मिठाइयों और स्नैक्स में मनमाने रंगों पर सख्ती, एफएसडीए ने जारी किए विस्तृत दिशा-निर्देश
FSDA issues detailed guidelines to crack down on arbitrary colours in
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Lucknow, 19 Oct, 2026 12:51 AMलखनऊ, 18 अक्टूबर 2026 (आईपीएन)। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) उत्तर प्रदेश ने मिठाइयों, स्नैक्स, चटनियों, बेकरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों में रंगों के अनियंत्रित इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयुक्त डॉ. रोशन जैकब द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल उन्हीं प्राकृतिक अथवा कृत्रिम रंगों का उपयोग किया जा सकेगा, जिन्हें संबंधित खाद्य श्रेणी के लिए अनुमति प्राप्त है।
चटनी, कॉटन कैंडी और तंदूरी व्यंजनों पर विशेष नजर
एफएसडीए ने स्ट्रीट फूड और ढाबों में इस्तेमाल होने वाले रंगों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। समोसे, चाट, मोमोज और रोल के साथ परोसी जाने वाली हरी और लाल चटनी में प्रतिबंधित रासायनिक रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए टमाटर, चुकंदर, धनिया और पुदीना जैसे प्राकृतिक स्रोतों के उपयोग की सलाह दी गई है।
कॉटन कैंडी (बुढ़िया के बाल) और बर्फ के गोलों में रोडामाइन-बी जैसे गैर-खाद्य रंगों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं चिकन टिक्का, कबाब, चाप और तली हुई मछली जैसे व्यंजनों में लाल रंग के लिए औद्योगिक डाई के उपयोग पर भी रोक रहेगी।
रंगों की मात्रा का अनुमान नहीं चलेगा
निर्देशों के अनुसार खाद्य रंगों को चम्मच, चुटकी या अनुमान के आधार पर खाद्य पदार्थों में नहीं मिलाया जा सकेगा। इसके लिए डिजिटल वेइंग स्केल से सटीक मापन करना अनिवार्य होगा। यदि मापन की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो खाद्य रंग का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
विभिन्न खाद्य उत्पादों के लिए अलग-अलग सीमा
एफएसडीए ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पादों के मानक एवं खाद्य सहयोज्य) विनियम, 2011 के अनुसार विभिन्न खाद्य पदार्थों के लिए रंगों की अधिकतम सीमा निर्धारित है।
- मिठाइयों और कन्फेक्शनरी उत्पादों में सामान्यतः 100 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक अनुमन्य रंगों का उपयोग किया जा सकेगा।
- केक, पेस्ट्री, बिस्कुट और अन्य बेकरी उत्पादों में निर्धारित सीमा का पालन करना होगा।
- फ्लेवर्ड मिल्क, दही और आइसक्रीम में केवल अनुमन्य रंगों का ही उपयोग किया जा सकेगा।
- प्रसंस्कृत फल एवं सब्जियों तथा गैर-अल्कोहलिक पेय पदार्थों के लिए भी अलग-अलग सीमा निर्धारित की गई है।
- नमकीन और स्नैक्स उत्पादों में रंगों का उपयोग संबंधित श्रेणी के नियमों के अनुसार ही किया जा सकेगा।
इन खाद्य पदार्थों में रंग मिलाना पूरी तरह प्रतिबंधित
एफएसडीए ने कई खाद्य पदार्थों में किसी भी प्रकार का रंग मिलाने पर रोक लगाई है। इनमें शामिल हैं:
- कच्चा एवं पाश्चुरीकृत दूध
- मलाई, सादा दही, पनीर और छेना
- ताजे फल एवं कच्ची सब्जियां
- शिशु आहार और शिशु दुग्ध प्रतिस्थापक
- प्राकृतिक फलों का रस, पैकेज्ड पेयजल और मिनरल वाटर
- मसाले, चाय और कॉफी
- अनाज, दाल, आटा और सूजी
- सादी ब्रेड
- खाद्य तेल एवं वसा
- गुड़ और शहद
- सूखे मेवे
- दाल, सब्जियां, बिरयानी, चटनी और फ्रेंच फ्राइज
स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं प्रतिबंधित रंग
एफएसडीए के अनुसार रोडामाइन-बी, मेटानिल येलो, बटर येलो, मैलाकाइट ग्रीन, ऑरामाइन, ऑरेंज-2 और सूडान डाइज जैसे गैर-अनुमन्य रंगों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इनसे यकृत और गुर्दों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के साथ एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है।
खरीद से लेकर उपयोग तक रिकॉर्ड रखना होगा
खाद्य कारोबारियों को केवल अधिकृत स्रोतों से खाद्य रंग खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। खरीद के बिल, इनवॉइस और बैच नंबर सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को यह रिकॉर्ड दिखाना होगा। बिना लेबल वाले रंगों या रसायनों की खरीद और उपयोग पर रोक रहेगी।
नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
एफएसडीए ने स्पष्ट किया है कि गैर-अनुमन्य रंगों का इस्तेमाल, निर्धारित सीमा से अधिक रंगों का उपयोग या ऐसे खाद्य पदार्थों में रंग मिलाना जहां इसकी अनुमति नहीं है, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में संबंधित खाद्य कारोबारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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