संसद की तर्ज पर यूपी विधानसभा विधायकों के लिए लायी 'संसदीय पद्धति और प्रक्रिया'
UP Assembly introduces 'parliamentary system and procedure' for MLAs on the lines of Parliament
IPN Live
Lucknow, 28 Jun, 2026 05:33 PMलखनऊ, (IPN)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे ने नव निर्वाचित विधायकों को सदन में मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए संसदीय पद्धति और प्रक्रिया नामक पुस्तक का लेखन किया है। उनका मानना है कि नवनिर्वाचित विधायक यदि इस पुस्तक को पढ़ते और गौर से समझते हैं तो जनहित के मुद्दों को विधानसभा में उठाने में वह ज्यादा सक्षम होंगे और प्रभावी ढंग से विधायक के रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकेंगे।
इस संबंध में प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दुबे ने आईपीएन से विशेष बातचीत में कहा कि विधानसभा मुख्य रूप से प्रक्रिया आधारित प्रतिष्ठान है और यहां प्रक्रिया का महत्व होता है। विधानसभा के अंदर जो भी विषय जिन पर चर्चा होती है, वाद विवाद होता है उनके सबके बारे में एक प्रक्रिया नियमावली है। चूंकि प्रक्रिया नियमावली और प्रक्रिया की भाषा दुरुह होती है। इसलिए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के साथ हुई चर्चा में ऐसा विचार किया गया कि प्रक्रिया की एक व्याख्या लिखी जाए जिससे माननीय सदस्यों को, पत्रकारों को और जिन छात्रों को संसदीय पद्धति और प्रक्रिया में रूचि है उनके लिए ऐसा अभिलेख तैयार किया जाए जिससे कि सरल रूप में यह उनके सामने प्रस्तुत हो और उसका वह उपयोग कर सकें। श्री दुबे के मुताबिक विशेष रूप से जब नवनिर्वाचित विधायक आएंगे जब विधानसभा गठित होंगी तो उनके लिए यह पुस्तक काफी उपयोगी होगी। पुस्तक में विधानसभा से संबंधित जितने भी विषय हैं प्रश्न हो, बजट हो चाहे राज्यपाल का अभिभाषण हो सभी के बारे में प्रक्रिया को व्याख्यापित किया गया है।
श्री दुबे के मुताबिक इस पुस्तक को लिखने के दौरान यह प्रयास किया गया है कि आने वाले समय में यह पुस्तक विधानसभा के लिए उसी तरह से उपयोगी हो जिस तरह से संसद में कौल और शंकधर द्वारा लिखित पुस्तक संसदीय पद्धति और प्रक्रिया चल रही है।
एक सवाल के जवाब में दुबे ने बताया कि नवनिर्वाचित विधायक यदि इस पुस्तक को पढ़ते हैं, गौर से इसको समझते हैं तो जनहित के मुद्दों को यहां उठाने में वह ज्यादा सक्षम होंगे और प्रभावी ढंग से विधायक के रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं।
बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा भारत की पहली विधानसभा है जिसमें प्रमुख सचिव द्वारा संसदीय पद्धति और प्रक्रिया पुस्तक का लेखन किया गया है। यूपी विधानसभा के लिए एक और गौरव की बात है वह यह कि यहां के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे से देशभर की तमाम विधानसभाओं के सचिव राय मशवरा करते हैं।
खास बात यह है कि तमाम विषयों को लेकर चर्चा में रहने वाले प्रदीप दुबे पूरी मजबूती के साथ अपने कार्यों को निष्पादित करते आ रहे हैं।
बता दें कि यूपी विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना के दिशा निर्देशन में प्रदीप दुबे द्वारा लिखी गई पुस्तक संसदीय पद्धति और प्रक्रिया का संपादन कार्य शोध एवं संदर्भ अधिकारी राजेश कुमार ने किया है। शुरुआत के दो पेज में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना प्राक्कथन दिया है। सतीश महाना ने तीन पेज की प्रस्तावना तो संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने दो पेज की आमुख दी है। श्री दुबे द्वारा तीन पेज की भूमिका लिखने के बाद विषय सूची है।
