दीपोत्सव से पहले अयोध्या को मिलेगी दशरथ पथ की सौगात, 92 फीसदी काम पूरा
Ayodhya to get Dashrath Path before Deepotsav, 92% work completed
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Lucknow, 10 Aug, 2026 06:24 AMअयोध्या, (IPN)। अयोध्या में दीपोत्सव से पहले एक और बड़ी विकास परियोजना आकार लेने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर 418.98 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा 15.39 किलोमीटर लंबा दशरथ पथ रामनगरी की यातायात व्यवस्था और धार्मिक पर्यटन को नई गति देगा। साकेत पेट्रोल पंप से बिल्वहरी घाट स्थित महाराज दशरथ के समाधि स्थल तक बनने वाला यह मार्ग 14 मीटर चौड़ा फोरलेन होगा।
परियोजना का करीब 92 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और दीपोत्सव से पहले इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मार्ग पर आधुनिक लाइटिंग, डिवाइडर और करीब एक मीटर चौड़े फुटपाथ की व्यवस्था होगी। इससे वाहनों के सुगम आवागमन के साथ पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी बेहतर होगी। दशरथ पथ के बनने से शहर के अंदरूनी इलाकों और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ धार्मिक पर्यटन के बढ़ते दबाव को संभालने में भी मदद मिलेगी।
यातायात व्यवस्था को मिलेगी राहत
लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के सहायक अभियंता शशांक पाण्डेय के मुताबिक दशरथ पथ परियोजना पर तेजी से काम कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि करीब 92 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। फोरलेन मार्ग के शुरू होने से शहरवासियों को जाम से राहत मिलने और आवागमन का समय कम होने की उम्मीद है।
दशरथ पथ पर दिखेगा योग और शौर्य का संगम
दशरथ पथ को केवल यातायात मार्ग के रूप में ही विकसित नहीं किया जा रहा, बल्कि इसे अयोध्या की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान से भी जोड़ा जा रहा है। अयोध्या विकास प्राधिकरण की ओर से करीब 82.68 लाख रुपये की लागत से यहां 30 मुद्रा स्तंभ स्थापित किए जाएंगे।
लगभग हर 500 मीटर की दूरी पर एक स्तंभ लगाया जाएगा। इनमें 15 स्तंभों पर योग मुद्राएं और 15 पर शस्त्र मुद्राएं प्रदर्शित होंगी। करीब छह फीट ऊंचे इन स्तंभों के जरिए भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा, वीरता और सनातन परंपरा की झलक दिखाई जाएगी।
वायु, अग्नि और आयु जैसी योग मुद्राओं के साथ शस्त्र मुद्राएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगी। रात में आकर्षक प्रकाश व्यवस्था के बीच ये स्तंभ दशरथ पथ की सुंदरता को और बढ़ाएंगे।
दशरथ पथ के निर्माण से आधुनिक सुविधाओं के साथ अयोध्या की त्रेतायुगीन स्मृतियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इसके पूरा होने के बाद रामनगरी में धार्मिक पर्यटन और यातायात कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी।

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