अयोध्या के बाद अब बिठूर की धार्मिक यात्रा, 54 श्रद्धालुओं का दल रवाना

After Ayodhya, now a group of 54 devotees leave for Bithoor for religious pilgrimage.

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Lucknow, 2 Nov, 2026 02:11 AM
अयोध्या के बाद अब बिठूर की धार्मिक यात्रा, 54 श्रद्धालुओं का दल रवाना

डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल से सरोजनीनगर में धार्मिक यात्राओं की शृंखला को मिला नया विस्तार; अब तक 10 हजार से अधिक श्रद्धालु कर चुके हैं अयोध्या धाम के दर्शन

लखनऊ, 1 नवंबर 2026 (आईपीएन)। डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर सरोजनीनगर में श्रद्धालुओं को देश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों के दर्शन कराने की यात्रा शृंखला को आगे बढ़ाते हुए रविवार को बिठूर यात्रा का शुभारंभ किया गया। आशियाना स्थित सीएमएस विद्यालय से 54 श्रद्धालुओं का दल बिठूर के लिए रवाना हुआ।

इससे पहले इस शृंखला के अंतर्गत रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा, करतारपुर साहिब दर्शन यात्रा, भवरेश्वर धार्मिक यात्रा और खाटूश्याम दर्शन यात्रा का आयोजन किया जा चुका है। अयोध्या धाम की यात्रा निरंतर जारी है, जिसके माध्यम से अब तक 10 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। इसी पहल को नया विस्तार देते हुए बिठूर यात्रा शुरू की गई है।

बिठूर के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के करेंगे दर्शन

यात्रा के दौरान श्रद्धालु ब्रह्माघाट, सीताघाट, प्राचीन शिव मंदिर, नानाराव पेशवा स्मारक, वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश आश्रम के दर्शन करेंगे। इन स्थलों के माध्यम से उन्हें भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और देश के गौरवशाली इतिहास को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।

ब्रह्मावर्त के नाम से प्रसिद्ध बिठूर रामायण की विरासत और सनातन आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि तथा माता सीता और लव-कुश की स्मृतियों से जुड़ी पावन भूमि है।

जनसेवा के साथ आस्था और संस्कृति के संरक्षण की पहल

डॉ. राजेश्वर सिंह की इस पहल में जनकल्याण को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सहायता के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना से भी जोड़ा जा रहा है। तीर्थयात्राएं श्रद्धालुओं के लिए केवल धार्मिक स्थलों के दर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार, समाज और परंपराओं के बीच आत्मीय संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी हैं।

बिठूर के घाट, प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक स्मारक श्रद्धालुओं को आस्था के साथ देश के अतीत से परिचित कराते हैं। वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश आश्रम से जुड़ी परंपराएं रामायण की सांस्कृतिक स्मृतियों को जीवंत करती हैं, वहीं नानाराव पेशवा स्मारक राष्ट्र के इतिहास और स्वतंत्रता चेतना की याद दिलाता है।

अयोध्या धाम यात्रा के माध्यम से 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के बाद बिठूर यात्रा का शुभारंभ सरोजनीनगर में धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक जागरूकता और जनसेवा के इस प्रयास को नया आयाम देता है। 54 श्रद्धालुओं के साथ शुरू हुई यह यात्रा आस्था, अध्यात्म और भारतीय परंपराओं से जन-जन को जोड़ने की दिशा में एक और पहल है।

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