25 दिसम्बर विश्ेाष: भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने वाले अटल बिहारी बाजपेयी

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी एक ऐसे राजनीतिज्ञ व सहृदय व्यक्त्वि के धनी तथा महान कवि और प्रख्यात पत्रकार थे जिनके मन में सदैव देश ही सर्वोपरि रहता था। आज भारत जिस तेज गति से देश की सुरक्षा से लेकर आम जनजीवन से संबंधित हर क्षेत्र में में तेज गति से विकास कर रहा है और आत्मनिर्भर भारत बनने की ओर अग्रसर है उसमें अटल जी की भूमिका का बहुत बड़ा योगदान है।

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Lucknow, 25 Dec, 2021 03:34 PM
25 दिसम्बर विश्ेाष: भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने वाले अटल बिहारी बाजपेयी

मृत्युंजय दीक्षित 

आईपीएन। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी एक ऐसे राजनीतिज्ञ व सहृदय व्यक्त्वि के धनी तथा महान कवि और प्रख्यात पत्रकार थे जिनके मन में सदैव देश ही सर्वोपरि रहता था। आज भारत जिस तेज गति से देश की सुरक्षा से लेकर आम जनजीवन से संबंधित हर क्षेत्र में में तेज गति से विकास कर रहा है और आत्मनिर्भर भारत बनने की ओर अग्रसर है उसमें अटल जी की भूमिका का बहुत बड़ा योगदान है। आज भारत जिस तेज गति से मिसाइलोें के क्षेत्र में परीक्षणांे के द्वारा अपने आप को सशक्त बना रहा है वहीं देश के दुश्मन भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति व आत्मनिर्भर हो रही रक्षा प्रणाली से भयभीत हो रहे हैं वह भी अटल जी की ही सरकार का काम है जो रूका हुआ था और उसे ही तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अटल जी का कार्यकाल बहुत ही साफ सुथरा और भ्रष्टाचारमुक्त रहा था। उनके प्रधानमंत्रित्व के कालखंड में जिन परियोजनाओं पर काम किया गया वही अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के शासनकाल में धरातल पर उतर रहीं हैं। अटल जी की सरकार के बाद बंद पड़ी योजनाओं पर तेज गति से काम हो रहा है। आज अटल जी का सबसे बड़ा सपना अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है तथा वह अब आगेेे बढ़ रहा है। वहीं उनकी एक और बड़ी इच्छा भी पूर्ण हो चुकी है और वह है जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद -370 और 35- ए का समापन। अब जम्मू -कश्मीर अटल जी की इच्छाओं के अनुरूप बदलाव की ओर अग्रसर है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के शासनकाल मेें जो भी विकास के काम आगे बढ़ रहे हैं उसमें अटल जी की ही छाप सर्वत्र दिखलायी पड़ रही है। 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी लोकतंत्र के सजग प्रहरी, बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी व उनमें चिंतन की निरंतर गहनता, वैचारिक विविधता एक प्रशासक की अटल दृढ़ता, राजनेता की अर्न्तदृष्टि एवं समर्पण भाव उनके व्यक्तित्व में दृष्टिगोचर होता था। अटल जी एक संवेदनशीलता से परिपूर्ण कवि भी थे, लेखक और पत्रकार भी थे। 

अटल जी का जन्म 25 दिसम्बर 1926 को शिंदे की छावनी (मध्य प्रदेश ) में प्राइमरी स्कूल अध्यापक स्वर्गीय पंडित कृष्ण बिहारी बाजपेयी के घर पर हुआ। उनकी माता का नाम श्रीमती कृष्णा देवी था जो कि धर्मपरायण महिला थीं। जब अटल जी का जन्म हुआ तो उनके घर में मंगल वाद्य बजाये गये। अटल जी का पूरा परिवार ही संघ के प्रति निष्ठावान था। वह आठ वर्ष की आयु में ही संघ के संपर्क में आ गये और विद्यार्थी जीवन मंे ही संघ से प्रेरित होकर मन में ठान लिया था कि वे देश के लिये जियेंगे और देश के लिये ही मरेंगे। अटल जी की शिक्षा दीक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज और कानपुर के डी ए वी कालेज में संपन्न हुई। बी ए की परीक्षा उच्च श्र्रेणी में पास की व राजनीति शास़्त्र में एम ए प्रथम श्र्रेणी में पास करी। अध्ययन के दौरान ही अटल जी नेता बन चुके थे तथा विक्टोरिया कालेज छात्र संघ के महामंत्री ,ग्वालियर छात्र संघ के अध्यक्ष एव आर्य कुमार सभा के महामंत्री बने रहे। अटल जी ने अपने  पिता के साथ ही एल एल बी की परीक्षा पास की। 

