राहुल गांधी के बयानोें से कांग्रेस की हो रही बुरी फजीहत
कांग्रेस नेता राहुल गांधी आजकल अपने आप को बहुत ही चतुर व सक्रिय राजनीतिज्ञ दिखाने की कोेशिश कर रहे हैं वह अपने भाषणोें व टिवटर पर अपना अदभुत ज्ञान देने का हरसंभव हर सुबह नया प्रयास करते हुए दिखलायी पड़ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के वह सभी नेता जो केवल जी हुजूरी के बल पर अपनी राजनैतिक दुकान चला रहे हैं। वह भी केवल उनकी हां में हां ही मिला रहे हैं जिसके कारण आज कांग्रेस पूरे देशभर से साफ होने के लिए तत्पर हो गयी है।
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Lucknow, 5 Feb, 2022 12:29 AMमृत्युंजय दीक्षित
आईपीएन। कांग्रेस नेता राहुल गांधी आजकल अपने आप को बहुत ही चतुर व सक्रिय राजनीतिज्ञ दिखाने की कोेशिश कर रहे हैं वह अपने भाषणोें व टिवटर पर अपना अदभुत ज्ञान देने का हरसंभव हर सुबह नया प्रयास करते हुए दिखलायी पड़ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के वह सभी नेता जो केवल जी हुजूरी के बल पर अपनी राजनैतिक दुकान चला रहे हैं। वह भी केवल उनकी हां में हां ही मिला रहे हैं जिसके कारण आज कांग्रेस पूरे देशभर से साफ होने के लिए तत्पर हो गयी है। आने वाले समय में कांग्रेस के हाथ से पंजाब भी फिसल जायेगा और फिर उसके बाद जिन राज्यों मेें कांग्रेस की बची खुची सरकारें हैं वह भी चली जायेंगी, लेकिन राहुल गांधी हैं कि मानते नहीं। लगता है, राहुल कांग्रेेस को पूरी तरह से डुबाकर ही मानेंगे। राहुल गांधी या अपरिपक्व नेता हैं या फिर सुनियोजित साजिश के तहत वह घातक व विकृत बयानबाजी कर रहे हैं। राहुल गांधी की बार -बार हो रही गुप्त विदेश यात्राआंेे का सच अब देश की जनता जानना चाह रही है और वह उनके भाषणों की पडताल करना चाह रही है और उनकी सच्चाई जानकर उन्हंे कड़ी सजा देने का भी मन बना रह है। राहुल जब भी बोलने खड़े हो जाते हैं तो कोई न कोई विवाद पैदा कर देते हैं लेकिन इस बार का विवाद कुछ अधिक ही खतरनाक है और अब उन पर कड़ी कार्यवाही का समय आ गया है। राहुल गांधी अब भारात को एक राष्ट्र भी नहीं मान रहे है। उनके कथनों से क्या देशवासी सहमत हो जायेंगे, संभवत: नहीं क्योकि लोग राहुल को एक मूर्ख नेता मान रहे हैं।
संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में बहस चल रही है जिसमें कांग्रेस की ओर से बोलते हुए उन्होंने जो भाषण दिया है उससे पता चल रहा है कि वह कांग्रेसाध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी व कांग्रेस पार्टी के लिए एक गंभीर लाइलाज बीमारी हो गये हैं और जब-जब कांग्रेस उन्हें रीलांच करने का प्रयास करती है तो वह फिर से कांग्रेस को धड़ाम कर देते हैं। राहुल गांधी के भाषण से अब देश की जनता व प्रबुद्धवर्ग को केवल हंसी आती है और दुःख भी होता है दुख इसलिए होता है क्योकि उनके भाषणों को चीन और पाकिस्तान में बैठे भारत विरोधी शत्रुआंे को पसंद आता है और भारत के अंदर टुकड़े -टुकड़े गैंग व हम लेकर रहंेगे आजादी के नारे लगाने वाले लोगोे को पसंद आता है। अब राहुल गांधी पूरी तरह से टुकडे- टकड़े गैंग के नायक बन चुके हैं।
राहुल के भाषण से पता चल रहा है कि वह भारत के प्रति एक विकृत नफरत से भरे हुए हैं जो केवल भारत को बर्बाद होता हुआ और विदेशी सोच का गुलाम बनता हुआ देखना चाह रहे हैं। राहुल गांधी का भाषण हल्के में नहीं ं लिया जा सकता अपितु अब समय आ गया है कि समय रहते हुए उनके खिलाफ संविधान के दायरे में कड़ी कार्यवाही की जाये। राहुल गांधी का संसद में दिया गया भाषण भारतीय संस्कृति, सभ्यता व पहचान के खिलाफ है। राहुल गांधी का भाषण स्ंासदीय मर्यादाओं का भी घोर उल्लंघन है। राहुल गांधी ने सर्वोच्च अदालत व चुनाव आयोग का अपमान किया है और अपने भाषण में उन्होंने पेगासस का भी उल्लेख कर दिया वह भी तब जबकि सुप्रीम कोर्ट की की निगरानी मंे एक कमेटी पूरे मामले की जांच कर रही है।
