महिला सशक्तिकरण के लिए परिवार की सोच में बदलाव जरूरी : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
Change in family mindset is necessary for women empowerment: Governor Anandiben Patel
IPN Live
Lucknow, 1 Sep, 2026 10:59 AMशतायु संघ की यात्रा में मातृशक्ति का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण : विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना
बेटियों को पढ़ाएं, आगे बढ़ाएं और समान अवसर दें : आनंदीबेन पटेल
महिलाओं की सहभागिता के बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं : राज्यपाल
लखनऊ, (आईपीएन)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सोमवार को ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ पुस्तक पर परिचर्चा का आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, राष्ट्रीय महिला आयोग की सलाहकार समिति की सदस्य एवं पुस्तक की लेखिका डॉ. शोभा विजेंद्र सहित अन्य गणमान्यजन मौजूद रहे।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ जैसे महत्वपूर्ण एवं समसामयिक विषय पर लिखी गई पुस्तक की परिचर्चा में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने पुस्तक की लेखिका डॉ. शोभा विजेंद्र को महिलाओं की भूमिका और सहभागिता जैसे विषय को समाज के सामने लाने तथा देशभर में संवाद की श्रृंखला को आगे बढ़ाने के लिए बधाई दी।
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा को समझने के साथ-साथ इसमें महिलाओं की भूमिका और सहभागिता को समझना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में उन्होंने समाज में महिलाओं की स्थिति और महिला सशक्तिकरण की यात्रा में व्यापक बदलाव देखा है। समय के साथ महिलाओं के प्रति परिवार और समाज की सोच में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
महिला सशक्तिकरण की शुरुआत परिवार से होती है
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की शुरुआत परिवार से होती है। उन्होंने अपने बचपन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके गांव में विद्यालय नहीं था और उनकी शिक्षा लड़कों के विद्यालय में हुई, जहां वह अकेली छात्रा थीं। उन्होंने कहा कि उनके पिता बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरूक थे।
उन्होंने कहा कि जब परिवार यह तय कर लेता है कि बेटी को पढ़ाना है तो उसके लिए रास्ते स्वतः निकल आते हैं। इसलिए बेटियों की शिक्षा के प्रति परिवार की सोच में बदलाव बेहद जरूरी है।
राज्यपाल ने कहा कि बेटा और बेटी दोनों को समान अवसर मिलना चाहिए। उनकी शिक्षा और विकास पर समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। बेटियों के प्रति भेदभाव की मानसिकता को समाप्त करने के लिए शिक्षा और अनुभव के माध्यम से परिवार की सोच में परिवर्तन लाना जरूरी है।
राज्य विश्वविद्यालयों के गांव गोद लेने की पहल का किया उल्लेख
राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा गांवों को गोद लेकर किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक राज्य विश्वविद्यालय ने पांच गांवों को गोद लिया है। इन गांवों के बच्चों को विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रेरक प्रस्तुतियों का अवसर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए तैयार कर रहे हैं। ऐसे प्रयास बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें अपने भविष्य के लिए प्रेरित करते हैं।
स्टार्टअप से लेकर कृषि तक बेटियां बना रहीं अपनी पहचान
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आज परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और बेटियां विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। राज्य विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में पुरस्कार प्राप्त करने वालों में लड़कियों की संख्या उल्लेखनीय रूप से अधिक दिखाई देती है। स्टार्टअप के क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में बेटियां अपनी पहचान बना रही हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को समाज की अनावश्यक टिप्पणियों की चिंता किए बिना सही सोच और सही दिशा के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना जरूरी
राज्यपाल ने गुजरात में महिला एवं बाल कल्याण विभाग में अपने कार्यकाल का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उस समय अनेक महिलाओं के पास जमीन अथवा संपत्ति के दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें व्यवसाय के लिए ऋण प्राप्त करने में कठिनाई होती थी।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था में आवश्यक बदलाव कर महिलाओं के नाम पर संपत्ति संबंधी दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया, जिससे महिलाओं को आसानी से ऋण मिलने लगा और वे अपना व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनने लगीं। आज बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं का व्यवसाय संचालित कर रही हैं।