अटल जी को मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त था तथा छात्र जीवन में ही वाद विवाद प्रतियोगिता, कविता पाठ प्रतियोगिता आदि में भाग लेकर लोकप्रियता हासिल कर ली थी। अटल जी निष्काम कर्मयोगी थे। अटल जी भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में से एक थे। वह लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन तथा स्वदेश आदि समाचार पत्र, पत्रिकाओें के संपादक  भी रहे। उन्होंने 1946 में ही अपना जीवन संघ को समर्पित कर दिया था उन्होेंने काफी समय तक पूर्णकालिक प्रचारक के रूप मे कार्य किया। अटल जी कहा करते थे कि भारत का प्रत्येक कण स्वर्ग से भी अधिक पवित्र है तथा महान तीर्थ है। उनका कहना था कि हमारे एकमात्र देवी देवता हमारे देशवासी हैं। उनकी पूजा अर्चना ही सच्ची मानवता है। हमारे राष्ट्रीय जीवन का मूल स्रोत हमारा धर्म है। अटल जी के अनुसार भारत एक अदभुत देश है। 

अटल जी का राजनैतिक जीवन बहुत ही संघर्ष से भरा रहा। जब स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपनी सरकार को बचाने के लिए आपातकाल लगाया तब उन्होंने कांग्रेस विरोधी नेताओं को एकत्र करने और आपातकाल को उखाड़ फेकने मंे महती भूमिका अदा की थी। अटल जी व संघ ने आपातकाल के खिलाफ बहुत संघर्ष किया और जिसके परिणामस्वरूप ही मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी और उस सरकार में अटल जी विदेश मंत्री बने वह देश के ऐसे पहले विदेश मंत्री थे जिन्होेंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया। इस प्रकर वह देश के से पहले विदेश मंत्री बने जिन्होंने संयुक्तराष्ट्र महासभा में हिदी में  भाषण दने की परम्परा की शुरूआत की। 

अटल जी देश के तीन बार प्रधानमंत्री बने। पहले 13 दिन, फिर 13 माह व फिर पूरे सत्र के लिए प्रधानमंत्री बने। अटल जी की सरकार में कई ऐतिहासिक कदम उठाये गये थे जिनकी गूंज आज भी सुनायी दे रही है। अटल जी सरकार ने वैश्विक दबाव को नजरअंदाज करते हुए परमाणु परीक्षण किये तथा विश्व के कई देशों ने भारत पर प्रतिबंध भी लगाये लेकिन वह किसी दबाव में नहीं झुके। अटल जी ने पाकिस्तान के साथ मैत्री को बढ़ावा देने के उददेश्य से लाहौर से बस यात्रा भी की लेकिन इसके बदलेें में भारत को पाकिस्तान के विश्वासघात का सामना करना पड़ा और कारगिल की पहाडियों पर फिर भारतीय सेना ने अपना पराक्रम दिखाया जिससे अटल सरकार की जयकार की गयी। अटल जी ने लखनऊ के सांसद के नाते प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए लखनऊ के लिए कई कर्य किये। वह लम्बे समय तक लोकसभा सदस्य रहे, दो बार रज्यसभा के सदस्य भी चुने गये। अटल जी ने 24 दलों के साथ सरकार बनाई थी जो उस समय एक कीर्तिमान था। अटल जी भारतीय जनसंघ के भी लम्बे समय तक अध्यक्ष रहे तथा बाद में 6 अपै्रल 1980 में बनी भाजपा के अध्यक्ष बने। 

