पोस्ट टीबी रोगियों के लिए विश्व टीबी दिवस पर स्थापित होगी एक नई क्लीनिक : डॉ0 सूर्यकान्त
A New Clinic for Post-TB Patients to be Established on World TB Day: Dr. Suryakant
IPN Live
Lucknow, 23 Mar, 2026 07:05 PMटीबी के रोगियों के लिए पोस्ट टीबी डिसीज क्लीनिक वरदान साबित होगी : डा0 सोनिया नित्यानन्द कुलपति केजीएमयू
लखनऊ, (IPN)। रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष ने विश्व टीबी दिवस की पूर्व संध्या पर बताया कि एक अध्ययन के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत टीबी के रोगियों के उपचार के बाद भी फेफड़े में धब्बें/घाव/फाइब्रोसिस/कैल्सीफिकेशन/कोलैप्स तथा सांस की नलियों में रूकावट जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं, जिससे रोगी को टीबी के इलाज के बन्द होने के बाद भी खांसी/सांस व अन्य तकलीफों का सामना करना पड़ता है। उनको पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केंद्र में अब पूरी तरह से निःशुल्क उपचार प्रदान किया जायेगा। यह घोषणा पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केंद्र के संस्थापक प्रभारी व रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा0 सूर्यकान्त ने की। सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स ड्रग रेजिसन्टेन्ट टी.बी. केयर के संस्थापक प्रभारी डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अन्तर्गत ऐसे पोस्ट टीबी डिसीज के रोगियों के उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। विश्व टीबी दिवस पर 24 मार्च 2026 से एक नई पोस्ट टीबी डिसीज क्लीनिक का शुभारम्भ किया जायेगा। देश में केजीएमयू पहली संस्था होगी जो कि इस तरह की सुविधा शुरू करेगी।
डा0 सोनिया नित्यानन्द, कुलपति, केजीएमयू ने कहा कि टीबी से उबर चुके रोगियों को नई जिंदगी देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में “पोस्ट टीबी डिज़ीज़ क्लीनिक” एक वरदान के रूप में साबित होगी।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम नार्थ जोन टास्ट फोर्स के चेयरमैन डा0 सूर्यकान्त ने कहा कि पोस्ट टीबी डिसीज के रोगियों के लिए शोध के द्वारा यह सिद्ध हो चुका है कि पोस्ट टीबी डिसीज के रोगियों की पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन की आवश्यकता पड़ती है। इस पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन के सह प्रभारी डा0 अंकित कुमार ने बताया कि पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केन्द्र में सांस के रोगों के विशेषज्ञ, फिजियोथैरेपिस्ट, डाइटिशियन, काउंसलर, सोशल वर्कर आदि की एक पूरी टीम की आवश्यकता होती है जो कि रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में मौजूद है। अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय शोधों के आधार पर यह देखा गया है कि तीन महीने के पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन के प्रयोग से रोगियों को काफी आराम मिल जाता है, साथ ही साथ उनके जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ जाती है।
पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन टीबी के उपचार के बाद के लिए एक आधुनिक चिकित्सा विधा है, जिसके माध्यम से इन रोगियों को कैसे उनका जीवन गुणवत्ता पूर्वक बनाया जा सकता है और कैसे उनकी रोज़मर्रा की परेशानियां को कम किया जा सकता है, सिखाया जाता है। साथ ही ऐसे रोगियों की कार्यक्षमता एवं पोषण को कैसे बढ़ाया जा सकता है, इसके लिए पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन का प्रयोग किया जाता है।
ज्ञात रहे कि किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में एक पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केंद्र स्थापित है, जो कि प्रदेश का सरकारी क्षेत्र का पहला केन्द्र है। इस केन्द्र में सांस के रोगी जैसे- अस्थमा, सीओपीडी, इंटरस्टीशियल लंग डिजीज जिनकी सांस फूलती है या अन्य परेशानी रहती है, ऐसे रोगियों को कुछ शारीरिक व्यायाम, पोषण सलाह तथा काउंसलिंग और कुछ व्यायाम के माध्यम से सांस के रोगियों की जीवन की गुणवत्ता और उनकी कार्य करने की क्षमता को बढ़ाने की कोशिश की जाती है। इसमें कुछ योग, व्यायाम, प्राणायाम, ध्यान की भी सलाह दी जाती है। इस पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केंद्र में रोगियों को डॉक्टर की सलाह पर पंजीकृत किया जाता है। उनकी काउंसलिंग के बाद उनको पोषण की सलाह दी जाती है। रोगी को प्रारंभ में केंद्र में आना पड़ता है और आवश्यकता अनुसार रोगी को ऑनलाइन सेशन के द्वारा भी प्रशिक्षित किया जाता है।

No Previous Comments found.