गो संरक्षण से गांवों में खुलेगा कमाई का नया रास्ता, 10 रुपये लीटर खरीदा जाएगा गोमूत्र
Cow protection will open up a new avenue of income in villages, cow urine will be purchased at Rs 10 per litre.
IPN Live
Lucknow, 10 Aug, 2026 11:21 PMबुलंदशहर में एफपीओ के जरिए शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट, 15 गांवों में खुले गोमूत्र संग्रह केंद्र; 300 महिलाएं बनीं शेयरहोल्डर
लखनऊ, 10 अगस्त 2026 (IPN)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक खेती से जोड़ने की दिशा में बुलंदशहर में नई पहल शुरू की गई है। किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किसानों और पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। परियोजना सफल होने पर इसे प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी विस्तार देने की तैयारी है।
बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसैना गांव में डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में शुरू हुए इस प्रयोग से आसपास के 15 गांवों को जोड़ा गया है। इन गांवों में गोमूत्र संग्रह के लिए स्थानीय स्तर पर केंद्र बनाए गए हैं। वर्तमान में इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 500 लीटर गोमूत्र एकत्र किया जा रहा है। भविष्य में खरीद की दर बढ़ाकर 20 रुपये प्रति लीटर करने की भी योजना बताई गई है।
गांवों में लगाए गए 200 लीटर क्षमता के टैंक
गोमूत्र संग्रह के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता वाले टैंक लगाए गए हैं। इससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता और गांव में ही संग्रह एवं खरीद की सुविधा उपलब्ध हो जाती है।
इस व्यवस्था में ग्रामीण महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। गोमूत्र एकत्र करने में सहयोग करने वाली महिलाओं को प्रति लीटर दो रुपये कमीशन दिया जा रहा है। इससे गांव में रहते हुए महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का अवसर तैयार हुआ है।
300 महिलाएं बनीं शेयरहोल्डर
इस पहल को महिला सशक्तीकरण से भी जोड़ा गया है। करीब 300 महिलाओं को शेयरहोल्डर बनाया गया है। यानी महिलाएं केवल गोमूत्र संग्रह की प्रक्रिया से ही नहीं, बल्कि इस आर्थिक मॉडल से भी सीधे जुड़ी हैं।
गोमूत्र संग्रह के एवज में मिलने वाला कमीशन महिलाओं के लिए नियमित अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकता है। योजना का विस्तार होने पर अधिक ग्रामीण महिलाओं को इससे जोड़ने की संभावना है।
जड़ी-बूटियों के साथ तैयार किए जा रहे खेती के उत्पाद
एकत्र किए गए गोमूत्र का उपयोग खेती के लिए उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है। गोमूत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर खेतों में इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन्हें समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
इस मॉडल का उद्देश्य गोमूत्र आधारित उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहित करना भी है। इससे गोवंश से मिलने वाले उत्पादों के उपयोग के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और बाजार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
दूध के साथ गोमूत्र से भी अतिरिक्त आमदनी का प्रयास
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन से होने वाली आय मुख्य रूप से दूध और दुग्ध उत्पादों पर निर्भर रहती है। इस पहल के जरिए गोमूत्र को भी आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
10 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद होने पर पशुपालकों को गोवंश से अतिरिक्त आमदनी मिल सकती है। खरीद की दर भविष्य में 20 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाने की योजना सफल होती है तो इससे पशुपालकों की आय में और वृद्धि की संभावना है।
गो संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक खेती को जोड़ने का प्रयास
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, बुलंदशहर में शुरू हुआ यह मॉडल गो संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक खेती को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। गांवों से गोमूत्र का संग्रह, महिलाओं को कमीशन, उससे खेती के लिए उत्पाद तैयार करना और फिर उन्हें किसानों तक पहुंचाना—इस पूरी प्रक्रिया को स्थानीय आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों के आधार पर इसे प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में विस्तार देने की योजना है। इससे गोमूत्र संग्रह केंद्रों का नेटवर्क विकसित होने के साथ पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर और गो संरक्षण को आर्थिक आधार मिलने की उम्मीद है।
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