उन्होंने ‘ड्रोन दीदी’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाएं कृषि क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से बीज और दवा के छिड़काव जैसी सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
महिलाओं के स्वास्थ्य को सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण आधार बताया
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि महिलाएं अक्सर परिवार की जिम्मेदारियों के चलते अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा करती हैं। इसलिए 40 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच कराई जानी चाहिए। ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय से जांच और उपचार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बालिकाओं के एचपीवी टीकाकरण का उल्लेख करते हुए अभिभावकों से अपनी बेटियों को एचपीवी वैक्सीन लगवाने का आह्वान किया।
नशामुक्त समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अहम
राज्यपाल ने नशामुक्त समाज के निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना आवश्यक है।
उन्होंने पूर्वांचल की महिलाओं द्वारा गठित ‘ग्रीन आर्मी’ के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये महिलाएं नशामुक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्य कर रही हैं। नदी में स्नान के दौरान फेंके गए कपड़ों को एकत्र कर उनकी सफाई और सिलाई कर उपयोगी उत्पाद तैयार करने का काम भी महिलाएं कर रही हैं, जिससे आत्मनिर्भरता के साथ पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिल रहा है।
संघ की शताब्दी यात्रा में मातृशक्ति का योगदान महत्वपूर्ण : सतीश महाना
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। संघ के कार्य में मातृशक्ति की भूमिका को किसी भी दृष्टि से कम करके नहीं आंका जा सकता।
उन्होंने कहा कि संघ की विचारधारा में महिलाओं के सम्मान और उनकी सहभागिता को सदैव विशेष स्थान मिला है। अपने बचपन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी मां संघ के स्वयंसेवकों और प्रचारकों के प्रति स्नेह, सम्मान और आत्मीयता रखती थीं।
महाना ने कहा कि संघ में महिलाओं का सम्मान सर्वोच्च है और उनका सहयोग परिवार, सेवा तथा समाज को साथ लेकर चलने की शक्ति प्रदान करता है। संघ की शताब्दी यात्रा में मातृशक्ति के योगदान को सामने लाने का यह प्रयास महत्वपूर्ण है।
नारी परिवार ही नहीं, समाज और राष्ट्र की भी शक्ति : बेबी रानी मौर्य
महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि नारी केवल परिवार की शक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की भी शक्ति है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उन्हें अवसर के साथ नेतृत्व और निर्णय लेने का अधिकार भी मिलना चाहिए।
उन्होंने ग्रामीण महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि महिला सहभागिता पूरे समाज की प्रगति का आधार है। महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें शिक्षा, अवसर और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।
महिलाओं की सामाजिक सहभागिता राष्ट्र निर्माण की ताकत : अपर्णा यादव
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने भी मातृशक्ति की सामाजिक सहभागिता और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से समाज में सकारात्मक बदलाव को गति मिलती है और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया मजबूत होती है।
महिलाओं के अनदेखे योगदान को दस्तावेज के रूप में सामने लाती है पुस्तक : शोभा विजेंद्र
पुस्तक की लेखिका एवं राष्ट्रीय महिला आयोग की सलाहकार समिति की सदस्य डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ पुस्तक संघ के दर्शन को एक सीमा तक प्रतिबिंबित करते हुए विशेष रूप से महिलाओं के सम्मान, सशक्तीकरण और स्वाभाविक सहभागिता को सामने लाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि पुस्तक देशभर की उन महिलाओं के संघर्ष, निष्ठा और अनदेखे योगदान को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करती है, जो विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा रही हैं। महिला केवल दर्शक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की यात्रा की सक्रिय सहभागी है।
कार्यक्रम के दौरान ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ विषय पर आधारित लघु फिल्म का प्रसारण भी किया गया। फिल्म में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा, संघ के कार्यों में महिलाओं की सहभागिता, मातृशक्ति के सम्मान तथा राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका को प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल को ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ पुस्तक एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेविका समिति की क्षेत्रीय प्रचारिका शशि, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा बिष्ट, सुश्री निदर्शना गोवानी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
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