राहुल गांधी का भाषण बेहद गंभीर मामला तब और अधिक बन जाता है जब वह यह कहते हैं कि मोदी सरकार की विदेश नीति की वजह से चीन और पाकिस्तान एक हो गये और फिर उसके बाद एक अमेरिकी राजनायिक को मैदान मेें उतरकर कहना पढ़ता है कि वह राहुल गांधी के बयान से कतई सहमत नहीं हो सकते। राहुल गांधी को विदेश नीति पर बोलने से पले अपनी ही पार्टी के बुजुंर्ग नेताआंे से सलाह लेकर बोलना चाहिए था क्योंकि पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने ही नटवर ंिसंह ने ही उनको करारा जवाब दे दिया है। राहुल को जवाब देते हुए नटवर सिंह ने कहाकि चीन और पाकिस्तान के बीच करीबी जवाहर लाल नेहरू के जमाने से है। इतना ही नहीं , नेहरू के समय ही देश की चीन नीति विफल हो गई थी। नटवर ंिसह ने कहाकि उन्हें आश्चर्य है कि राहुल गांशी को सही तथ्यों से अवगत नहीं कराया गया।
राहुल गांधी वास्तव में राजनीति के लिए नहीं बने हैं और अब उन्हें राजनीति को छोड़ देना चाहिए या फिर कांग्रेस पार्टी ही आगे आकर अब गांघी परिवार का उद्धार कर दे तभी कांग्रेस विचारधारा का नये सिंरे से उत्थान संभव हो सकता है। सदन में उनके बयानों से यह एक बार फिर से स्पष्ट हो गया है कि क्यों राहुल गांधी जैसे लोग सत्ता से जितना दूर रहेंगे, देश के लिए उतना ही अच्छा रहेगा। राहुल गांधी सदन में चीन पाक दोस्ती पर ही नहीं अपितु देश के अंदर केद्र व राज्य सम्बंधों पर भी बोले वह तो और भी अधिक खतरनाक था। केंद्र व राज्यांेे पर संबंध के विषय में उनके विचार भारतीय संविधान की मूल आत्मा पर करारा प्रहार है उन्होंने संसद की गरिमा और अधिकारों को तार -तार कर दिया है। राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र राज्योें मंे हस्तक्षेप नहीं कर सकता और उन्होंने बहुत ही कुटिलता के साथ उन सभी राज्यों का अपमान कर डाला है जहां पर कांग्रेस की सरकारे नहीं है। वह अपने भाषण में केरल, राजस्थान की विचारधारा को बहुत अच्छा बता रहे हैं। वह तमिलनाडु की विचारधारा को भी अच्छा बता रहे हैं और फिर पंजाब के किसानों की बहादुरी की प्रशंसा करते हैं। उनके विचार से केवल इन्हीं राज्यों मेें प्यार है, धर्म है और संस्कृति है। वह कहते है कि कंेद्र इन राज्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता अर्थात अपने कानूनों को नहीं लाद सकता । राहुल की नजर में भारत एक राष्ट्र नहीं अपितु कई राज्यों का एक समूह है और यही बयान बहुत ही आपत्तिजनक बयान है। राहुल गांधी के बयान के खिलाफ पूरे भारत में एक वैचारिक तूफान खड़ा होना चाहिए क्योेंकि राहुल गांधी वास्तव में भारत की तुलना भूतपूर्व सोवियत संघ की तरह कर रहे हैं जो अपनी गलत वामपंथी नीतियों के कारण कई टुकड़ों में विभक्त हो गया।
राहुल गांधी कह रहे हैं कि केंद्र राज्य में हस्तक्षेप नहीं कर सकता जबकि वास्तविकता यह है कि आज विगत 70 सालों की राजनीति में सबसे अधिक 93 बार राज्यों में हस्तक्षेप उनके स्वर्गीय नाना नेहरू जी से लेकर उनकी दादी श्रीमती इंदिरा गांधी सहित सभी कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों के द्वारा की गयी है।