अटल जी जब तीसरी बार प्रधानमंत्री बने तब उनकी सरकार में कई महत्वपूर्ण परियोजनाआंे पर काम शुरू हुए। अटल जी की सरकार मंेे ही सौ वर्ष पुराने कावेरी विवद को सुलझाया गया।  र्स्व्णिम चतुर्भुज परियोजना की शुरूआत अटल जी की सरकार में ही हुई। ऐसे बहुत से काम हुए जो अटल जी की सरकार के लिए गौरव की बात रहे हैं। अटल जी को अपने राजनैतिक जीवन में कई पुरस्कार प्राप्त हुए। जिसमें 1992 में पदम विभूषण, 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1994 मंें श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार, 1994 मेें भारतरत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें कानपुर विश्वविद्यालय ने 1993 में डी लिट की उपाधि भी प्रदान की। 2015 में बांग्लादेश की ओर से फ्रेंडस आफ बांग्लादेश लिबरेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया।  अटल जी एक ऐसे राजनेता थे जिनका सम्मान  हर विरोधी दल के नेता व विचारधारा के लोग करते थे। अटल जी को 2015 में ही भारतरत्न से सम्मानित किया गया। 

लखनऊ के शिल्पकार भी थे - महानायक अटल जी

अटल जी ने लखनऊ शहर का नाम अंतर्राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया। आज लखनऊ शहर विकास का जो नया पैमाना गढ़ रहा है उसके वास्तविक शिल्पकार अटल जी ही हैं और यह लखनऊ उनको हमेशा याद रखेगा। अटल जी लखनऊ से पांच बार सांसद रहे जिसमें तीन बार प्रधानमंत्री बने। अटल जी लखनऊ में 1991, 1996, 1998 1999 और 2004 में संासद बने। 1991 में उन्होंने कांग्रेस के रंजीत सिह को हराया, 1996 मंे उन्होंने सपा के राजबब्बर को, 1998 में सपा के मुजफ्फर अली को 1999 मंे कांग्रेस  के डा ़कर्ण सिंह को और 2004 में सपा की मधु गुप्ता  को दो लाख मतांे के भारी अंतर से पराजित करने का रिकार्ड बना दिया।  लखनऊ में अटल जी को पराजित करने के लिये विपक्ष ने हर चुनाव में नये पैतरें अपनाये लेकिन हर बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी। लखनऊ का वास्तविक विकास अटल जी ने ही कराया है तथा शहर को कई सौगातें भी दी हैं। राजधानी लखनऊ के सबसे बडेे शिया- सुन्नी विवाद को समाप्त कराने के शिल्पकार भी अटल जी ही थे। अटल जी ने लखनऊ को एक माडल के रूप में विकसित किया। वह नये औेर पुराने शहर की बराबर चिंता किया करते थे। अटल जी को लखनऊ की तेजी से बढ़ रही आबादी का अनुमान था । इसी को ध्यान मंे रखते हुए उन्होंने गोमती नगर रेलवे स्टेशन को चारबाग जैसी सुविधाआंे से लैस करने का प्रस्ताव तैयार कराया। बीच में यह काम ठप पड़़ गया था लेकिन अब यह फिर से चालू हो गया है। फैजाबाद रोड से अमौसी तक अमर शहीद पथ के निर्माण की कल्पना उन्हीं की देन है। अब सभी अनुभव कर रहे हैं कि फैजाबाद रोड, सुल्तानपुर रोड और रायबरेली रोड की ओर लखनऊ के विस्तार की आधारशिला रखना भी अमर शहीद पथ के बिना संभव नहीं होता। लखनऊ-कानुपर हाईवे का चौड़ीकरण लखनऊ - हरदोई का चौड़ीकरण, दीन दयाल स्मृतिका, निशातगंज फ्लाईओवर, कल्याण मंडप भी अटल जी की ही देन है। अटल जी ने ही साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर बनवाया तथा टिकैतराय तालाब और कुड़ियाघाट का जीर्णोद्धार कराया। आज कुड़ियाघाट एक बड़े सामाजिक मिलन स्थल के रूप में हीं नहीं लखनऊ का एक बड़ा फिल्म शूटिंग सेंटर बनता जा रहा है। 

