भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में 26 मई से ग्रीष्मकालीन कार्यशाला का शुभारंभ
Summer workshop to commence from May 26 at Bhatkhande University of Culture, Lucknow
IPN Live
Lucknow, 26 May, 2026 06:44 PMलखनऊ, (IPN)। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा आयोजित ‘ग्रीष्मकालीन संगीत एवं कला कार्यशाला’ का आज विश्वविद्यालय परिसर में अत्यंत उत्साह एवं गरिमा के साथ शुभारंभ हुआ। एक माह तक संचालित होने वाली यह विशेष कार्यशाला 26 मई से 25 जून 2026 तक आयोजित की जा रही है।
कार्यशाला में प्रतिभागी बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं उनके बढ़ते उत्साह एवं कला के प्रति रुचि को दर्शाता है। विशेष रूप से इस वर्ष सर्वाधिक आवेदन कथक नृत्य में प्राप्त हुए हैं, जिससे इस पारंपरिक नृत्य शैली के प्रति युवाओं एवं प्रतिभागियों का विशेष आकर्षण परिलक्षित होता है।
कार्यशाला में सभी आयु वर्ग के प्रतिभागियों को भारतीय शास्त्रीय कलाओं की विविध विधाओं को सीखने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान कर रही है। इसके अंतर्गत शास्त्रीय संगीत, वादन, नृत्य एवं ललित कला की विभिन्न विधाओं में सुनियोजित एवं गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यशाला में भारतीय शास्त्रीय गायन, सुगम संगीत एवं लोकगीत के साथ-साथ तबला, पखावज, सितार, वायलिन, गिटार (वेस्टर्न), बांसुरी, हारमोनियम एवं की-बोर्ड जैसे वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण शामिल है। नृत्य विधाओं में कथक, भरतनाट्यम एवं लोकनृत्य तथा ललित कला के अंतर्गत पेंटिंग एवं क्ले मॉडलिंग (मिट्टी की कला) का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। विशेष रूप से ऑटिस्टिक एवं दिव्यांग बच्चों के लिए शास्त्रीय गायन की विशेष कक्षाओं का आयोजन इस कार्यशाला को समावेशी एवं प्रेरणादायक बनाता है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों एवं आम जनमानस में भारतीय संगीत, नृत्य एवं ललित कलाओं के प्रति रुचि जागृत करना तथा उनकी रचनात्मक प्रतिभा को विकसित एवं निखारना है।
कार्यशाला की कक्षाएँ प्रतिदिन (रविवार एवं सार्वजनिक अवकाश को छोड़कर) प्रातः 09:00 बजे से 10:00 बजे तथा 10:00 बजे से 11:00 बजे तक दो बैचों में संचालित की जा रही हैं। प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय के उच्च स्तरीय एवं अनुभवी शिक्षकों तथा प्रशिक्षकों द्वारा प्रारंभिक से उन्नत स्तर तक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को मंचीय प्रस्तुति (Stage Performance) का अवसर प्रदान किया जाएगा तथा समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए जाएंगे।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० मांडवी सिंह ने बताया कि संगीत आदि कलाएं व्यक्ति को न केवल आनन्द प्रदान करती हैं अपितु इससे उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकार है। यह कार्यशाला भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं ललित कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल औपचारिक शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर बच्चों एवं युवाओं में कला के प्रति रुचि जागृत करना भी है।
इस कार्यशाला के समन्वयक डॉ0 मनोज कुमार मिश्रा नें बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मक क्षमता को पहचानने और उसे विकसित करने का सशक्त मंच प्रदान करती हैं। ऑटिस्टिक एवं दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष कक्षाओं की सराहना करते हुए उन्होंने इसे समावेशी शिक्षा की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का परिचायक बताया। उन्होनें आशा व्यक्त की कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध होगी तथा उन्हें भारतीय सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जोड़ने में सहायक बनेगी।

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