परदे का 'क्रांतिवीर' चला गया: खामोश हो गई नाना पाटेकर की गूंजती आवाज, सिसक उठा पूरा देश
The 'revolutionary' of the screen is gone: Nana Patekar's resonant voice fell silent, the whole country sobbed.
IPN Live
Lucknow, 8 Oct, 2026 11:29 AMगोवा में 75 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, राजकीय सम्मान के साथ होगी अंतिम विदाई; पीएम मोदी से लेकर अक्षय कुमार तक ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि
उनके निधन की खबर ने फिल्म जगत ही नहीं, पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। सोशल मीडिया पर करोड़ों प्रशंसक अपने 'क्रांतिवीर' को नम आंखों से याद कर रहे हैं।
रात दर्द में गुजरी, सुबह हमेशा के लिए खामोश हो गए नाना
जानकारी के मुताबिक गोवा के डोना पाउला स्थित आवास पर तड़के उनकी तबीयत बिगड़ गई। सीने में दर्द और बेचैनी की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं। चिकित्सकों ने करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर और कार्डियक मसाज दी, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उनका निधन कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ।
एक्टर नहीं, एक विचार थे नाना पाटेकर
नाना पाटेकर उन बिरले कलाकारों में थे जिन्होंने कभी अभिनय नहीं किया, बल्कि अपने किरदारों को जीया। क्रांतिवीर, तिरंगा, प्रहार, परिंदा, यशवंत, अब तक छप्पन, अपहरण, राजनीति और वेलकम जैसी फिल्मों ने उन्हें करोड़ों लोगों के दिलों में अमर कर दिया। उनकी संवाद अदायगी, तीखी आंखें और व्यवस्था पर चोट करते संवाद आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
पीएम मोदी बोले: देश ने अपना एक सच्चा सपूत खो दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाना पाटेकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वे एक बेहतरीन कलाकार थे जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित था और उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से समाज की विसंगतियों पर करारा प्रहार किया।
अक्षय कुमार का छलका दर्द
अभिनेता अक्षय कुमार ने भावुक श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "नाना जी नहीं रहे... इस पर यकीन करना मुश्किल है।" उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर जैसे कलाकार सदियों में एक बार पैदा होते हैं और उनकी यादें हमेशा साथ रहेंगी।
राजकीय सम्मान के साथ होगी अंतिम विदाई
महाराष्ट्र सरकार ने नाना पाटेकर के सिनेमा और रंगमंच में असाधारण योगदान को देखते हुए उनके अंतिम संस्कार को राजकीय सम्मान के साथ संपन्न कराने का निर्णय लिया है। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने इसकी पुष्टि की है।
सिर्फ फिल्मों के नहीं, किसानों और सैनिकों के भी थे नायक
नाना पाटेकर की पहचान केवल एक अभिनेता तक सीमित नहीं थी। किसानों की मदद हो, सैनिकों का सम्मान हो या जरूरतमंदों के लिए खड़े होने की बात, उन्होंने हमेशा समाज के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाई। यही वजह है कि उनके चाहने वाले केवल सिनेमा प्रेमी नहीं, बल्कि हर वर्ग के लोग थे।
अलविदा नाना...
आज भारतीय सिनेमा ने सिर्फ एक अभिनेता नहीं खोया, बल्कि एक ऐसी शख्सियत खो दी जिसने अपने दमदार अभिनय, बेबाक व्यक्तित्व और राष्ट्रप्रेम से एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित किया।
परदे पर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाला "क्रांतिवीर" आज भले ही चला गया हो, लेकिन उसकी आवाज, उसके संवाद और उसका संघर्ष हमेशा जीवित रहेगा।
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