अटल जी की ही पहल पर पुराने लखनऊ की संकरी गलियों में गहरे गडढांे वाली पतली सीवर लाइन की बुनियाद पड़ी। बाद में पूरे शहर के सीवरेज सिस्टम की योजना बनी। लखनऊ मेट्रो की कल्पना भी उन्हीं के कार्यकाल में आयी थी इस तथ्य को आज के समाजवादी मुखिया अखिलेश यादव अच्छी तरह से भूल रहे हैं। आज जो मेट्रो बन रही है उसके भी असली शिल्पकार अटल जी ही थे अपितु समाजवादी शासन में तो यह काम अटक रहा था। राजधानी लखनऊ अटल जी की सियासी कर्मभूमि बन गयी थी। अटल जी की लखनऊ के मुस्लिम परिवारों में भी अमिट छाप रहती थी। उस समय के मुस्लिम नेता एजाज रिजवी ने अटल जी से प्रभावित होकर कमल का झंडा थामा था। उनकी बेटी डा ़शीमा रिजवी भी भाजपा में रम गयीं। यह तब की बात है जब मुसलमान बीजेपी से जुड़ने में परहेज करते थे। अटल जी ने 25 अप्रैल 2007 को कपूरथला चौराहे पर भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन मंे एक चुनावी सभा को संबोधित किया था और उसके बाद उनका लखनऊ से नाता टूट गया था। आज लखनऊ व प्रदेश के अधिकांश भाजपाई उन्हीं की देन हैं। 

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा व लखनऊ की वर्तमान महापौर संयुक्ता भटिया जैसे व्यक्तित्व उन्हीं की अनुपम देन है। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित व पूर्व मुख्यमंत्री तथा राजस्थान के पूर्व राज्यपाल व प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के व्यक्तित्व को निखारने वाले अटल जी ही है। 

राजधानी लखनऊ में ही उनकी पत्रकारिता का श्रीगणेश हुआ था। उनके द्वारा खड़ा किया गया वटवृक्ष राष्ट्रधर्म आज अनवरत चल रहा है। राष्ट्रधर्म पत्रिका के कार्यालय से उनका भावनात्मक  जुड़ाव रहा। अटल जी ने संपादकीय लिखने के साथ अखबार वितरण का काम भी किया। अटल जी ने पंाचजन्य, स्वदेश, वीर अर्जुंन आदि पत्रों का भी संपादन किया। 

हिंदू तन- मन, हिंदू जीवन, रग-रग हिंदू 

मेरा परिचय,  

मैं शंकर का वह क्रोधानल कर सकता 

जगती क्षार- क्षार 

मैं डमरू की प्रलयध्वनि जिसमंे

नचता भीषण संहार, 

रणचंडी की अतृप्त प्यास मैं दुर्गा का उन्मत हास 


यह उनकी राष्ट्रधर्म पत्रिका में पहली प्रकाशित कविता है। 

अटल जी की कविताओं व उनके भाषणों को सुनने के लिये भारी भीड़ उमड़ती थी। 


अटल जी ने माधव आश्रम की दी सौगात 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने 28 जून 2002 को पीजीआई अस्पताल मंे ठीक सामने माधव सेवा आश्रम का उदघाटन किया था तथा इस समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती भी आयी थीं। उदघाटन समारोह में भाजपा नेता राजनाथ सिंह सहित कई नेता उपस्थित थे। इस आश्रम का आरंभ 100 बेडों के साथ किया गया था लेकिन अब आश्रम मंे बेड की संख्या बढ़ाकर 400 कर दी गयी है। यहां पर मरीजों व उनके परिजनों को कम खर्च में खाने व रहने की व्यवस्था थी। 

अटल जी एक युग पुरूष थे।  अटल जी का लखनऊ से बहुत पुराना और गहरा नाता था। उनके जीवन में सादा जीवन उच्च विचार की झलक मिलती है। उन्होंने पूरी तरह से सात्विक जीवन जिया। उनकी कविताओं में अंतर्मन की कथा और व्यथा दिखती है।  

( उपर्युक्त आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। आवश्यक नहीं है कि इन विचारों से आईपीएन भी सहमत हो। )


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