फर्जी बिलों के सहारे बाजार में खपाई जा रही थीं नकली दवाएं, यूपी में 5.43 करोड़ की अवैध औषधियां जब्त
Fake medicines were being sold in the market using fake bills; illegal medicines worth Rs 5.43 crore seized in UP.
IPN Live
Lucknow, 20 Aug, 2026 03:19 AMलखनऊ के अमीनाबाद से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल तेज, जांच में फर्जी बिलिंग और नकली दवा निर्माण के चौंकाने वाले तथ्य सामने आए
लखनऊ, 19 अगस्त (आईपीएन)। उत्तर प्रदेश में नकली एवं काउंटरफीट दवाओं के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) का प्रदेशव्यापी अभियान लगातार तेज हो रहा है। लखनऊ, आगरा, वाराणसी और गोंडा में की गई कार्रवाई में अब तक करीब 5.43 करोड़ रुपये की अवैध औषधियां जब्त की गई हैं। जांच में फर्जी बिलिंग, बिना लाइसेंस दवा कारोबार, री-लेबलिंग और नकली दवाओं के अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं।
विभाग के अनुसार लखनऊ में 41.58 लाख रुपये, वाराणसी में 25 लाख रुपये, गोंडा में 1.13 करोड़ रुपये और आगरा में 3.63 करोड़ रुपये की अवैध औषधियां बरामद की गई हैं।
अमीनाबाद में फर्जी बिलिंग के जरिए नकली दवाओं की सप्लाई का खुलासा
राजधानी के अमीनाबाद क्षेत्र में जांच के दौरान मेसर्स हेल्थ प्लस, मेसर्स एम.के. फार्मा, राम फार्मा और पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस, सहारनपुर से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल की गई। विभाग के मुताबिक इन फर्मों पर फर्जी बिलिंग के जरिए नकली दवाओं को बाजार में खपाने के आरोप सामने आए हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि हेल्थ प्लस को लाइसेंस मई 2025 में मिला था, जबकि फर्म द्वारा अप्रैल 2025 से ही अवैध क्रय-विक्रय दर्शाया जा रहा था।
निर्माता कंपनी STADMED ने हेल्थ प्लस द्वारा बेचे गए Alkasol Syrup को नकली बताया। वहीं एम.के. फार्मा पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 8.87 करोड़ रुपये की फर्जी खरीद दिखाने का आरोप है। विभाग के अनुसार साक्ष्य मिटाने के लिए पुराने डेटा को भी डिलीट किया गया।
निर्माता कंपनी Wardex ने फर्म की Dexorange Syrup को नकली बताया, जबकि करीब 39.20 लाख Zoryl M1 टैबलेट के स्रोत का सत्यापन नहीं हो सका।
चारों फर्मों के खिलाफ थाना अमीनाबाद में 12 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111, 276, 277, 278, 318, 319, 336 और 338 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
नकली दवाओं की फैक्ट्री तक पहुंची जांच
लखनऊ में बरामद नकली दवाओं के स्रोत की जांच के दौरान कार्रवाई अंतरराज्यीय स्तर तक पहुंची। FSDA उत्तर प्रदेश, क्राइम ब्रांच गाजियाबाद और औषधि विभाग उत्तराखंड की संयुक्त टीम ने एक कथित अवैध दवा निर्माण इकाई का खुलासा किया।
विभाग के मुताबिक यहां Dr. Reddy's, Cipla, Elder, Macro और Intas जैसी कंपनियों के नाम से Clavactum 625 और Razo-D कैप्सूल की नकली दवाएं तैयार की जा रही थीं।
छापेमारी में टैबलेट-कैप्सूल बनाने वाली मशीनें, ब्लिस्टर पैकिंग यूनिट, ओवरप्रिंटिंग मशीन और नामी ब्रांडों की नकली फॉइल पैकिंग बरामद हुई। मौके से करीब 2 करोड़ रुपये की दवाएं, मशीनें और पैकिंग सामग्री जब्त की गई। दो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
जुलाई से लखनऊ में लगातार कार्रवाई
विभाग के अनुसार जुलाई से लखनऊ में भी कई स्थानों पर कार्रवाई की गई। आलमबाग मेट्रो स्टेशन के पास से 1.6 लाख रुपये, बक्शी का तालाब क्षेत्र से 5 लाख रुपये और अमीनाबाद के एक कथित अवैध गोदाम से करीब 21 लाख रुपये की नकली दवाएं बरामद हुईं।