राहुल गांधी की बात मानी जायें तो आज देश को आजादी केवल और केवल नेहरू जी की वजह से मिली और उनकी दादी इंदिरा गांधी को 32 गोलियां मारी गईं और मेरे पिता राजीव गांाधी को विस्फोट से उड़ा दिया गया। उनकी नजर में पूरा राष्ट्र केवल इन्हीं तीन लोगांेे में समाया हुआ है और विकसित व पल्लवित हुआ है।
राहुल गांधी भाषण देते समय इतना बहक गये कि जब उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ,चुनाव आयोग और पेगासस ये वो माध्यम हैं जिनका इस्तेमाल प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने लोगों की आवाज को दबाने के लिए किया। उन्होंने यहां पर भी एक बहुत बड़ी गलती कर दी है।
राहुल गांधी के न्यायपालिका पर दिये गये बयान से कई संदेश निकल रहे हैं जो बहुत घातक हैं क्योंकि विगत सात वर्षो से देश की न्यायपालिका ने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाये हैं और अपनी टिप्पणियंा दी हैं जिसमें श्रीराम मंदिर पर ऐतिहासिक निर्णय है तो दूसरी ओर कोर्ट ने राफेल में घोटाले सहित कई दूसरी जनहित याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है जिसके कारण गाध्ंाी परिवार व झूठ पर आधारित जनहित याचिकाओं का काला करोबार करने वाले वकीलों की कमाई पर तुषारापात हो चुका है। पूरे देश ने देखा कि कोरोना काल की आढ़ में देश का विकास रोकने के लिए किस प्रकार की विकृत याचिकाएं अदालतों में पेश की जाती रहीं। जबकि वास्तविकता यह है कि देश की न्यायपालिका का सर्वाधिक दुरूपयोग राहुल गांधी की दादी स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने किया था और उन्होंने अपनी कुर्सी को बचाने के लिए पूरे देश भर में आपातकाल लगाकर अपने विरोधियों को जेल भेज दिया था और उनकी जासूसी भी की जा रही थी। रही बात जासूसी की तो वह बीमारी भी सर्वाधिक नेहरू जी से लेकर राजीव गांधी तक ही रही थी। राहुल गांधी की दादी श्रीमती इंदिरा गांधी का शासन तो विरोधियों की जासूसी के सहारे ही चल रहा था।
राहुल गांधी अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजा व शहंशाह कर रहे हैं। उनकी यह बात भी मूर्खतापर्ण है क्योंकि राहुल गांधी को यह नहीं पता कि अब भारत ही नहीं अपितु पूरी दुनिया में राजतंत्र इतिहास के पन्ने में ढेर हो चुका है। राहुल गांधी का सदन में दिया गया भाषण वास्तव में उनकी वंशवादी परंम्परा व तानाशाही का ही दर्शन करा रहा है। देश के अंदर तानाशाही वंशवादी चाटुकारिता का श्रीगणेश नेहरू जी से लेकर श्रीमती इंदिरा गांधी तक चलता रहा। इंदिरा गांधी का पराभव न्यायपालिका ने तो राहुल का पतन विधायिका और देश की जनता ने कर दिया है।
वर्तमान समय में अब जनता मूर्ख नहीं है क्योंकि सूचनाका अधिकार हे ओर सबसे बड़ी बात इंटरनेट के युग में हर सही जानकारी जनता के पासा उपलब्ध है और वह गांधी परिवार के 70 साल के बेहद क्रूर व काले करनामों को समझ चुकी है। अब देश की जनता ने परिवार की भक्ति को त्याग दिया है और वह लगातर उसमे आगे बढ रही है। देश का जनमानस अब अयोग्यता और छदम धर्मनिरपेक्षता को नकार चुका है वह भी आगे और नकारता रहेगा।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी सदन में एक वंशवादी राजा की तरह भाषण दे रहे थे और आरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगा रहे थे। जबकि वास्तविकता यह है कि वास्तव में राहुल गांधी अपने परिवार व दल के ही राजा हैं और वह उसी तरह का व्यवहार कर रहे हैं जिसे देश की जनता अब नकार चुकी है।
( उपर्युक्त आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। आवश्यक नहीं है कि इन विचारों से आईपीएन भी सहमत हो। )

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