डॉ. सूर्यकान्त टीबी आई.सी.यू. कमेटी के बने चेयरमैन
Dr. Suryakant becomes chairman of the TB ICU committee
IPN Live
Lucknow, 7 May, 2026 07:56 PMटीबी उन्मूलन में उत्कृष्ट कार्यों के चलते डॉ. सूर्यकान्त को मिली राष्ट्रीय जिम्मेदारी
केजीएमयू कुलपति ने डॉ. सूर्यकान्त को दी बधाई
लखनऊ, (IPN)। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त को राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। *देश में गंभीर क्षय रोग (टीबी) मरीजों के बेहतर उपचार के लिए “टीबी कमिटेड आईसीयू” हेतु स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) एवं गाइडलाइन तैयार करने के लिए गठित राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का चेयरमैन बनाया गया है।* यह समिति राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीइपी), स्वास्थ मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्य करेगी गम्भीर टीबी मरीजों के उपचार के लिए आईसीयू बनाने की मानक प्रणाली विकसित करेगी।
ज्ञात रहे कि टीबी के वे गंभीर रोगी, जिन्हें आईसीयू की आवश्यकता होती है, उन्हें जनरल आईसीयू में नहीं रखा जा सकता हैय उनके लिए विशेष रूप से निर्मित आईसीयू की आवश्यकता होती है। डॉ. सूर्यकान्त कई वर्षों से टीबी से होने वाली मृत्यु दर को कम करने के लिए गंभीर प्रयास कर रहे हैं, जिसमें एक प्रमुख कार्य टीबी आईसीयू की स्थापना भी शामिल है। डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि टीबी के वे रोगी, जिनका ऑक्सीजन स्तर 90 प्रतिशत से कम होता है, उन्हें टीबी आईसीयू की आवश्यकता होती है। कुछ महीने पहले स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार ने एक आदेश पारित किया है कि देश के प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में टीबी आईसीयू सुविधा युक्त कम से कम एक बेड अवश्य होना चाहिए। इसी क्रम में यह समिति बनाई गई है।
केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानन्द ने टीबी मरीजों के बेहतर उपचार के लिए टीबी कमिटेड आईसीयू हेतु गठित राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति के चेयरमैन बनाए जाने पर डॉ. सूर्यकान्त को बधाई दी और उनके कार्यों की सराहना भी की।
ज्ञात रहे कि आईसीएमआर द्वारा देशभर में जटिल टीबी के नए उपचार हेतु चलाए गए बीपाल प्रोजेक्ट के केजीएमयू के मुख्य पर्यवेक्षक भी रह चुके हैं। बीपाल प्रोजेक्ट की सफलता के बाद ही एमडीआर-टीबी के नए उपचार में नई दवाओं को शुरू किया गया है। इसके साथ ही वे टीबी से संबंधित कई चिकित्सकीय, शोध व सामाजिक समितियों के अध्यक्ष, सदस्य व सलाहकार भी हैं। डॉ. सूर्यकान्त ने ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी के क्षेत्र में केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी दिलाई है। रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग को विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट ट्यूबरकुलोसिस द्वारा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी केयर चुना गया है। जिसके तहत टीबी मरीजों का उत्तम उपचार प्रदान किया जाता है। साथ ही पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केंद्र के डा0 सूर्यकान्त संस्थापक प्रभारी भी है। जो उत्तर प्रदेश का पहला सरकारी केंद्र है जहाँ पर साँस से सम्बंधित रोगियों का पूरी तरह से निःशुल्क उपचार किया जाता है। डा0 सूर्यकान्त के नेतृत्व में पोस्ट टीबी मरीजों जैसे टीबी के इलाज के बन्द होने के बाद भी खांसी/सांस व अन्य तकलीफों का सामना करना पड़ता है, ऐसे मरीजों का इलाज भी किया जाता है।
डॉ. सूर्यकान्त राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम, नॉर्थ जोन टास्क फोर्स (उत्तर प्रदेश के 9 राज्यों के लिए) के चेयरमैन के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। डॉ. सूर्यकान्त ने टीबी के बारे में 4 पुस्तकें हिन्दी में लिखी हैं, जिनमें से एक पुस्तक नई शिक्षा नीति की तीसरी वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विमोचित 100 हिंदी पुस्तकों में शामिल रही।
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत योजना में डॉ. सूर्यकान्त टीबी नियंत्रण और उन्मूलन के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में अब तक 500 से अधिक टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके उपचार, पोषण एवं देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही वर्ष 2019 से ग्राम पंचायतों एवं स्लम क्षेत्र को गोद लेकर वहां टीबी उन्मूलन की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने अब तक सैकड़ों से अधिक टीबी से संबंधित विषय पर लेख प्रकाशित किए हैं तथा समय समय पर फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से निरंतर टीबी से आम जनमानस को जागरूक कर रहें हैं। टीबी उन्मूलन के लिए उनके प्रयास न केवल चिकित्सा सेवा तक सीमित हैं, बल्कि सामाजिक स्तर पर जागरूकता और मरीजों के पुनर्वास तक विस्तारित हैं। उनके नेतृत्व में किए जा रहे ये कार्य “टीबी मुक्त भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

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