केजीएमयू ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस, आयोजित की प्रतियोगिताएं

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Lucknow, 21 Feb, 2022 07:39 PM

लखनऊ, 21 फरवरी 2022 (आईपीएन)। अंतरराष्ट्रीय भाषा दिवस के अवसर पर केजीएमयू पैरामेडिकल विज्ञान संकाय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया गया। इस बार अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की थीम - *बहुभाषी शिक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग चुनौतियां एवं अवसर* है।

इस  कार्यक्रम में 2 प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। पहली प्रतियोगिता रंगोली एवं दूसरी स्वरचित कविता प्रतियोगिता थी 

इस कार्यक्रम के जज डॉ आर. के. दीक्षित, डॉ अमिया अग्रवाल,  डॉ ज्योति चोपड़ा, एवं डॉ शिउली थी।

इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता  अधिष्ठाता पैरामेडिकल विज्ञान संकाय प्रोफेसर विनोद जैन ने बताया कि हिंदी भाषा अपनी मातृभाषा है हम जब पैदा होते हैं और हमारी मां जिस भाषा को हमें सिखाती है उसी को मातृभाषा कहते हैं मैंने कहा हमारी हर किताबें अंग्रेजी में आती हैं जबकि हम चाहते हैं कि हम चाहे वो दंत विज्ञान संकाय की हो, चाहे वह मेडिकल की किताबें हो चाहे वह पैरामेडिकल के किताबे हम सबका हिंदी में भी उल्लेख होना चाहिए।

इसे कहते साथ उन्होंने सारे प्रतिभागियों को बधाइयां दी रंगोली प्रतियोगिता में समूह - 6 प्रथम स्थान एवं समूह-10 द्वितीय स्थान, जबकि समूह - 9 तृतीय स्थान प्राप्त किए।

इसी प्रकार स्वरचित कविता प्रतियोगिता में दीपमाला तिवारी प्रथम स्थान दिव्यांशी गुप्ता द्वितीय स्थान एवं अदिति पटेल तृतीय स्थान प्राप्त प्राप्त  किए ।


केजीएमयू ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस, आयोजित की प्रतियोगिताएं

डॉ आरके दीक्षित ने कहा कि हम चाहे शहर चले जाएं या गांव हमें अपनी भाषा को नहीं भूलना चाहिए और हमें गौरव से अपनी भाषा में बात करनी चाहिए ।

डॉ अमीय अग्रवाल ने  कविता के माध्यम से देश के जवानों कोरोना काल में किए किए गए काम एवं मरीजों को याद किया और बताया वह खाली दोपहर सनसनी हमे डरा जाती थी  उन्होंने कहा किसी भी कार्य को करने के लिए हमें दिलो जान से लगना पड़ता है इसलिए अगर हमें फिर से अपनी भाषा को वापस लाना है तो हमें उसके लिए फिर से मेहनत करनी पड़ेगी ।

डॉ ज्योति चोपड़ा ने बताया कि हम बहुत सारे एप्स का यूज कर रहे हैं जिसके द्वारा हम लोगों की बातों को आसानी से ट्रांसलेट करके समझ लेते हैं परंतु अपनी हिंदी भाषा में अटकते हैं।

डॉ  शिवली ने बताया कि हमें इस तरीके के प्रोग्राम करते रहना चाहिए जिससे हमारी संस्कृति हमारी मातृभाषा में झलके ! 

इस कार्यक्रम का संचालन सोनिया शुक्ला ने किया इस कार्यक्रम को सफल बनाने में आकांक्षा दीप, रश्मि वर्मा, अनामिका राजपूत, सचिन शर्मा एवं मनीष का विशेष योगदान रहा ।

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