814 पेज की इस पुस्तक में 33 अध्याय समाहित हैं। अध्यायों में विषयों की बात करें तो प्रथम अध्याय उत्तर प्रदेश विधान मंडल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, विधानमंडल का प्राधिकार तथा अधिकार क्षेत्र, विधानमंडल का गठन एवं संरचना, राज्यपाल एवं विधान मंडल का परस्पर संबंध, सदनों के बीच संबंध, विधानसभा के पीठासीन अधिकारी, अध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य, विधानमंडल के सदनों को आहूत करना, सत्रावसान एवं विघटन, राज्यपाल का सभा को अभिभाषण संदेश तथा संसूचनाएं, सदस्यों का आचरण, सदस्यों के वेतन भत्ते और अन्य सुख सुविधाएं, विधानसभा में राजनीतिक दलों को मान्यता, सदस्यों द्वारा शपथ, प्रतिज्ञान और सभा में स्थान ग्रहण, सभा में सदस्यों की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति, सभा की बैठकें, कार्य सूची एवं सदन का कार्यक्रम, प्रश्न, अभिलंबनीय लोक महत्व के विषयों पर ध्यान आकृष्ट करना, अभिलंबनीय लोक महत्व के विषयों पर कार्य स्थगन, औचित्य प्रश्न, विधायन, संकल्प, प्रस्ताव, मंत्री परिषद में अविश्वास तथा विश्वास प्रस्ताव, आय व्यय प्रस्तुत किया जाना, संसदीय समितियां, सामान्य प्रक्रिया नियम, विशेषाधिकार एवं अवमान के प्रश्न, याचिकाएं और अभ्यावेदन, सभा के पटल पर रखे जाने वाले पत्र अथवा सूचनाएं, विधानसभा में प्रयोग की जाने वाली भाषाएं, सभा संसदीय समितियां की कार्यवाहियों का वृतांत तैयार किया जाना और अंत में विधानमंडल और न्यायपालिका नाम का 33 वां अध्याय है।
814 पेज की इस पुस्तक में 33 अध्याय समाहित हैं। अध्यायों में विषयों की बात करें तो प्रथम अध्याय उत्तर प्रदेश विधान मंडल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, विधानमंडल का प्राधिकार तथा अधिकार क्षेत्र, विधानमंडल का गठन एवं संरचना, राज्यपाल एवं विधान मंडल का परस्पर संबंध, सदनों के बीच संबंध, विधानसभा के पीठासीन अधिकारी, अध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य, विधानमंडल के सदनों को आहूत करना, सत्रावसान एवं विघटन, राज्यपाल का सभा को अभिभाषण संदेश तथा संसूचनाएं, सदस्यों का आचरण, सदस्यों के वेतन भत्ते और अन्य सुख सुविधाएं, विधानसभा में राजनीतिक दलों को मान्यता, सदस्यों द्वारा शपथ, प्रतिज्ञान और सभा में स्थान ग्रहण, सभा में सदस्यों की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति, सभा की बैठकें, कार्य सूची एवं सदन का कार्यक्रम, प्रश्न, अभिलंबनीय लोक महत्व के विषयों पर ध्यान आकृष्ट करना, अभिलंबनीय लोक महत्व के विषयों पर कार्य स्थगन, औचित्य प्रश्न, विधायन, संकल्प, प्रस्ताव, मंत्री परिषद में अविश्वास तथा विश्वास प्रस्ताव, आय व्यय प्रस्तुत किया जाना, संसदीय समितियां, सामान्य प्रक्रिया नियम, विशेषाधिकार एवं अवमान के प्रश्न, याचिकाएं और अभ्यावेदन, सभा के पटल पर रखे जाने वाले पत्र अथवा सूचनाएं, विधानसभा में प्रयोग की जाने वाली भाषाएं, सभा संसदीय समितियां की कार्यवाहियों का वृतांत तैयार किया जाना और अंत में विधानमंडल और न्यायपालिका नाम का 33 वां अध्याय है।

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