपुर में गंगा का जलस्तर 112.130 मीटर दर्ज किया गया है, जो चेतावनी बिंदु से 13 सेंटीमीटर ऊपर है। प्रशासन जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रहा है।
मेरठ मंडल में राहत सामग्री और बचाव उपकरण तैयार
मेरठ मंडल में भी राहत सामग्री और बचाव उपकरणों को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बागपत में यमुना और हिंडन नदी के किनारे 11 बाढ़ चौकियां सक्रिय की गई हैं और चार राहत स्थल चिह्नित किए गए हैं।
गौतमबुद्धनगर में तटबंधों की मरम्मत के साथ मिट्टी की बोरियां, बल्ली और पत्थर का पर्याप्त भंडार रखा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल इस्तेमाल किया जा सके।
मुरादाबाद मंडल के पांचों जिलों में भी राहत सामग्री वितरण की व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं। बिजनौर में सुरक्षा उपकरण वितरित किए जा चुके हैं और ब्लॉकवार मेडिकल एवं पशु चिकित्सा टीमों का गठन किया गया है।
संभल की गुन्नौर तहसील में आपात स्थिति से निपटने के लिए 52 गोताखोर और 100 आपदा मित्र तैनात किए गए हैं। अमरोहा में पीएसी की 15वीं बटालियन की टीम के साथ 25 स्थानीय गोताखोर भी मुस्तैद हैं।
खाद्य सामग्री, दवाओं और पशुओं के चारे का इंतजाम
आगरा मंडल के आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी जिलों में राहत सामग्री वितरण की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। खाद्य सामग्री और राहत किट को जरूरत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने की तैयारी की गई है।
बाढ़ के दौरान संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात की हैं। दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है।
पशुओं की सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों और गौशालाओं का चिन्हीकरण किया गया है। पशुओं के लिए चारे की भी व्यवस्था की गई है। आपात स्थिति में बचाव के लिए गोताखोरों, एनडीआरएफ और मोटरबोट की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
वाराणसी में 46 राहत शिविर तैयार
वाराणसी में 46 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इनमें सदर तहसील में 37, राजातालाब में छह और पिंडरा में तीन राहत शिविर शामिल हैं। इनकी अनुमानित क्षमता 7,392 लोगों की है।
इसके अतिरिक्त 15 अस्थायी राहत शिविर भी तैयार किए गए हैं, जिनमें 3,785 लोगों को ठहराया जा सकता है।
बाढ़ राहत अभियान के तहत वाराणसी में संचालित नावों के नाविकों को अब तक 33,300 लाइफ जैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसे राहत एवं बचाव तैयारियों के तहत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमों का गठन किया है, जबकि पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं के इलाज और चारे की व्यवस्था की गई है।
मिर्जापुर में 37 बाढ़ चौकियां, 50 राहत स्थल चिह्नित
मिर्जापुर में भी बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए 37 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। इसके अलावा 50 स्थानों को राहत शिविर के लिए चयनित किया गया है।
प्रशासन की ओर से राहत सामग्री, बचाव उपकरण और आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
कई जिलों में प्रशासन अलर्ट मोड पर
सहारनपुर, चंदौली, जौनपुर और गाजीपुर समेत अन्य संवेदनशील जिलों में भी प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अधिकारियों को राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक संसाधन पहले से पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेशभर में राहत किट, लाइफ जैकेट, राशन, भूसा, दवाओं और पशुओं के चारे की व्यवस्था के साथ प्रशासन का फोकस प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने पर है।
योगी सरकार की ओर से बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासनिक तैयारियों का उद्देश्य यही है कि जलस्तर बढ़ने या बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किए जा सकें और किसी भी प्रभावित परिवार को आवश्यक सामग्री तथा सुरक्षित आश्रय के लिए इंतजार न करना पड़े।
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