लखनऊ में नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क पर FSDA की बड़ी कार्रवाई, चार के खिलाफ FIR
FSDA takes major action against organised fake medicine network in Lucknow, FIR against four
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Lucknow, 12 Aug, 2026 08:09 PMबिना दवा सप्लाई किए करोड़ों की फर्जी बिलिंग का आरोप, 39.20 लाख Zoryl M1 टैबलेट का नहीं मिला हिसाब
लखनऊ, 12 अगस्त 2026 (आईपीएन)। नकली और संदिग्ध दवाओं की सप्लाई चेन के खिलाफ उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने लखनऊ में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग के अनुसार अमीनाबाद क्षेत्र में बिना वास्तविक दवा की आपूर्ति किए फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और कागजी लेनदेन के जरिए नकली एवं काउंटरफिट दवाओं को बाजार में खपाने का कथित नेटवर्क सामने आया है। मामले में चार आरोपियों के खिलाफ थाना अमीनाबाद में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
एफआईआर में अंकुर अवस्थी, प्रोपराइटर हेल्थ प्लस; मनीष बाजपेयी, संचालक एमके फार्मा; गोविंद शुक्ला, संचालक राम फार्मा और ऐजाज अहमद, संचालक पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस, सहारनपुर को आरोपी बनाया गया है। विभाग का आरोप है कि संबंधित फर्मों के बीच बिना वास्तविक दवा सप्लाई के बिलिंग की गई और कागजों पर लेनदेन दिखाकर दवाओं की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड तैयार किया गया।
बिना लाइसेंस दवाओं के कारोबार का आरोप
विभाग के मुताबिक अमीनाबाद स्थित हेल्थ प्लस के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी ने वैध औषधि लाइसेंस के बिना दवाओं के भंडारण और लेनदेन का रिकॉर्ड तैयार किया। जांच में गोविंद शुक्ला की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है। विभाग के अनुसार हेल्थ प्लस और राम फार्मा एक ही फ्लोर पर संचालित हो रहे थे और इनके माध्यम से कथित तौर पर दवाओं के अवैध डायवर्जन एवं कागजी लेनदेन का नेटवर्क चलाया जा रहा था।
सहारनपुर की पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस फर्म पिछले करीब दो वर्षों से बंद बताई गई है। विभाग का आरोप है कि इसका इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी खरीद और कागजी लेनदेन के लिए किया गया।
8.87 करोड़ रुपये की खरीद दिखाने का दावा
मामले में एमके फार्मा की भूमिका भी जांच के घेरे में है। विभाग के अनुसार फर्म के संचालक मनीष बाजपेयी ने वित्तीय वर्ष 2026 में करीब 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद दिखाई। जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है, जिनमें अन्य फर्मों के नाम पर Zoryl M1, Augmentin और Dexorange Syrup की खरीद दर्शाई गई थी।
विभाग के मुताबिक साक्ष्य छिपाने के लिए लैपटॉप का पुराना डेटा भी डिलीट किया गया। दवा निर्माताओं और संबंधित फर्मों से सत्यापन कराने पर उन्होंने इन दवाओं की बिक्री से इनकार किया और संबंधित बैचों को काउंटरफिट बताया।
39.20 लाख Zoryl M1 का नहीं मिला हिसाब
जांच में एमके फार्मा से Zoryl M1 की करीब 39.20 लाख टैबलेट का हिसाब नहीं मिलने की बात सामने आई है। विभाग का आरोप है कि इन दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में खपाया गया, जिससे लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
एफएसडीए के अनुसार मामले में फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने, कूटरचना, नकली दवाओं के कारोबार और अवैध धन अर्जित करने की आशंका की जांच की जा रही है। इसी आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 111, 276, 277, 278, 318, 319, 336 और 338 के तहत कार्रवाई की गई है।
लखनऊ में पहले भी सामने आए हैं मामले
नकली दवाओं और फर्जी बिलिंग के खिलाफ अभियान के दौरान लखनऊ में इससे पहले भी कई कार्रवाई की जा चुकी हैं। विभाग के अनुसार अमीनाबाद की आठ फर्मों और एक सॉफ्टवेयर डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ फर्जी बिलिंग एवं सॉफ्टवेयर में हेरफेर के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
जुलाई 2026 में अमीनाबाद के एक कथित अवैध गोदाम से करीब 21 लाख रुपये की नकली दवाएं बरामद की गई थीं। वहीं आलमबाग मेट्रो स्टेशन के पास करीब 1.60 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं जब्त की गईं। बख्शी का तालाब क्षेत्र में भी अवैध भंडारण और परिवहन के मामलों में कार्रवाई की गई।
आगरा में भी सामने आया बड़ा नेटवर्क
एफएसडीए के अभियान के दौरान आगरा में भी नकली, री-लेबल की गई और सरकारी सप्लाई की दवाओं के कथित अवैध कारोबार के मामले सामने आए हैं। विभाग के अनुसार विभिन्न स्थानों पर की गई कार्रवाई में 15 से अधिक संचालकों के खिलाफ नौ एफआईआर दर्ज कराई गईं।
जांच में फर्जी बिलों के जरिए कथित तौर पर नकली दवाओं की बिक्री तथा ईएसआई और सरकारी कोटे की दवाओं की कालाबाजारी का मामला सामने आया। सरकारी संस्थानों के लिए भेजी गई दवाओं के मूल लेबल हटाकर नए लेबल और मनमानी एमआरपी के साथ खुले बाजार में बेचने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
विभाग के अनुसार आगरा में अब तक 3.63 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध, नकली तथा सरकारी/डिफेंस सप्लाई की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं।
दूसरे राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच
एफएसडीए नकली दवाओं के नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी जांच कर रहा है। विभाग के मुताबिक लखनऊ के अमीनाबाद में एक अवैध गोदाम से बरामद नकली दवाओं के स्रोत की जांच राजस्थान तक पहुंची है। देहरादून में कथित तौर पर नकली दवाएं तैयार करने वाली एक अवैध निर्माण इकाई के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
दोषी पाए जाने पर लाइसेंस होंगे निरस्त
आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश डॉ. रोशन जैकब ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कारोबारियों, स्थानीय थोक फर्मों और एजेंटों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
विभाग के अनुसार जांच में दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों के लाइसेंस निरस्त करने के साथ उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। एफएसडीए का लक्ष्य नकली, अमानक, री-लेबल और अवैध दवाओं की सप्लाई चेन को उसके स्रोत तक पहुंचकर समाप्त करना है।
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