राजधानी में कातिल बेखौफ, अपराध बेकाबू: सितंबर माह रहा हत्यारों के नाम
Murderers are fearless in the capital, crime is rampant: September was the month of murderers.
IPN Live
Lucknow, 22 Sep, 2026 07:53 AMएक सप्ताह के भीतर आधा दर्जन संगीन वारदात, फिर भी दावा, कंट्रोल में है अपराध
ए. अहमद सौदागर
लखनऊ, 22 सितंबर 2026 (आईपीएन)। राजधानी लखनऊ में अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सितंबर माह में एक के बाद एक हुई सनसनीखेज हत्याओं ने शहरवासियों को दहशत में डाल दिया है। हत्या, गला रेतने, सिर कुचलने और शव ठिकाने लगाने जैसी जघन्य वारदातों की श्रृंखला ने यह साबित कर दिया है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, जबकि पुलिस अपराध नियंत्रण के दावों में उलझी दिखाई दे रही है।
बीते एक सप्ताह के भीतर राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में आधा दर्जन से अधिक संगीन हत्याकांड सामने आए हैं। हालांकि पुलिस ने कुछ मामलों का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है, लेकिन लगातार हो रही वारदातों ने कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे पहले 9 सितंबर को तालकटोरा क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां सैलून में काम करने वाले एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी। घरेलू विवाद के चलते हुई इस वारदात ने इलाके में सनसनी फैला दी।
इसके बाद 12 सितंबर को मड़ियांव थाना क्षेत्र में थाने से कुछ ही दूरी पर 70 वर्षीय बुजुर्ग मगन तिवारी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। बताया गया कि बाइक की टक्कर को लेकर हुए विवाद के बाद बेखौफ बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। घटना ने पुलिस की सक्रियता और अपराधियों में कानून के भय पर सवाल खड़े कर दिए।
14 सितंबर को कृष्णानगर क्षेत्र के बाराबिरवा स्थित एलडीए कालोनी सेक्टर-बी में मजदूर रामबाबू मौर्या की गला रेतकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, लेकिन हत्या के पीछे की असल वजह को लेकर कई सवाल बने रहे।
15 सितंबर को कृष्णानगर क्षेत्र में ही एक महिला की सिर कूचकर हत्या कर दी गई। महिला की निर्मम हत्या ने इलाके के लोगों को झकझोर दिया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू की, लेकिन वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी।
16 सितंबर को मोहनलालगंज क्षेत्र में हत्या की एक और सनसनीखेज वारदात सामने आई। यहां एक व्यक्ति की हत्या कर उसके शव को लकड़ी के बक्से में भरकर फेंक दिया गया। शव मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस को जांच के लिए कई टीमें लगानी पड़ीं।
17 सितंबर को काकोरी थाना क्षेत्र में एक महिला की गला रेतकर हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं, वारदात के बाद हत्यारों ने शव को नहर की पटरी पर फेंक दिया। इस लोमहर्षक घटना ने ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया।
18 सितंबर को बंथरा थाना क्षेत्र के खुर्रमपुर गांव में 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला छिदाना गौतम की उनके ही घर में गला रेतकर हत्या कर दी गई। इस मामले को लेकर पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी। यह हत्याकांड पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
यदि सितंबर माह की इन घटनाओं पर गौर किया जाए तो साफ दिखाई देता है कि अपराधी लगातार पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देने के बाद कई मामलों में आरोपी फरार होने में सफल रहे। यह स्थिति तब है जब पुलिस लगातार अपराध नियंत्रण और बेहतर कानून व्यवस्था के दावे करती रही है।
जानकारों का कहना है कि आंकड़ों में अपराध नियंत्रण की तस्वीर चाहे जितनी बेहतर दिखाई जाए, लेकिन जमीनी हकीकत अलग कहानी बयां कर रही है। एक के बाद एक हो रही संगीन घटनाओं ने लोगों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों के खिलाफ हुई घटनाओं ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
हालांकि पुलिस अधिकारियों का दावा है कि अधिकांश मामलों के खुलासे के लिए टीमें काम कर रही हैं और अपराधियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा, लेकिन लगातार हुई हत्याओं की यह श्रृंखला राजधानी में पुलिस के गिरते इकबाल और अपराधियों के बढ़ते मनोबल की गवाही देती नजर आ रही है।
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