इनमें Telma और Pantop 40 जैसी दवाएं शामिल थीं। अमीनाबाद की आठ फर्मों और एक सॉफ्टवेयर विक्रेता के खिलाफ फर्जी बिलिंग एवं सॉफ्टवेयर में हेरफेर के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई। केसरबाग में बिना भौतिक सप्लाई के क्रॉस-बिलिंग से जुड़े कथित सिंडिकेट का भी खुलासा हुआ।
विभाग के मुताबिक लखनऊ में अब तक करीब 41.58 लाख रुपये की अवैध दवाएं जब्त की गई हैं और 32 लोगों के खिलाफ सात प्राथमिकी दर्ज हुई हैं। इनमें दो गिरफ्तारियां भी की गई हैं।
वाराणसी में 25 लाख की अवैध दवाएं बरामद
वाराणसी के मडुवाडीह क्षेत्र में एक सर्जिकल दुकान पर कार्रवाई के दौरान करीब 25 लाख रुपये की अवैध एलोपैथिक दवाएं बरामद की गईं। दुकान संचालक को मौके से गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ BNS की धारा 277, 278 एवं 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गोंडा में नशे में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का जखीरा पकड़ा
गोंडा के बड़गांव में एक फार्मास्युटिकल फर्म के ठिकानों पर कार्रवाई में नशे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं, इंजेक्शनों और सीरप का करीब 1.13 करोड़ रुपये का जखीरा बरामद हुआ। मामले में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम तथा एनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया। एक सह-आरोपी फरार बताया गया है।
वहीं मेरठ, बागपत और उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में संयुक्त कार्रवाई के दौरान नकली Evion 400mg कैप्सूल बनाने वाले कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ। कार्रवाई में करीब छह लाख नकली कैप्सूल बरामद किए गए।
आगरा में 3.63 करोड़ की सबसे बड़ी बरामदगी
आगरा में FSDA की कार्रवाई में नकली दवाओं की बिक्री, फर्जी लेबलिंग, री-लेबलिंग और फर्जी बिलिंग से जुड़े कई मामले सामने आए। विभिन्न प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई के दौरान Torrent Pharma की नकली Chymoral Forte, Aciloc तथा सरकारी कोटे की Zostum-O की कथित कालाबाजारी के मामले सामने आए।
युग फार्मा, शारदा फार्मा और RMD फार्मा में इंसुलिन पर कथित फर्जी लेबल और मनमानी MRP से बिक्री के साक्ष्य मिले। वहीं वीए मेडिकोज, रुद्रा और भगवती मेडिकल सिंडिकेट से जुड़े मामलों में Telma-H से संबंधित अनियमितताओं के साथ करीब 1.88 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग सामने आई।
ज्योति ड्रग हाउस से इंसुलिन, रेबीज वैक्सीन और फिजिशियन सैंपल दवाएं, जिनकी कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये बताई गई, बरामद हुईं। श्री मेडिकल एजेंसीज से करीब 50 लाख रुपये की नकली OXALGIN-DP टैबलेट जब्त की गईं। इसके अलावा ब्राइट फार्मा-फाउंटेन से री-लेबलिंग से जुड़ी करीब 5.20 लाख रुपये की दवाएं और सीएफ इंटरप्राइजेज सहित अन्य गोदामों से करीब 67 लाख रुपये की दवाएं बरामद की गईं।
आगरा में कार्रवाई के दौरान कुल 3.63 करोड़ रुपये की अवैध औषधियां जब्त, नौ प्राथमिकी दर्ज और दो आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।
‘दवा माफिया के खिलाफ अभियान पूरी दृढ़ता से जारी रहेगा’
यूपीएफएसडीए की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने कहा कि दवा सुरक्षा विभाग के लिए सर्वोच्च चिंता का विषय है और इसका सीधा संबंध जनस्वास्थ्य से है। उन्होंने कहा कि बीमार व्यक्ति दवाओं की गुणवत्ता और उनकी विश्वसनीयता पर भरोसा करता है, इसलिए व्यवस्था उसे किसी भी स्तर पर निराश नहीं कर सकती।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नकली दवाओं के खतरे को प्रदेश से पूरी तरह समाप्त करने तक दवा माफिया के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहेगा।
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